
Free Fire addiction has affected a child's mental balance
कटनी. मोबाइल गेमिंग की बढ़ती लत किस तरह युवाओं और किशोरों के जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रही है, इसका ताजा उदाहरण रीठी थाना क्षेत्र के एक गांव में सामने आया है। यहां 18 वर्षीय युवक जो शहर के एक स्कूल में कक्षा 9वीं का छात्र था, लगातार फ्री फायर गेम खेलने की वजह से मानसिक रूप से अस्थिर हो गया है।
परिजनों के अनुसार गोलू दिन में जब घरवाले काम पर चले जाते और रात में जब सभी सो जाते, उस दौरान घंटों मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलता रहता था। गेम की लत इतनी बढ़ गई कि उसने पढ़ाई से पूरी तरह दूरी बना ली और खुद को मोबाइल में कैद कर लिया। धीरे-धीरे उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और असामान्य गतिविधियां दिखाई देने लगीं। जब परिजनों ने मोबाइल देना बंद किया, तब स्थिति और गंभीर हो गई। जनवरी माह से बच्चे की हालत खराब है।
बच्चे की मानसिक स्थिति लगातार बिगडऩे के कारण अब वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा। कक्षा 9वीं का विद्यार्थी होने के बावजूद उसकी पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। परिजन उसे जिले के विभिन्न चिकित्सकों के पास ले जा रहे हैं, लेकिन अब तक सही इलाज के लिए उन्हें ठोस समाधान नहीं मिल पाया है। यह मामला स्पष्ट करता है कि अत्यधिक मोबाइल गेमिंग सिर्फ समय की बर्बादी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
विशेषज्ञ डॉ. संदीप निगम के मुताबिक लगातार हिंसात्मक या प्रतिस्पर्धात्मक गेम खेलने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है। एकाग्रता कमजोर हो जाती है और व्यवहार में अचानक बदलाव आता है। पढ़ाई, दिनचर्या और सामाजिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। बच्चे का मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है। बच्चों को मोबाइल गेम की लत से बचाने के लिए माता-पिता को सतर्क रहना होगा और डिजिटल समय पर नियंत्रण रखना होगा। डिजिटल व्यसन आज एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुका है, जिसका समय रहते समाधान जरूरी है।
Updated on:
23 Mar 2026 09:01 am
Published on:
23 Mar 2026 09:00 am
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