जयकारों के बीच शरद पूर्णिमा महोत्सव का समापन गुढ़ाचंद्रजी. श्री गोपाल सेवा निधि मंडल के तत्वाधान में तिमावा गांव में गोपाल धाम मंदिर परिसर पर चल रहे तीन दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव का रविवार रात समापन हुआ। इस मौके पर ४० क्विंटल दूध की खीर प्रसादी बनाकर वितरित की। इससे पहले भगवान को भाग लगाया गया। करीब १० हजार श्रद्धालुओं को प्रसादी वि तरित की। शाम ५ बजे से श्रद्धालुओं का गोपाल धाम पर पहुंचना शुरू हो गया। इस दौरान गुढ़ाचंद्रजी, टोडाभीम, हिण्डोन सिटी मार्ग पर जाम के हालात हो गए।
धवल चांदनी रात में बरसा भक्ति रस
गुढ़ाचंद्रजी. श्री गोपाल सेवा निधि मंडल के तत्वाधान में तिमावा गांव में गोपाल धाम मंदिर परिसर पर चल रहे तीन दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव का रविवार रात समापन हुआ। इस मौके पर ४० क्विंटल दूध की खीर प्रसादी बनाकर वितरित की। इससे पहले भगवान को भाग लगाया गया। करीब १० हजार श्रद्धालुओं को प्रसादी वि तरित की। शाम ५ बजे से श्रद्धालुओं का गोपाल धाम पर पहुंचना शुरू हो गया। इस दौरान गुढ़ाचंद्रजी, टोडाभीम, हिण्डोन सिटी मार्ग पर जाम के हालात हो गए। रात करीब १२ बजे रिमझिम बारिश के बीच प्रसादी वितरित की।
इससे पूर्व अतिथियों का सरपंच राजेंद्र मीणा, गोपाल धाम विकास समिति अध्यक्ष धर्म सिंह बाबूजी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण गुप्ता, प्रवक्ता राजेंद्र मीणा आदि ने माला पहनाकर स्वागत किया। मंच संचालन समिति प्रवक्ता राजेंद्र मीणा ने किया। बजरंग मंडल कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था संभाली।
भजनों पर झूमे, झांकियों ने मोहा
महोत्सव के समापन के मौके पर रविवार रात कलाकारों द्वारा एक से एक बढ़कर भजनों की प्रस्तुति दी। आकर्षक झांकियां सजाई गई। इस दौरान कलाकारों ने तरह-तरह के करतब दिखाए। इस दौरान पांडाल में काफी भीड़ रही। मां शारदा कला केंद्र गंगापुर सिटी के अदिति शर्मा दीक्षा शर्मा, चंचल तिवारी, हर्ष शर्मा, राजदीप गंगापुरी, मोहन सैनी, गौरव कुमार आदि ने प्रस्तुति दी। बॉलीवुड की नन्नी कलाकार निशा कुमारी ने भी अपने नृत्य से मुग्ध कर दिया। इससे पहले वृंदावन की रासलीला मंडली के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। गंगापुर सिटी की सिद्धिविनायक कला मंडल के कलाकारों ने पंडित विजय कुमार शर्मा के निर्देशन में झांकी सजाई गई। गोपाल दासजी महाराज व जौहरीदास बाबा की चरण स्थली को फूल बंगला झांकी से सजाया गया। रासलीला वृंदावन के कलाकारों द्वारा देवदत्त वशिष्ठ के निर्देशन में कंस वध की लीला का मंचन किया गया।
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