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नियमों के उलझन में फंस रही सौर ऊर्जा से सिंचाई

locationकरौलीPublished: Feb 04, 2024 02:21:25 pm

Submitted by:

Kirti Verma

सौर ऊर्जा के जरिए फसल को सिंचित करने के लिए जिले के लिए चालू वित्तीय वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प लगाने के मिले लक्ष्य कागजों में ही उलझकर रह गए हैं। ऐसा नहीं है कि सौर ऊर्जा पम्प लगाने के प्रति जिले के किसानों ने रुचि नहीं दशाई हो।

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सौर ऊर्जा के जरिए फसल को सिंचित करने के लिए जिले के लिए चालू वित्तीय वर्ष में सौर ऊर्जा पम्प लगाने के मिले लक्ष्य कागजों में ही उलझकर रह गए हैं। ऐसा नहीं है कि सौर ऊर्जा पम्प लगाने के प्रति जिले के किसानों ने रुचि नहीं दशाई हो। जिले को मिले लक्ष्यों से लगभग दोगुना तक पत्रावलियां विभाग को मिली, लेकिन वित्तीय वर्ष के 10 माह बीतने के बाद भी जिले में 280 सौर ऊर्जा पम्प के लक्ष्य के मुकाबले महज 46 पम्प ही लग सके हैं। ऐसे में वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक इन लक्ष्यों के पूर्ण होने की संभावना कम ही है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषकों को अनुदान पर सौर ऊर्जा पम्प लगवाए जाने हैं। इसके लिए सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले के लिए 280 सौर ऊर्जा पम्प का लक्ष्य दिया गया। इनमें सामान्य वर्ग के कृषकों के लिए 115, अजा के लिए 15 तथा अजजा के लिए 150 सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र लगाने का लक्ष्य शामिल है।
इस कारण आई परेशानी
उद्यान विभाग के सूत्रों के अनुसार सोलर पम्प संयंत्र के तहत 3 एचपी, 5 एचपी व 7.5 एचपी एसी के लिए सोलर पम्प कंपनियों से दरों का अनुमोदन ही नहीं हो सका है। केवल 7.5 एचपी में डीसी के लिए ही दरें अनुमोदित हो सकी है। एसी में दरें अनुमोदित नहीं होने के कारण पत्रावलियां अटकी पड़ी हैं। इसके अलावा इस बार दरों में भी बढ़ोतरी होने के कारण भी लक्ष्य प्रभावित हुए हैं। पहले जहां 7.5 एचपी डीसी सौर पम्प संयंत्र लगवाने के लिए किसान के हिस्से की राशि एक लाख 47 हजार रुपए थी, जबकि इस बार यह हिस्सा राशि 2 लाख 14 हजार 638 रुपए हो गई है। उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से कुल लागत पर 60 प्रतिशत अनुदान राशि देय है। गौरतलब है कि कम्पनियां से अनुबंध नहीं हो पाने के कारण गत वर्ष भी पत्रावलियों का निस्तारण नहीं हो सका था।
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523 पत्रावलियां आई, 166 हुई निरस्त
सोलर पम्प संयंत्र के प्रति किसानों ने रुचि दर्शाई और विभाग को करीब 523 पत्रावलियां प्राप्त हुईं, लेकिन इनमें से 166 पत्रावलियां ऐसी रही जो किसी कारण निरस्त हो गई और कई पत्रावलियों को किसानों ने वापस ले लिया। जबकि विभाग ने 184 पत्रावलियों को स्वीकृत किया। वहीं शेष पत्रावलियां अभी लंबित चल रही हैं। स्वीकृत की गई 184 पत्रावलियों में से 129 पत्रावलियों की उद्यान विभाग की ओर से प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई, जिनमें से 65 किसानों ने राशि जमा कराई है और अब तक केवल 46 सोलर पम्प ही लग सके हैं।
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अनुबंध के अभाव में अटकी पड़ी हैं पत्रावलियां
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान पीएम-कुसुम योजना के तहत जिले को 280 सौर ऊर्जा पम्प लगाने का लक्ष्य मिला था। इसके लिए किसानों की ओर से पत्रावलियां भी जमा हो चुकी हैं। सोलर पम्प संयंत्र में 3एचपी, 5 एचपी और 7.5एचपी की दरें एसी में अनुमोदित नहीं हुई है, केवल 7.5एचपी में डीसी की दरें ही अनुमोदित हो सकी है, जिससे लक्ष्य अभी अधूरे हैं। हालांकि जो भी किसान पत्रावली प्रस्तुत कर रहे हैं, उनकी पत्रावलियों पर प्रशासनिक स्वीकृति तत्काल जारी की जा रही है। लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रामलाल जाट, उपनिदेशक उद्यान विभाग करौली

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