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खेती में रोगों पर दवा बेअसर, कीटनाशक नकली होने का आरोप

गुढ़ाचंद्रजी. बरसात का दौर थमने बाद इस समय बाजरा व तिल की फसल में रोग दिखाई दे रहा है।खरीफ के अन्तर्गत माड़ क्षेत्र में अधिकांश खेतों में बाजरे व तिल की फसल रोग से प्रभावित है। फसलों में खरपतवार के साथ सफेद लट लगी हुई है। जिससे फसल की वृद्धि रुकने के साथ तना मुरझा कर सूख रहा है। किसानों का कहना है कि फसल को रोग से बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन दवा असर नहीं कर रही। किसानों का आरोप है कि बाजार में जो कीटनाशक दवा मिल रही है वह असली नहीं है। सफेद लट, खरपतवार सहित अन्य रोगों से बचाव क

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खेती में रोगों पर दवा बेअसर, कीटनाशक नकली होने का आरोप

खेती में रोगों पर दवा बेअसर, कीटनाशक नकली होने का आरोप

खेती में रोगों पर दवा बेअसर, कीटनाशक नकली होने का आरोप गुढ़ाचंद्रजी. बरसात का दौर थमने बाद इस समय बाजरा व तिल की फसल में रोग दिखाई दे रहा है।खरीफ के अन्तर्गत माड़ क्षेत्र में अधिकांश खेतों में बाजरे व तिल की फसल रोग से प्रभावित है। फसलों में खरपतवार के साथ सफेद लट लगी हुई है। जिससे फसल की वृद्धि रुकने के साथ तना मुरझा कर सूख रहा है। किसानों का कहना है कि फसल को रोग से बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन दवा असर नहीं कर रही। किसानों का आरोप है कि बाजार में जो कीटनाशक दवा मिल रही है वह असली नहीं है। सफेद लट, खरपतवार सहित अन्य रोगों से बचाव के लिए दवा डालते है, लेकिन वे बेअसर साबित हो रही है। उन्होंने कृषि विभाग से जांच कराने की मांग की है। इन गांवों की खेती पर रोग का असर किसानों ने आरोप लगाया कि असली के नाम पर दुकानदार नकली दवा बेच रहे हैं। माड़ क्षेत्र के गुढ़ाचंद्रजी, आमलीपुरा, गोट््या का पुरा, रिंगसपुरा, तिमावा, घाटोली, दलपुरा, तालचिड़ा, बाड़ा आदि गांव में बाजरे की फसल में सफेद लट का असर दिख रहा है। यह लट जमीन में ही रहती है। जो पौधे के तने को नीचे से ही खा जाती है। इससे तना मुरझाकर सूख जाता है। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कार्यालय में नहीं मिलते अधिकारी किसानों ने आरोप लगाया कि गुढ़ाचंद्रजी में सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय है। लेकिन सप्ताह में एक भी दिन नहीं खुलता है। ना ही किसानों को विभाग की ओर से फसल को रोग से बचाव की जानकारी दी जा रही है। वे अपने स्तर पर ही महंगाइ लेकिन दुकानदारों द्वारा नकली दवाइयां दे दी जाती है। इससे रोग पर नियंत्रण नहीं हो पाता। किसानों ने बताया कि सफेद लट पर नियंत्रण के लिए हजारों रुपए की दवाइयां खरीद कर खेतों में छिड़काव कर दी गई। लेकिन कोई असर नहीं हुआ। किसानों ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर रोग पर नियंत्रण व कृषि विभाग के अधिकारियों को पाबंद करने की मांग की है। भीलापाड़ा के कृषि पर्यवेक्षक राज बाबू शर्मा का कहना है कि सफेद लट के लिए एमिड़ा क्लोपिड़ 1.5 एम एल प्रति लीटर घोलकर पौधों पर छिड़काव करें। इधर कार्यवाहक सहायक कृषि अधिकारी हरिओम मीणा का कहना है कि मेरे पास 9 पंचायतों का चार्ज है। फील्ड में जाने के दौरान कार्यालय पर ताला लगा रहता है। यदि कोई दुकानदार नकली दवा बेच रहे हैं तो उसका सैंपल लेकर जांच कराने के लिए भेजेंगे।