बादल छाने से फसल हो रही प्रभावित जीरोता. समीपवर्ती सवाईमाधोपुर जिले की तर्ज पर करौली में भी किसानों में अमरूद की पैदावार के प्रति रुचि जगी और लेकिन किसानों को उचित दाम नहीं मिलने से यहां अमरूदों की मिठास फिकी हो रही है। मौसम में उतार चढ़ाव के चलते अमरूद उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि दीपावली के बाद हर साल सर्दी जोर पकड़ लेती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा। अमरूद की पैदावार के लिहाज से सर्दी नहीं पड़ रही है। जिससे फसल विकसित नहीं हो रही है।
अमरूदों की मिठाई फीकी, मौसम नहीं अनुकूल
बादल छाने से फसल हो रही प्रभावित
जीरोता. समीपवर्ती सवाईमाधोपुर जिले की तर्ज पर करौली में भी किसानों में अमरूद की पैदावार के प्रति रुचि जगी और लेकिन किसानों को उचित दाम नहीं मिलने से यहां अमरूदों की मिठास फिकी हो रही है। मौसम में उतार चढ़ाव के चलते अमरूद उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि दीपावली के बाद हर साल सर्दी जोर पकड़ लेती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा। अमरूद की पैदावार के लिहाज से सर्दी नहीं पड़ रही है। जिससे फसल विकसित नहीं हो रही है। कुछ दिनों से बादल छाने से मौसम अमरूद के अनुकूल नहीं है। जिससे अमरूद ठीक प्रकार से विकसित नहीं हो रहा है। पेड़ में ही फल खराब हो रहा है। जीरोता, एकट, जोड़ली, निमोदा, हाडौती, फतेहपुर, बगीदा, डूण्डीपुरा, मशावता, डाबरा, डिकोली, बालाहेत आदि में कई जगह अमरूद पेड़ पर ही खराब रहे हैं। करौली जिले में करीब ५०० बीघा में अमरूद का रकबा है।
मंडियों में नहीं मिल रहे उचित दाम
हर साल किसानों को अमरूदों के उचित दाम मिलते थे, लेकिन इस बार उचित दाम नहीं मिलने से परेशानी आ रही है। आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दर्जनों गांवों में अमरूद की पैदावार खराब हो रही है। कम विकसित अमरूदों की मंडी में अधिक आवक होने से सही दाम नहीं मिल रहे। मंडियों में अमरूद मात्र दस से पन्द्रह रुपए किलो में बिक रहा है। ऐसे में किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है।
ठेकेदारों ने नहीं दिखाई रुचि
किसान अभयमन मीना, विजय मीना, मनोहर मीना, अशोक राजा ने आदि ने बताया की उचित तापमान नहीं मिलने पर अमरूद खराब हो जाता है। इसके लिए सही समय पर तेज सर्दी पडऩा जरूरी है, लेकिन इस बार सर्दी में उतार-चढ़ाव चल रहा है। आधे नवंबर माह में भी सर्दी ने असर नहीं दिखाया है। इस बार ठेकेदारों ने भी अमरूद के ठेके नहीं लिए है। जिससे किसानों को नुकसान हुआ है। उनको खुद ही अमरूदों को बेचने में मशक्कत करनी पड़ रही है। पहले ठेकेदार दिल्ली, हरियाणा तक अमरूद ले जाते थे, लेकिन इस बार किसान स्थानीय स्तर पर ही औने पौने दामों पर अमरूद बेचने को मजबूर हैं। जानकार बताते हैं कि पेड़ से तोडऩे के बाद अमरूद को बारह घंटे के अंदर मंडियों में पहुंचाना होता है। देरी होने पर उसकी गुणवत्ता कमजोर होने लगती है। जिससे दाम कम मिलते हैं।