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कानपुर

अजहर की मौत के बाद मछरिया में बवाल, मृतक की मां ने अखिलेश से लगाई गुहार

नौबस्ता थानाक्षेत्र का मामला, युवक की मौत के बाद जमकर हुआ पथराव, पुलिस ने लाठियां पटक कर भीड़ को खदेड़ा, मोहल्ले में पीएसी तैनात।

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कानपुर। नौबस्ता थानाक्षेत्र Naubasta Police Station निवासी मोहम्मद अजहर की पुलिस हिरासत में मौत Death in police custody का आरोप लगा सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और शव को सड़क पर रख थाने का घेराव कर लिया। सूचना मिलते ही अलाधिकारी पुलिस-पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे तो गुस्साई भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे किदवई नगर और बर्रा थाना प्रभारी समेत कई पुलिस वाले भी चुटहिल हुए। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच का भरोसा दिया, तब कहीं उग्र भीड़ शांत हुई। इस बीच शनिवार की सुबह मृतक की मां ने कहा कि शासन-प्रशासन पूरे मामले को रफा-दफा करने में जुटा हे। इसलिए हम प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव Akhilesh Yadav से मांग करते हैं िकवह कानपुर आएं और बेटे की मौत की जांच निष्पक्ष जाचं एजेंसी से करवाएं।

क्या है पूरा मामला
बबूपुरवा निवासी फिरोज का मछरिया झील स्थित कबीरनगर में मकान है। यहां फातिमा बेगम किराए पर रहती हैं। फातिमा के मुताबिक तीन बेटों में मझला मोहम्मद अजहर बुधवार की रात 11 बजे घर से निकला था। दूसरे दिन दोपहर में यशोदा नगर निवासी इमरान सिद्की ने घर आकर जानकारी दी, कि बेटे की मौत हो गई है। पोस्टमार्टम के बाद देरशाम शव घर पहुंचा तो इलाकाई लोग बरकाती मस्जिद चैराहे के पास जमा हो गए। भीड़ का आरोप था कि अजहर की मौत पुलिस कस्टडी में हुई है। उसे थर्ड डिग्री टार्चर किया गया था। पुलिस दबाव बनाकर बीमारी से मौत की बात साबित करने में जुटी है।

शव को रख रोड किया जाम
मृतक के परिजनों का आरोप है कि अजहर की मौत के बाद पुलिस उसके शव को अस्पताल में छोड़कर भाग गए थे। हमें गुरूवार को सूचना दी गई। इसी बीच मस्जिद के पास सैकड़ों लोग जमा हो गए और अजहर के शव को लेकर नौबस्ता थाने की तरफ बड़ने लगे। थाने से कुछ दूरी पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया तो भीड़ उग्र हो गई और पुलिसवालों से भिड़ गई। बवाल बढ़ने पर एसपी साउथ रवीना त्यागी, एसपी पश्चिम संजीव सुमन, एसपी पूर्वी राजकुमार समेत कई थानों का फोर्स पहुंचा और भीड़ को खदेड़ना चाहा लेकिन कामयाब नहीं हो सके।

शहरकाॅजी की भी नहीं मानी बात
पुलिस ने माहौल शांत कराने के लिए शहर काजी आलम रजा नूरी को मौके पर बुलाया, लेकिन बवाल कर रहे लोगों ने उनकी भी नहीं सुनीं। रुक-रुक पुलिस पर पथराव किया, इसमें मछरिया निवासी मो. रिजवान और दबौली के अनूप पांडेय का सिर फट गया। पुलिस हंगामा शांत कराने के प्रयास में थी, लेकिन वे मांग पर अड़े रहे। फिर पुलिस के खदेड़ने के बाद मामला शांत हो सका। तनाव के चलते शनिवार को फोर्स तैनात रहा। एसपी रवीना त्यागी के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्टअटैक से मौत की पुष्टि हुई है। साथ ही शरीर पर कुछ चोटों के निशान मिले हैं मामले की जांच की जा रही है।

पुलिस की दलील
थाना प्रभारी नौबस्ता समर बहादुर का कहना है कि यशोदा नगर के पेट्रोल लाइन से तेल चोरी के आरोपित इमरान को अजहर मौरंग के ढेर पर घायल मिला था। इमरान की सूचना पर ही जेब्रा सिपाही उसे लेकर कांशीराम अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक की मां फातिमा बेगम की ओर से इमरान ने तहरीर लिखी थी। जब उनसे इस बारे में मां से पूछा गया तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। उनका कहना था कि पुलिस ने उनसे कुछ भी नहीं लिखवाया।

मृतका की मां का आरोप
मृतका की मां का आरोप है कि हमें बिना सूचना दिए बेटे के शव का पोस्टमार्टम पुलिस ने करा दिया। अगर सिपाही अजहर को अस्पताल ले गए और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया तो सिपाही शव छोड़कर वहां से भाग क्यों गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए क्यों नहीं ले गए पूरे मामले में इमरान ही क्यों? इमरान ही पुलिस और परिवार को सूचना देने वाले, तहरीर के लेखक व पंचनामा के गवाह भी बने। जबकि मैं इमरान को जानती तक नहीं। मेरे बेटे को मारा गया है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।