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कानपुर आने वाला बिजनेस अब कर रहा पाकिस्तान और बांग्लादेश का रुख

अपने लेदर के लिए देश ही नहीं पूरे विश्व में मशहूर कानपुर की लेदर इंडस्ट्री तबाह होने की कगार पर है. सरकार को हजारों करोड़ का राजस्‍व देने वाली जाजमऊ की लेदर इंडस्ट्री पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है. यहां बीते 2 साल में 150 से ज्यादा टेनरियां बंद हो गईं. इस दौरान लगातार लेदर का उत्पादन और एक्सपोर्ट भी घटता गया.

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Kanpur

कानपुर आने वाला बिजनेस अब कर रहा पाकिस्तान और बांग्लादेश का रुख

कानपुर। अपने लेदर के लिए देश ही नहीं पूरे विश्व में मशहूर कानपुर की लेदर इंडस्ट्री तबाह होने की कगार पर है. सरकार को हजारों करोड़ का राजस्‍व देने वाली जाजमऊ की लेदर इंडस्ट्री पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है. यहां बीते 2 साल में 150 से ज्यादा टेनरियां बंद हो गईं. इस दौरान लगातार लेदर का उत्पादन और एक्सपोर्ट भी घटता गया. इसके बाद अब लेदर कारोबारियों के लिए सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

ऐसी मिली है जानकारी
लगातार बंदी और लेदर की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता के चलते विदेशी ग्राहकों का भरोसा भी कम हुआ है. इससे बीते दो साल में लेदर एक्सपोर्ट में भारी गिरावट आई है. पाक और बांग्लादेश को मिल रहे आर्डर यूपी लेदर टेनरी एसोसिएशन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक कानपुर रीजन से काफी एक्सपोर्ट होता आया है. यहां से आस्‍ट्रेलिया, यूरोप, यूएस जैसे देशों से खूब आर्डर मिलते थे,लेकिन बीते दो सालों में यह लगातार कम हुए हैं. इस दौरान बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार जैसे देशों में लेदर इंडस्ट्री को लेदर की उपलब्धता के चलते ज्यादा आर्डर मिलने लगे.

लटकी है बंदी की तलवार
इतना ही नहीं, जाजमऊ की लेदर इंडस्ट्री में कभी भी बंदी की तलवार से उत्पादन का संकट है. लेदर के विदेशी खरीददार को आर्डर पूरा करने में ही दिक्कतें हो रही हैं. इसकी वजह से अब विदेशी खरीददार दूसरे प्रतिस्‍पर्धी बाजार का रुख कर रहे हैं. लेदर गुड्स की बढ़ी लागत टेनरियों से निकलने वाले तैयार लेदर की विदेशों के अलावा फुटवेयर, सैडलरी व लेदर गुड्स बनाने वाली कई छोटी बड़ी कंपनियों में भी सप्लाई होती है.

इसकी कमी आती है आड़े
लेदर बनाने के लिए रॉ मैटेरियल की कमी भी आड़े आती है. इसके बाद बंदी व दूसरे तरह की समस्‍याओं के चलते लेदर प्रोडक्ट्स की लागत में काफी इजाफा हुआ है. बीते दो सालों में ही 30 फीसदी तक लागत बढ़ी है. इस वजह से फुटवेयर व लेदर गुडस बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे पर भी बढ़ी लागत का सीधा असर हुआ है.