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हनुमानजी के कंधों पर विराजित हैं भगवान राम व लक्ष्मण

Lord Rama and Lakshman are seated on the shoulders of Hanumanji. आस्था का केंद्र है पाताली हनुमान मंदिर

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हनुमानजी के कंधों पर विराजित हैं भगवान राम व लक्ष्मण

हनुमानजी के कंधों पर विराजित हैं भगवान राम व लक्ष्मण

हिण्डौनसिटी.
प्राय: हनुमान मंदिरों में हनुमानजी की एकल प्रतिमा की पूजा होती है। लेकिन प्रधान डाकघर के पास स्थित पाताली हनुमान मंदिर में हनुमानजी के साथ भगवान राम और लक्ष्मण की पूजा की जाती है। मंदिर में विराजित हनुमानजी के पाताली स्वरूप मे प्रतिमा के कंधों पर भगवान राम व लक्ष्मण को विराजित किए हुए हैं। हनुमानजी के साथ भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण के दर्शन होने से मंदिर क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। बुजुर्गों के अनुसार पाताली हनुमान मंदिर हरदेवजी मंदिर व प्रहलाद कुण्ड के नृसिंह मंदिर के समकालीन है।


पाताली हनुमान मंदिर के महंत शैलेंद्र भारद्वाज ने बताया कि मंदिर करीब साढ़े तीन से वर्ष पुराना है। मंदिर में अहिरावण का संहार का पातालपुरी से भगवान राम और लक्ष्मण को कंधे पर बैठाए हनुमानजी की विराजित है। प्रतिमा के पैरों में राक्षस अहिरावण भी दृश्यमान हो रहा है। प्रारंभ में हनुमानजी की प्रतिमा पाटोरपोश मे विरारिज थी। आस-पास आबादी नहीं उस दौरान लोगों की आवक कम रहती।

समीप स्थित ज्ञानदास-मानदास की बगीची में संतों को ठहराव होता था। करीब साढे चार दशक पहले मनौती पूर्ण होने पर एक भक्त ने पाटोरपोश हटवाकर एक कक्ष का निर्माण कराया। बाद मेंं मोहन नगर की बसावट होने से मंदिर धीरे-धीरे लोगों की आस्था का केंद्र बन गया। महिला भक्त मंडल व श्रद्धालुओ द्वारा धार्मिक आयोजन और पूजा संकीर्तन का आयोजन किया जाता है। मंदिर में आम दिनों की तुलना में मंगलवार व शनिवार को शृद्धालुओं की ज्यादा भीड रहती है। मंदिर परिसर में संतोषी माता, नृसिंहजी व शिवालय होने से आम दिनों में भी शृद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

राम-लक्षण का भी होता चौला से शृंगार-


मंदिरों में भगवान रामचंद्र और लक्ष्मणजी को राजसी शृंगार होता है। लेकिन पाताली हनुमान मंदिर में कंधे पर विराजित राम-लक्ष्मण की प्रतिमाओं का हनुमानजी के साथ सिंदूर से चौला चढ़ा कर श्रृंगार किया जाता है। महंत ने बताया कि मंदिर में प्रति मंगलवार, शनिवार व त्योहारों पर हनुमानजी की प्रतिमा को चौला चढाया जाता है।