
Serious negligence in district hospital x-ray
कटनी. जिला अस्पताल इन दिनों इलाज का नहीं, बदहाल सिस्टम का आईना बन चुका है, यहां मरीज बीमारी से कम, व्यवस्थाओं की लापरवाही से ज्यादा जूझ रहे हैं, करोड़ों की मशीनें शोपीस बनी हैं, एक्स-रे ठप है, और डॉक्टर ‘अंदाज’ से इलाज करने को मजबूर हैं, सादे कागज पर थमाई जा रही अधूरी रिपोर्टें मरीजों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ हैं, जिम्मेदार अफसर खामोश हैं, जबकि हर दिन गरीब मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं, सवाल साफ है क्या यहां इलाज हो रहा है या सिर्फ सिस्टम कर रहा खानापूति...र्। शहर का जिला अस्पताल इन दिनों इलाज से ज्यादा अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है। मंगलवार को हालात ऐसे रहे कि एक्सीडेंट में घायल, टीबी जैसे गंभीर रोगों से पीडि़तों और अन्य मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन एक्स-रे मशीन बंद होने के कारण उन्हें बिना जांच के ही लौटना पड़ा। जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे मशीनें स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि सामान्य दिनों में केवल एक ही मशीन काम करती है। मंगलवार को वह भी खराब हो गई, जिससे एक सैकड़ा से अधिक मरीजों के एक्स-रे नहीं हो सके। सवाल यह है कि करोड़ों की मशीनें आखिर किस काम की, जब जरूरत के वक्त वे जवाब दे दें?
सुबह से लाइन में लगे मरीजों को दोपहर तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन जांच नहीं हो सकी। कई मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ा, जहां उन्हें महंगी जांच करानी पड़ी। गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए यह स्थिति और भी त्रासद है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां एमएलसी (पुलिस केस) को छोडकऱ अन्य मरीजों को एक्स-रे फिल्म देने के बजाय सादे कागज पर प्रिंट थमा दिया जाता है। सादे कागज में प्रिंट दिखा रहीं मरीज रितु (22) निवासी रामनिवास सिंह वार्ड हैं, पैरो के पंजों का एक्सरे कराया, जिसकी रिपोर्ट सादे कागज पर दी गई। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि हड्डी कहां टूटी है, कितना फैक्चर है या शरीर के किस हिस्से में समस्या है।
टीबी जैसे गंभीर रोगों के मरीजों के साथ भी यही हाल है। उन्हें भी एक्स-रे फिल्म की जगह सामान्य प्रिंट देकर इलाज किया जा रहा है, जिससे सही निदान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक्सरे रिपोर्ट दिखा रहे मरीज शिवराज हैं। यह सीधे-सीधे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। फेफड़ों में पानी है या नहीं, टीबी की स्थिति क्या है, सब कुछ अंदाज पर छोड़ दिया जाता है।
मंगलवार को पत्रिका द्वारा किए गए रियलिटी चेक में अस्पताल की अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आईं। यहां पर एक भी मरीज का दोपहर 12 बजे तक एक्सरे नहीं हो पाए, क्योंकि मशीन खराब थी, जबकि दर्जनों मरीज बाहर इंतजार में बैठे थे। हर दिन मरीज परेशान हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी समझ से परे है।
मंगलवार को एक्सरे न होने के कारण कई मरीज निराश होकर लौटे। नरेंद्र सोनी पवई निवासी 60 किलोमीटर से पैर में समस्या लेकर पहुंचे, राजकुमार हल्दकार हाउसिंग बोर्ड पैर में चोट को लेकर एक्सरे कराने पहुंचे, लेकिन मशीन बंद होने के कारण निराश होकर लौटना पड़ा।
ये दो तस्वीरें भी जिला अस्पतली की हैं। पहले का कमरा बंद है, जहां पर नई एक्सरे मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन मशीन में वोल्टेज की समस्या के कारण एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। दूसरी तस्वीर एक्से कक्ष की है, जहां पर कर्मचारी बैठते हैं, लेकिन पर लगी एक्सरे मशीन महज शोपीस है। अगर जल्द ही व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह अस्पताल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि लापरवाही का अड्डा बनकर रह जाएगा। मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली इस व्यवस्था पर अब सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ पहले से ही काम के भारी दबाव में है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सीमित संसाधनों में काम करना पड़ रहा है। सुविधाओं की कमी और खराब प्रबंधन के कारण पूरी व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है।
जिला अस्पताल में एक्स-रे रिपोर्ट सादे कागज में देने की स्थिति पर हड्डी रोग विशेषज्ञों डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि बिना सही एक्स-रे जांच के हड्डी से जुड़ी चोटों का सटीक आकलन संभव नहीं है। फैक्चर, कै्रक या आंतरिक सूजन का सही पता न चल पाने से गलत उपचार का खतरा बढ़ जाता है। सादे कागज पर दी जा रही रिपोर्टें पर्याप्त नहीं होतीं, हम लोग कई बार मोबाइल पर रिपोर्ट मंगाते हैं। फिल्म वाले एक्से एमएलसी में उपयोग होते हैं।
Updated on:
25 Mar 2026 09:17 am
Published on:
25 Mar 2026 09:16 am
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