भारत में अंगदान के लिए जागरूकता काफी कम है। इसको बढ़ाने के प्रयास अलग-अलग तरीकों से किए जा रहे हैं। ऐसी ही एक पहल कानपुर में भी देखी गई।
देश में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान ज्यादातर जगहों पर रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। वहीं कानपुर के गोपालेश्वर रामलीला में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। यहां राम लक्ष्मण समेत पूरे राम दरबार ने अपनी देहदान करने का संकल्प लिया है। रामलीला के मंचन के दौरान राम, लक्ष्मण और भरत से लेकर लंकेश ने भी मानवता की रक्षा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।
इस समय हो सकता है अंगदान
किसी भी व्यक्ति की मृत्यु दो चरणों में होती है। पहला ब्रेन डेथ या क्लिनिकल डेथ यानी की हृदय गति का रुकना। इसमें अगर दिल ने काम करना बंद कर दिया और दिमाग काम कर रहा है तो व्यक्ति के पुनः जीवित होने और सांस चलने की एक हद तक ही संभावना रहती है। अगर दिमाग काम करना बंद कर दे यानी ब्रेन डेथ हो जाए तो कुछ समय बाद मृत्यु तय है, भले ही सांसे चल रही हो।
अंगदान की यह है प्रक्रिया
उपर्युक्त परिस्थिति के चलते आमतौर पर मरीज को वेंटीलेटर पर रखा जाता है। परिजनों को बता दिया जाता है कि इनकी मृत्यु कुछ समय बाद हो जाएगी। यही वह समय होता है जब एक सरकार द्वारा तय कमेटी की देखरेख में अंग लिए जा सकते हैं। इन सबकी वीडियोग्राफी होती है और पूरी प्रक्रिया निगरानी में पूरी की जाती है। इसमें दौरान परिजनों की सहमति भी जरुरी होती है।