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कटनी/बहोरीबंद. कटनी में खाद के रैक प्वाइंट होने के बाद भी किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। अन्नदाता यूरिया के लिए रतजगा करने को विवश हैं। शहर से लेकर गांव तक के केंद्रों में किसान खाद के लिए खासा जद्दोजहद कर रहे हैं। समय पर यूरिया खाद नहीं मिल पा रही। बहोरीबंद मुख्यालय स्थित डबल लॉक गोदाम में शनिवार को 60 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया खाद पहुंचने की सूचना मिलते ही किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार रात से ही बड़ी संख्या में किसान टोकन लेने के लिए गोदाम परिसर में पहुंच गए। कई किसानों को खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में जमीन पर बिस्तर डालकर रात गुजारनी पड़ी।
सोमवार अलसुबह महिलाओं सहित किसानों की भीड़ और बढ़ गई। खाद वितरण के दौरान लंबी कतारें लग गईं, लेकिन अव्यवस्था के चलते किसानों के बीच धक्का-मुक्की और शोर-शराबा शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ते देख गोदाम प्रबंधन ने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। निर्देश मिलने पर तहसीलदार आकाश दीप नामदेव सहित पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और हंगामा कर रहे किसानों को सख्त हिदायत दी कि टोकन के आधार पर ही खाद दी जाएगी।
बहोरीबंद में प्रशासन ने गोदाम प्रबंधन को भी निर्देश दिए कि किसी भी हाल में किसानों को परेशानी न हो और खाद का वितरण व्यवस्थित ढंग से किया जाए। इसके बाद 130 किसानों को टोकन वितरित किए गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। मंगलवार को पुन: अफरा-तफरी न हो, इसके लिए एक दिन पहले ही करीब सौ किसानों को टोकन दे दिए गए। रबी सीजन में गेहूं फसल के लिए यूरिया की अत्यधिक आवश्यकता है, ऐसे में खाद वितरण की यह अव्यवस्था किसानों की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
घंटाघर में संचालित होने वाले खाद विक्रय केंद्र को कृषि उपज मंडी में शिफ्ट कर दिया गया है। सोमवार को यहां भी किसानों को खाद के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 150 से अधिक किसान जिलेभर से खाद लेने के लिए पहुंचे, लेकिन टोकन सिर्फ 40 किसानों को ही मिला, जिससे किसान परेशान हुए। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस व्यवस्था नहीं करता, तो ऐसी अव्यवस्था बार-बार दोहराई जाएगी।
किसान शिवचरण चौधरी, संतोष कुशवाहा ने बताया कि खाद के लिए वे सुबह 5 बजे कृषि उपज मंडी पहुंच गए थे। यहां पर दर्जनों की संख्या में किसान भूखे-प्यासे खाद के इंतजार में दोपहर बाद तक खड़े रहे, लेकिन टोकन न मिलने से उन्हें निराशा हाथ लगी। शाम 5 बजे तक किसानों ने इंतजार किया, जब खाद नहीं मिली ता हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर कृषि विभाग के अधिकारी पहुंचे। समझाइश के बाद मामला शांत कराया गया। देरशाम तक मंडी स्थित केंद्र से खाद विक्रय का सिलसिला जारी रहा।
इस बार यूरिया 38 हजार मैट्रिक टन की डिमांड भेजी गई थी। विगत वर्ष की रबी सीजन की पूर्ति 33 हजार 146 मैट्रिक टन थी। अभी तक जिले में 33 हजार 146 मैट्रिक टन यूरिया मिल चुका है। हाल ही में चंबल फर्टीलाइन, एनएफएल का रैक लगा था। चंबल में डेढ़ हजार मैट्रिक टन खाद मिली थी, जो डबल लॉक व नकद विक्री के लिए सप्लाई हुई है। एनएफएल से 800 मैट्रिक टन खाद पहुंची थी। फुल रैक यूरिया 2600 मैट्रिक टन की डिमांड जेडी फर्टीलाइजर भोपाल को भेजी गई है। बताया जा रहा है कि पैक्स समितियों में खाद का पर्याप्त भंडारण है, लेकिन किसानों के डिफाल्टर होने के कारण खाद नहीं ले पा रहे।
जिले में खाद का रैक प्वाइंट होने के बावजूद किसानों को समय पर यूरिया खाद नहीं मिलना, प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। रैक पहुंचने की सूचना के बाद भी डबल लॉक गोदामों में सीमित वितरण व्यवस्था किसानों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नहीं है। किसानों को रातभर लाइन में लगने और खुले आसमान के नीचे ठंड में सोने की मजबूरी, व्यवस्था की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। जिले में पर्याप्त आवक के बावजूद खाद का बाजार से गायब रहना, कालाबाजारी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। निजी विक्रेताओं द्वारा ऊंचे दामों पर खाद उपलब्ध कराने की शिकायतें किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। टोकन प्रणाली की सीमित संख्या से वास्तविक जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।
किसानों की भीड़ को देखते हुए समय पर टोकन वितरण किया गया है। यूरिया खाद गोदाम में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कुछ लोग बेवजह शोर-शराबा कर रहे थे।
राधिका पटेल, प्रभारी डबल लॉक बहोरीबंद।
डबल लॉक केंद्रों व समितियों में पर्याप्त यूरिया खाद है। शनिवार-रविवार अवकाश होने के कारण थोड़ा समस्या हुई है। किसानों को खाद दी जा रही है। मंडी में कुछ किसानों ने खाद न मिलने पर हंगामा करने लगे थे। यहां पर एओ की ड्यूटी भी लगाई गई है। किसानों को समस्या न हो, यह व्यवस्था की जा रही है।
Published on:
20 Jan 2026 10:44 am
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