
Sawan Somvar 2019 : आधी रात के बाद गौरी शिव मंदिर में गूंजती हैं घुंघरी की आवाज
कानपुर। यमुना के किनारे बसा बीबीपुर गांव बीरबल Birbal की नगरी के नाम पर भी जाना जाता है। यहां पर एतिहासिक किले, सरोवर और कुए हैं, जो सैकड़ों साल पुराने हैं। ऐसी ही एक धरोहर गौरी शंकर मंदिर Gauri Shankar Temple है। यहां सावन के महिने Sawan 2019 में हररोज सैकड़ों भक्त आते हैं और भगवान शिव और गौरी Lord Shiva and Gauri की पूजा-अर्चना के बाद मन्नत मांगते हैं। ग्रामीणों की मानें तो आधी रात के बाद एकाएक मंदिर परिसर से घुंघरू की झंकार और शहनाई की गूंज सुनाई देने लगती है। शोधकर्ता इस रहस्य को जानने के लिए कईसाल डटे रहे पर इसका पता नहीं लगा सके।
दंपत्ति को संतान की होती प्राप्ति
मंदिर के पुजारी पंडित रमाकांत बाजपेई का दावा है कि रात बारह बजे के बाद मंदिर में अचानक उजाला होता है और घुंघरू की आवाजें आती है जो दूर-दूर तक सुनायी देती है। मंदिर के अंदर भी नृत्य भी होता है और शहनाई बजती है। पुजारी बताते हैं कि यदि कोई दंपत्ति संतान से वंचित हो, वह सावन के हर सोमवार को यहां आकर यमुना नदी के जल से भगवान शिव और मां गौरी का जलाभिषेक करे तो उनके आंगन में किलकारियां सुनाई देती हैं। इसके अलावा ऐसे युवक व युवतियां जिनके विवाह में गृहनक्षत्र बाधक बनें हों, वह सावन के आखिरी सोमवार को आकर सफेद फूल, बेलपत्र और यमुना का जल भगवान शिव और मां गौरी के चरणों में चढ़ाएं। भोले बाबा की कृपा से उनकी शादी होनी तय मानी जाती है।
एक हजार वर्ष पुराना मंदिर
पुजारी पंडित .रमाकांत बाजपेई ने रविवार को बताया कि रामप्रताप पाण्डेय और उनके छोटे भाई भगवान प्रसाद पाण्डेय ने एक हजार वर्ष पहले मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के लिये बनारस (वाराणसी) से शिवलिंग लायी गयी थी। शिवलिंग में मां पार्वती भी विराजमान है। बनारस के पुरोहितों ने यहां कई दिनों गांव में रहकर विधि विधान से शिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा करायी थी। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि मंदिर में शिवलिंग के गर्भ से तीस फीट गहराई में बनी सुरंग आसपास के कई मंदिरों को भी जोड़ती है। मंदिर के ठीक के सामने वर्ष 1844 का कुआ भी बना है जो मंदिर से सुरंग के जरिये जुड़ा है।
रंग बदलता है शिवलिंग
पुजारी बताते हैं कि शिवलिंग की महिमा बड़ी ही निराली है जो दिन में ये कई बार रंग बदलता है। गौर से देखा जाये तो शिलिंग में अपना चेहरा भी साफ दिखता है। पुजारी बताते हैं कि ये भी एक रहस्य है, जिस पर आज तक पर्दा नहीं उठा। भक्त सुबह, दोपहर और शाम के वक्त मंदिर के अंदर आते हैं और हर रंग में शिवलिंग के दर्शन कर पुण्य कमाते हैं। पुजारी बताते हैं कि सफेद रंग की शिवलिंग के दर्शन जिस भक्त को हो जाते हैं, उसके घर बीमारी, गरीबी, मुकदमा सहित कोई भी बाधा कदम नहीं रख सकती। शिवलिंग का सफेद रंग सिर्फ शाम के वक्त ही होता है।
खजाने की रखवाली करता है नाग
पुजारी के मुताबिक, मंदिर परिसर के नीचे खजाना छिपे होने के पुख्ता प्रमाण हैं। एक किस्से का जिक्र करते हुए बताते हैं कि कुछ लोगों ने खजाने के चक्कर में रात में चोरीछिपे शिवलिंग के आसपास 15 फीट तक गहराई में खुदायी करा डाली । अचानक शिवलिंग के गर्भ के अंदर अलौकिक प्रकाश होने के साथ काले नाग को देख देख खुदाई करने वाले वहां से तुरंत भागे। एक-एक कर चार लोग बीमार भी पड़ गये थे। बाद में शिवलिंग में माथा टेककर जब माफी मांगी तब कहीं वह ठीेक हो पाए। इस घटना के बाद फिर किसी ने मंदिर के गर्भगृह की खुदाई करने की हिम्मत नहीं की।
Published on:
12 Aug 2019 09:03 am
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