
Serious negligence in district hospital sonography
कटनी. जिले के मुख्य अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां आने वाले मरीजों को इलाज के साथ जांच प्रक्रिया में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोनोग्रॉफी, लैब टेस्ट और एक्स-रे जैसी बुनियादी सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में न सिर्फ नाराजगी बढ़ती जा रही है, बलिक इंतजार उनके मर्ज को बढ़ा रहा है। यहां एक से दो दिन सिर्फ निराशा हाथ लगती है।
अस्पताल में जांच कराने के बाद मरीजों को उसी दिन रिपोर्ट नहीं मिल पाती। अधिकांश मामलों में रिपोर्ट दोपहर 3 बजे के बाद दी जाती है, जबकि तब तक डॉक्टर अपनी ओपीडी खत्म कर जा चुके होते हैं। ऐसे में मरीजों को अगले दिन फिर से लाइन में लगना पड़ता है। कई बार तो यह प्रक्रिया 2 से 3 दिन तक खिंच जाती है। पत्रिका ने सोमवार को जांच रिपोर्ट की पड़ताल की तो पीड़ा बेहद गंभीर सामने आईं...।
सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं। करीब तीन घंटे तक लाइन में लगने के बाद मरीज डॉक्टर तक पहुंच पाते हैं, लेकिन जांच के लिए भेजे जाने के बाद उन्हें फिर घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज सुबह से भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं। एक मरीज अमीरगंज निवासी सुखदेव कोल ने बताया सुबह 10 बजे से लाइन में लगे हैं, डॉक्टर ने 1 बजे देखा और अब जांच के लिए भेज दिया है। कहा गया है कि रिपोर्ट शाम तक मिलेगी। तब तक डॉक्टर नहीं मिलेंगे, कल फिर आना पड़ेगा।
छोटी बच्ची सोनी गडारी निवासी ग्राम भैंसवाही पेट की गंभीर समस्या से परेशान है। मां सुनीता गडारी विजयराघवगढ़ अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पर समुचित उपचार नहीं मिल पाया और पीड़ा बढ़ती गई। जिला अस्पताल भेजा गया तो मां जांच के लिए परेशान रही। पहले पर्ची कटाने में फिर डॉक्टर को दिखाने में व फिर जांच कराने में।
रानी चौधरी निवासी मझगवां फाटक गर्भवती हैं। इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंची। पहले लाइन में लगकर ओपीडी पर्ची कटवाई फिर डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने खून-पेशाब की जांच लिखी तो सोमवार को रानी लैब पहुंचीं, लेकिन जांच के लिए किट न मिलने के कारण परेशान रहीं।
सविता तिवारी निवासी छिंदहाई पिपरिया लगभग 40 किलोमीटर का सफर तय करके जिला अस्पताल पहुंचीं। चिकित्सक ने पेटदर्द की समस्या होने के कारण सोनेग्रॉफी कराने को कहा। जब सविता असहनीय पीड़ा लेकर सोनोग्रॉफी सेंटर पहुंचीं तो दूसरे दिन आने के लिए कह दिया गया। यहां पर महिला को निराशा हाथ लगी। यह स्थिति हर दिन कई महिलाओं के साथ हो रही है।
1 बजे ओपीडी बंद हो जाने के बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा निजी क्लीनिक से दवाएं व जांचें लिखने का खेल शुरू होता है। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में जांच की सुविधाएं होने के बावजूद उन्हें बाहर निजी पैथालॉजी और एक्स-रे केंद्रों पर भेजा जाता है। वहां जांच के लिए मोटी फीस वसूली जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस खेल में आशा कार्यकताओं की भी संलिप्तता है।
सोनोग्रॉफी सेंटर के हाल बेहाल हैं। यहां पर जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा तीन डॉक्टर होने का दावा किया जा रहा है, इसके बाद भी तीन से चार दिन की वेटिंग दी जा रही है। 100 से अधिक मरीज सोनोग्रॉफी कराने पहुंचते हैं, लेकिन बमुश्किल 40 से 50 सोनोग्रॉफी हो पा रही हैं। यहां पर बैठने तक का ठीक से इंतजाम नहीं हैं। थक हारकर गर्भवती महिलाएं जमीन पर बैठकर जांच का इंतजार करने विवश होती हैं।
अस्पताल की इस अव्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। मरीजों की मांग है कि अस्पताल में जांच व्यवस्था को सुचारू किया जाए, रिपोर्ट समय पर दी जाए और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक मरीजों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
Updated on:
25 Mar 2026 09:23 am
Published on:
25 Mar 2026 09:23 am
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