कटनी. शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल का संकट गहरा गया है। बहोरीबंद-रीठी क्षेत्र में पेयजल के लिए रतजगा जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हैंडपंप हवा उगल रहे हैं, नलजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। ब्लाक मुख्यालय ढीमरखेड़ा से 17 किमी दूर ग्राम पंचायत हरदी का आश्रित ग्राम अमकुही है। इस ग्राम की आबादी करीब 450 है। इस गांव में पानी की भारी किल्लत मची रहती है। कहने को तो गांव में तीन हैंडपंप है लेकिन एक ही हैंडपंप में पानी आता है। ग्रामीण इकलौते हैंडपंप के सहारे ही अपनी प्यास बुझा रहे हैं। जलस्तर के नीचे चले जाने के कारण यह हैंडपंप भी कम पानी देता हैं। समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का कोई तालुकात नहीं है। ग्राम के अजय पटेल, सुम्मा कोल, दीवान कोल, मिलन कोल, जगन कोल, मूरत कोल, मुंशी कोल, रवि कोल, तिरासी कोल, धनी कोल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यहां करीब 60 परिवार के लगभग 450 सदस्य निवास करते हैं। जो दिन भर यहां-वहां मजदूरी या फिर खेती-किसानी का काम करते हैं। चार से छह महीना खेती के काम से गुजारा चल जाता है। बाकी के माह वे काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर निकल पड़ते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में तो तीन हैंडपंप लगे हुए हैं। दो हैंडपंप पिछले तीन सालों से बंद पड़े हैं।
एक हैंडपंप सहारा
एक हैंडपंप के सहारे ही गांव के लोग आश्रित है। इसी हैंडपंप से गांव के लोग अपनी प्यास बुझाते है। इसके अलावा ग्रामीण अन्य निस्तार कार्य भी करते हैं। गांव के मवेशी भी हैंडपंप के किनारे जमा पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। जलस्तर कम होने के कारण अगर यह हैंडपंप भी बंद हो जाता है या फिर बिगड़ जाता है तो गांव की महिलाएं और ग्रामीण एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय हरदी स्कूल के पास या फिर दूसरे गांव देवरी पाठक की दूरी तय करने मजबूर हो जाते हैं। पानी की किल्लत होने से गांव के लोग परेशान हैं। लल्ला कोल, अवसर कोल, सन्तू कोल, सुभाष कोल, दसई कोल,भूरा कोल और भागचंद कोल ने बताया कि चुनावी मौसम के समय गांव में जनप्रतिनिधि आते हैं, गांव के विकास के लिए लंबे -लंबे वादे करते हैं। चुनाव निकलने के बाद ये जनप्रतिनिधि अपने ही वादों को भूलकर मुकर जाते हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को गांव की समस्याओं को अवगत कराने के बाद भी गांव में लोगों की समस्या जस की तस बनी रहती हैं।
हैंडपंप बन जाए तो समस्या से मिल सकती है मुक्ति
उमरियापान के समीप बसे आदिवासी बाहुल्य गांव अमकुही में लोगों के लिए निस्तारी और पेयजल की गंभीर समस्या है। यहां के ग्रामीण एक हैंडपंप से गुजारा करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि इस गांव में बंद पड़े दो हैंडपंप और ठीक हो जाए तो उनकी समस्या का समाधान हो जाता। इसके लिए कई बार सरपंच सहित अधिकारियों को कहा गया लेकिन अधिकारियों ने ग्रामीणों की एक न सुनी।
इनका कहना है
लोंगों की परेशानी को देखते हुए अमकुही में बंद पड़े हैंडपंपों का सुधार कार्य कराया जाएगा, ताकि लोगों को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े।
एस के नाग, एसडीओ पीएचई।
एक-एक बाल्टी पानी के लिए कुएं में लगी लोगों की भीड़…
ग्राम पंचायत उमरियापान के वार्ड क्रमांक 4 और 5 में लगा बोर बीते दो दिन से बंद है। जिससे कुदवारी मोहल्ला के लोग भी भीषण गर्मी में पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। मोहल्ले में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। बोर बंद होने से नलों में पानी आना बंद हो गया है। मोहल्ले में पानी की भयावह स्थिति पैदा हो गई है। शुक्रवार सुबह से दोपहर तक लोग कुएं में एक-एक बाल्टी पानी के लिए कई घंटों इंतजार करते रहे। बोर बिगड़ जाने से पीने के पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई। लोग कुआं के अलावा दूसरे मोहल्ले से पानी भरने मजबूर हो गए हैं। यहीं स्थिति शनिवार सुबह से कुदवारी मोहल्ले के कुएं में देखने को मिली। एक एक बाल्टी पानी के लोगों की भीड़ करीब 9 बजे तक लगी रहीं। दो दिन बोर बंद होने से कुएं का पानी भी नीचे तक चला गया है। हालांकि ग्राम पंचायत के कुछ कर्मचारी बोर का सुधार करने पहुंचेंगे।
नहीं पहुंच रहा वार्डों में नल जल योजना का पानी
पिपरिया सहलावन क्षेत्र में पिछले माह से भीषण गर्मी के चलते क्षेत्र में पानी की किल्लत बनी हुई है, जिसका कारण क्षेत्र में लगे आधे से ज्यादा हैंडपंपो का पानी की कमी के कारण दम तोड़ देना माना जा रहा है। ग्रामीण अपने-अपने स्तर पर इस समस्या से निपटने मजबूर हैं, चाहे बात सहलावन, तिघरा या भटगवां की करें तो यहां वर्तमान में अधिकतर ग्रामवासी निजी बोरों के सहारे ही अपनी प्यास बुझाने और घरेलू निस्तार के लिए पानी लाते देखने मिलते हैं। वहीं इन सब के बीच ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन की बात ही अलग है, यहां नल जल योजना सुचारू रूप से चलने के बावजूद कुछ वार्डों में पाइप लाईन से पानी न चढऩे की समस्या बनी हुई है। और वार्डवासी दूसरे वार्डों से पानी लाने मजबूर हैं। इस बारे में अन्नू पटेल, महेश मेहरा, सोहन मिश्रा, संजय, हरवंश पटेल, बैनाबाई, सुमीत्रांबाई, माया, सुधा, शशीबाई आदि ने बताया कि उनके घरों की ओर डली हुई पाइपलाइन में पानी न आने से उन्हें काफी दूर से पानी लाना पड़ता है। जिसकी शिकायत संबंधित ग्राम पंचायत में किए जाने के बाद भी अभी तक इस समस्या का हल नहीं हो पाया है। इस बारे में ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन से जानकारी लेने पर बताया गया कि वर्ष 2018 में 23 लाख 56 हजार की लागत से नल-जल योजना स्वीकृत की गई थी, जिसमें दो नग बोर खनन और पन्द्रह सौ मीटर पाइपलाइन डाले जाने का स्टीमेट बनाया गया था। पन्द्रह सौ मीटर पाइपलाइन और एक नग बोर खनन का काम पूर्ण हो गया है। एक नग बोर खनन का काम अभी भी शेष बाकी है। जिस कारण वार्ड नंबर 2, 9 और 10 में डाली गई पाइप लाइन में पानी न पहुंचने से यह समस्या बनी हुई है। वहीं संबंधित पीएचइ विभाग द्वारा इसके पूर्व मार्च में उक्त बोर खनन के कराये जाने की बात कही गई थी, फिर बीच में अचार संहिता के चलते बोर खनन नहीं हो पाया। इस बारे में पीएचइ विभाग के एसडीओ सुरेश नाग से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि जहां पानी की समस्या हो रही है, वहां बोर खनन करवाकर समस्या का समाधान किया जाएगा।
कुआ सूखे हैंडपंप उगल रहे हवा
इधर बहोरीबन्द तहसील मैं भीषण गर्मी के चलते भू-जलस्तर तेजी से गिर रहा है। कुओं की तलहटी दिखाई देने लगी है। वही हैंडपंप हवा उगल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को पेयजल प्राप्त करने तेजधूप में भटकना मजबूरी हो गया है। शेष बचे जलस्रोतों को अब मानूसन का इंतजार है। नहीं तो वह भी जबाब देने में देर नहीं करेंगे। क्योंकि जिन हैंडपंपों, ट्यूवेलों में पानी है वह भी पानी के साथ हवा देने लगे हैं। लगातार जलस्तर गिरने से ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं। तहसील के पठार अंचल के 85 गाँवो मैं शीतकाल से जलसंकट बना हुआ है। यहां के लोग सरकारी पेयजल संसाधन खराब होने के कारण निजी जलस्रोतों पर आश्रित है। पानी के लिए दिनरात मसक्कत कर रहे हैं। सबसे खराब हालात पठार अंचल की है।यहा लोग एक से दो किमी दूर से पानी ढोते है।तब कहीं प्यास बुझती है। तहसील के सिहुडी(बाकल), पटौरी, बसेहड़ी, रैपुरा, पटिकला, पटीराजा, गौरहा, हाथीभार, किवलरहा, मसन्धा, चाँदनखेड़ा, बरतरा, बरतरी, साड़ा, बासन, बरही सहित विभिन्न ग्रामों में पेयजल संकट लगातार बना हुआ है। सूखे के कारण हैंडपंप बंद होते जा रहे है। पानी की किल्लत देख कर लोग अब आसमान पर टकटकी लगा कर बैठे हुए बारिश का इंतजार कर रहे है। देखा जा सकता है कि इंसान तो कहीं न कहीं से पानी की व्यवस्था कर रहा है।लेकिन मवेशियों के सामने भीषण जल संकट की स्थिति निर्मित हो चुकी है। मवेशी प्यास बुझाने हैंडपंपों के पास घंटों इस इंतजार में खड़े रहते है कि कोई आएगा और हैंडपंप चला कर हमारी भी प्यास बुझाएगा।
पेयजल के लिए ग्रामीण परेशान
विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम गुड़ेहा में पेयजल की समस्या है। सुबह से ग्रामीण पानी के इंतजार में बैठे रहते हैं। सुबह 7 बजे से 3 बजे तक ग्रामीण तेज धूप में लोग पानी के इंतजार में बैठे रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दोनों टाइम पानी दिया जाए तो यह समस्या कुछ कम हो सकती है, लेकिन सरपंच और सचिव ध्यान नहीं दे रहे। ग्राम पंचायत की मनमानी का खामियाजा ग्रामीणों को भोगना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से पेयजल समस्या का समाधान कराए जाने मांग की है। उल्लेखनीय है कि गांवों में पेयजल समस्या को सुदृढ़ बनाने क्षेत्रीय विधायक द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत को टैंकर की व्यवस्था भी कराई गई है, लेकिन टैंकरों का दुरुपयोग कर पेयजल के लिए नहीं किया जा रहा। इसी तरह से बम्होरी ग्रामपंचायत में महिला सरपंच के पति द्वारा की मनमानी से लोग परेशान हैं। गांव में एक दर्जन से अधिक हैंडपंप खराब हैं, जिनके सुधारे के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा। कारीतलाई में कई लाखों की लागत से निर्मित पेयजल के लिए टंकी केवल शोपीस बनी है। विगत वर्षों से चल रही शिकायत का अभी भी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने अधिकारी व जनप्रतिनिधियों से समस्या समाधान कराए जाने की मांग की है।