करौली

जिम्मेदारों का नहीं ध्यान, रैंकिंग में फिर कैसे लगेगी करौली की छलांग

करौली. कहने को तो, करौली जिला मुख्यालय है, जहां प्रशासन से लेकर अन्य महकमों के आला अफसर बैठते हैं, लेकिन अनदेखी की वजह से जगह-जगह लगे कचरे के ढेर रियासत कालीन नगर की सूरत बिगाड़ रहें हैं।

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Jan 08, 2023
जिम्मेदारों का नहीं ध्यान, रैंकिंग में फिर कैसे लगेगी करौली की छलांग

करौली. कहने को तो, करौली जिला मुख्यालय है, जहां प्रशासन से लेकर अन्य महकमों के आला अफसर बैठते हैं, लेकिन अनदेखी की वजह से जगह-जगह लगे कचरे के ढेर रियासत कालीन नगर की सूरत बिगाड़ रहें हैं। इस बीच स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की नई गाइड लाइन आ गई है। जिसमें रैंङ्क्षकग सुधार पाना टेड़ी खीर साबित होगा, क्योंकि शहर के परकोटे के भीतरी बाजारों से लेकर मुख्य सड़कों और नई बसी कॉलोनियों में गंदगी से रहवासियों के साथ ही राहगीर परेशान हैं।

इसके चलते लोगों में अब नाराजगी पनपने लगी है। जबकि सर्वेक्षण में जनता की राय ही महत्वपूर्ण होगी। सिटीजन फीडबैक के लिए मोबाइल एप भी डाउनलोड कराना होगा। जिसमें लोग घर बैठे अपनी शिकायत और सुझाव दे सकेंगे। गौरतलब है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में करौली शहर ने नेशनल रैङ्क्षकग में 123 व स्टेट रैङ्क्षकग में 18 वां स्थान प्राप्त किया था।

65 लाख प्रतिमाह खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था चौपट
नगर परिषद प्रशासन द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत नगर की साफ-सफाई में ध्यान देने के साथ ही लोगों को जागरूक करना है। लेकिन आज भी शहर की अनेक गली मोहोल्ले में कूड़े कचरे को एक-एक सप्ताह तक उठाव नहीं किया जा रहा है। घरों से भी कचरा नहीं उठता। जबकि शहर की सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करीब 65 लाख रुपए खर्च होते हैं।

हाइवे के आसपास भी कचरे के ढेर
नेशनल हाइवे पर मुंशी त्रिलोकचंद माथुर स्टेडियम के सामने, भीम नगर, तीन बड़, मंडरायल रोड़, ट्रक यूनियन के अलावा भीतरी इलाके में कोतवाली थाने के सामने, अस्पताल के बाहर, सब्जी मंडी समेत विभिन्न इलाकों में कचरा जमा रहता है। जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। मुंह ढककर निकलना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि शहर से प्रतिदिन करीब 10 से 15 टन कचरा निकलता है। जिसे मासलपुर रोड आमनकापुरा स्थित एमआरएफ सेंटर में डंप किया जाता है।

55 वार्डों में हर जगह गंदगी
नेशनल हाइवे पर बसे 55 वार्डों वाले शहर के मुख्य मार्ग पर सफाई केवल नाम के लिए की जाती है। नगर परिषद के पास 100 नियमित सफाई कर्मचारियों के अलावा 225 ठेका सफाईकर्मी हैं। इसके अलावा शहरी रोजगार गारंटी योजना के श्रमिकों से भी सफाई कराई जा रही है। यही नहीं ट्रेक्टर-टॉली, डंपर, जेसीबी मशीन, ऑटो टिपर आधुनिक संक्शन मशीन समेत पर्याप्त सफाई अमला और भरपूर सफाई संसाधन भी हैं। लेकिन गंदगी के ढेरों पर विचरण करते आवारा जानवर सफाई व्यवस्था की सच्चाई बयां कर रहे हैं।

325 सफाईकर्मी और आधुनिक संसाधन हैं परिषद के पास
नगर परिषद के पास सफाई के लिए 325 कर्मचारियों के अमले सहित 15 ऑटो टिपर, 4 ट्रेक्टर-ट्रॉली, 2 डम्पर, एक जेसीबी, एक संक्शन मशीन व दो मडपंप हैं। आधुनिक तकनीक से बने संसाधन और भारी-भरकम कार्मिकों का लवाजमा नगर की गंदगी दूर नहीं कर पा रहा हैं।

9500 अंकों का होगा मूल्यांकन
वर्ष 2022 की अपेक्षा 2023 के स्वच्छ सर्वेक्षण में रैङ्क्षकग सुधारना कठिन होगा। सर्वेक्षण के आठवें संस्करण में इस साल मूल्यांकन 9500 अंकों के आधार पर किया जाएगा। जबकि वर्ष 2022 में 7500 अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा सिटीजन फीडबैक के लिए शहर की दो प्रतिशत आबादी को स्वच्छता एप इंस्टॉल कराना अनिवार्य है। सर्वेक्षण के मूल्यांकन के लिए जल प्रबंधन एवं सफाई मित्र सुरक्षा, प्रमाणीकरण, सिटीजन वॉइस को शामिल किया है।

इनका कहना है
स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की दौड़ शुरू हो रही है। इस दौड़ में रैङ्क्षकग सुधार के लिए नगर परिषद ने भी अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। लक्ष्य को पाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसी उद्देश्य के तहत जागरूकता अभियान चलाऐंगे।
नरसी मीना, आयुक्त नगरपरिषद, करौली।

Published on:
08 Jan 2023 12:38 pm
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