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हिण्डौनसिटी. ढाई दशक के अरसे के बाद इस मानसून सीजन में लबालब के करीब पहुंचे जगर बांध में जलस्तर गिर रहा है। चार माह में बांध के जलभराव गेज में 6 फीट से अधिक की कमी आई है। यानी मोरी पर लगे मापक पर प्रति माह करीब डेढ़ फीट जलस्तर कम हो रहा है।
क्षेत्र के लोग आशंकित हैं कि जल स्तर में गिरावट की यही स्थिति रही तो गर्मियों में बांध में पानी काफी कम रह जाएगा।
दरअसल मानसून सीजन में क्षेत्र में अच्छी बारिश होने से जगर बांध में भी पानी की खूब आवक हुई। करीब चार माह से मोरी पर सूखा पड़ा बांध का पेटा लबालब होने के करीब पहुंच गया। कैचमेंट क्षेत्र में 1219 मिमी बारिश होने से 30 फीट भराव क्षमता के बांध में सितबर माह में 28.4 फीट जल भराव हो गया।
क्षेत्र के किसान कई वर्षों तक जल संकट खत्म से राहत का संबल बंध गया। लेकिन बांध में वेस्टबेयर वॉल में जलभराव होने से सीपेज(रिसाब) शुरू हो गया। बांध की डाउन स्ट्रीम में तालाब के मानिद जलभराव होने के साथ जगर नदी में पानी की आवक हो रही है। बांध में वर्तमान में 22.2 फीट जलभराव है। बांध क्षेत्र के पास के निवासी नगर परिषद के नेता प्रतिपक्ष दिनेश चंद सैनी ने बताया कि चार माह से बांध की ओर से नदी में पानी की आवक हो रही है। पहली बार भारी मात्रा में सीपेज होने से जगर नदी में कई किलोमीटर दूर बयाना मार्ग सड़क तक पानी पहुंच गया है। इधर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं का तर्क है कि बांध में 20 फीट से अधिक भराव होने पर वेस्टवेयर वॉल के फिल्टर पानी का सीपेज होता है। अब बांध में जलस्तर कम होने से सीपेज में भी धीरे-धीरे कमी आ रही है।
पानी से सड़क में हुआ कटाव
बांध की डाउन स्ट्रीम में पानी के जगर नदी की ओर बहने से कई गांवों के रास्ते की सड़क कट गई है। करसौली व नागरियाका पुरा के बीच नदी के तरफ आधी सड़क के ढहने से दुर्घटना की आशंका है। ऐसे में जलभराव के बीच लोगों को संभल कर वाहन चलाने पड़ते हैं।
ड्रिप योजना में होगी सारसंभाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार ड्रिप योजना में जगर बांध के केन्द्रीय जल शक्ति विभाग के प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसमें जगर बांध के विकास और नवीनीकरण कार्यों को शामिल किया है। स्वीकृति व बजट मिलने पर बांध पर कार्य कराए जाएंगे। पाल और वेस्ट बेयर की मरमत होने पर सीपेज भी नियंत्रित होगा।
पानी से सड़क में हुआ कटाव
बांध की डाउन स्ट्रीम में पानी के जगर नदी की ओर बहने से कई गांवों के रास्ते की सड़क कट गई है। करसौली व नागरियाका पुरा के बीच नदी के तरफ आधी सड़क के ढहने से दुर्घटना की आशंका है। ऐसे में जलभराव के बीच लोगों को संभल कर वाहन चलाने पड़ते हैं।
नहरों में नहीं खोला पानी
बांध में पर्याप्त जलभराव होने से सिंचित क्षेत्र के किसानों को रबी की फसल के लिए नहरों में पानी खुलने की उमीद थी। लेकिन कई गांवों के बांध में जल संग्रहण के पक्ष में होने से प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू नहीं की। ऐसे में विभाग ने भी नहरों को लेकर तैयारी नहीं की।
फैक्ट फाइल
वर्ष बारिश(एमएम) जल भराव फरवरी
2020 454 9.2 फीट सूखा
2021 555 17.3 फीट 5 फीट
2022 619 14.8 फीट 2 फीट
2023 411 10.5 फीट सूखा
2024 1219 28.4 फीट 22.2
इनका कहना है
बांधों में आम तौर पर सीपेज होता है। लबे अरसे बाद जगर बांध में जलभराव हुआ है। ऐसे में पानी के दबाव से सीपेज हो रहा है। क्षेत्र के नलकूपों से जलनिकासी व भूजल के रिचार्ज होने से बांध का गेज कम हो रहा है।
शिवराम मीणा, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, हिण्डौनसिटी