
जज्बे को सलाम...बड़े भाई की शहादत के दो दिन बाद सैनिक बन देश की रक्षा में चला गया छोटा भाई
श्रीमहावीरजी.
भारतीय सेना की बहादुरी समर्पण और मातृभूमि के लिए प्राणोत्सर्ग करने की सुदीर्घ परंपरा को आगे बढ़ाने में राजस्थान सदा से ही अग्रणी रहा है। इसीलिए ही मरुधरा को वीर प्रसूताओं भूमि के रूप में पहचाना जाता है। करौली जिले के वैसे तो हर गांव से भारतीय सेना में लोग अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन श्री महावीरजी तहसील के गांव अकबरपुर का नाम आने पर, जिक्र होता है शहीद महेंद्र सिंह गुर्जर का। जिस की शहादत के बाद दूसरे दिन ही छोटे भाई होशियार ने भारतीय सेना में भर्ती ले ली थी
कारगिल युद्ध के शहीद महेन्द सिंह गुर्जर के परिवार में देश भक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। महेन्द्र सिंह अपने परिवार और अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी शहादत के अगले ही दिन भाई होशियार सिंह ने सेना में भर्ती होकर बड़े भाई की शहादत को सलाम किया। इस समय होशियार सिंह हवलदार के पद पर सूरतगढ़ बीकानेर भारत-पाक सीमा पर तैनात हैं। उससे छोटे भाई निर्भय सिंह कारगिल जिले की द्रास में वर्तमान में माइनस 25 डिग्री तापमान में बर्फीली पहाडियों में सीमाओं की चौकसी कर रहे हैं ।
शहीद महेंन्द्र सिंह 1996 में कोटा से सेना में भर्ती हुए महेंद्र सिंह 220 अटलरी बटालियन में सेवा देते हुए 23 सितम्बर 2002 को कारगिल युद्ध के पश्चात सड़क मार्ग पर आईडी ब्लास्ट में शहीद हो गए थे। शहीद महेन्द्र सिंह का 25 सितम्बर 2002 को सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ। सेना के अधिकारियों के समक्ष वीर शहीद महेंद्र के पिता बदन सिंह पहलवान (अब दिवंगत) ने अपने दो पुत्रों को भी सेना में भेजने का फैसला लिया। उस दौरान उन्होंने गर्व से कहा कि मेरा एक बेटा(महेंद्र) भारत माता की रक्षा के लिए बलिदान हुआ है।वे एक के बदले दो और पुत्रों को सेना में भेजेंगे।
उस दौरान समीप के पटौदा में चल रही सेना भर्ती स्टाफ ने शहीद के महेन्द्र सिंह के भाई होशियार सिंह मानक के आधार पर भर्ती किया। छोटे भाई निर्भय की आयु कम होने के कारण दो साल बाद सेना में भर्ती हुए। महेंद्र का बड़ा पुत्र बंटी गुर्जर भी सेना में जाना चाहता है और छोटा बेटे गौरव भी। वह 18 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
शहीद के भाई सैनिक निर्भय का भी कहना है कि उनके परिवार के बेटे-बेटियां भी सेना में जाकर देश सेवा करेंगे। हम सब को इसकी प्रेरणा भाई महेन्द्र सिंह से मिली है। शहीद के मां हरप्यारी व पिता बदनसिंह अब इस दुनियां ने नहीं है, लेकिन एक बेटे की शहादत पर दो पुत्रों को सेना में भेज कर जगाया देशभक्ति का जज्बा लोगों के दिलों में जवां है।
Published on:
16 Jan 2022 12:01 am
