बड़े लोगों की ज्यादा आ रहीं सिफारिशें, मंत्री, विधायक, पीएस सहित नेता घनघना रहे अधिकारियों को घंटी, अबतक 250 से आए अधिक आवेदन
कटनी. सर! मेरे जुड़वा बच्चे हैं, उनकी देखभाल करनी पड़ती है, इसलिए मैं चुनाव ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी, इसलिए मुझे चुनाव ड्यूटी से विरत रखा जाए...। मेरी निर्वाचन कार्य से ड्यूटी कटवा दीजिए सर प्लीज...। कुछ इस तरह की गुहार अधिकारी-कर्मचारी निर्वाचन कार्य से बचने के लिए लगाने लगे हैं। दरअसल चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारी अधिकारियों के सामने अजब-गजब कारण लिखकर आवेदन कर रहे हैं सिफारिश करा रहे हैं। प्रशासन के पास दर्जनों कर्मचारी प्रतिदिन नाम कटवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार प्रशासन के पास 250 से अधिक कर्मचारियों ने अबतक चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए आवदेन कर चुके हैं। इन आवेदनों में अबतक 22 लोगों ने गंभीर बीमारी तो 150 ने अजब-गजब बहानेबाजी की है। किसी ने घर में वर्षी, शादी, मां-पिता की देखभाल, तीर्थयात्रा आदि का हवाला दिया है। 28 महिलाओं ने प्रसूति अवकाश तो कई ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया है। चाइल्ड केयर लीव, मेटरनिटी लीव परीक्षण के बाद दी जाएगी। गंभीर बीमारी व बीमारी वालों को मेडिकल बोर्ड के पास फिजिकल जांच के लिए भेजा जा रहा है, फिर गोपनीय रिपोर्ट आती है कि ये चुनाव के लायक हैं या नहीं या फिर और क्या काम कराया जा सकता है। 20 केस अभी ऐसे हैं जो गंभीर हैं, उनकी रिपोर्ट अनुसार तय किया जाएगा।
इस तरह के दिए जा रहे आवेदन
एक कर्मचारी ने आवेदन दिया है कि उसने एक साल पहले हाइड्रोसिल का ऑपरेशन कराया है, इसलिए चुनाव ड्यूटी में रखा जाए। इसके अलावा एक महिला ने कहा है कि प्रतिदिन कार्यालय से तीन बार घर बच्चे को फीडिंग कराने के लिए जाना पड़ता है। एक कर्मचारी ने लिखा है कि मेरे पास जबलपुर और कटनी का प्रभार है, जबकि चुनाव ड्यूटी सिर्फ कटनी में लगी है, इसके बाद भी हवाला देकर चुनाव ड्यूटी से छुट्टी मांगी जा रही है।
सिफारिशों से अफसर परेशान
चुनाव ड्यूटी न करने के लिए कर्मचारी ऐड़ी-चोटी लगा रहे हैं। खुद तो आवेदन-निवेदन कर रहे हैं और जब बात नहीं बनती दिख रही तो सिफारिश का हथकंडा अपना रहे हैं। बड़े-बड़े लोगों की ज्यादा सिफारिशें आ रही हैं। कर्मचारी मंत्री, विधायक, पीएस सहित नेताओं से दबाव बनवाने का प्रयास कर रहे हैं।
वर्जन
जो भी कर्मचारी चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं उनके द्वारा जो कारण बताए जा रहे हैं उनका सूक्ष्मता से परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। बहानेबाजी बिल्कुल भी नहीं चलेगी।
अवि प्रसाद, कलेक्टर।