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8 माह से वेतन न मिलने पर डॉक्टर ने दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, 16 डॉक्टर हैं लापता, मचा हड़कंप

जिले में 44 में से सिर्फ 28 ही कर रहे नियमित नौकरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़वारा में मेडिकल ऑफिसर द्वारा नौकरी छोडऩे से अब एक ही डॉक्टर के भरोसे इलाज, लाखों की आबादी प्रभावित

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कटनी

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Balmeek Pandey

Mar 09, 2026

Bhilwara gets 30 specialist doctors

Bhilwara gets 30 specialist doctors (Photo-AI)

कटनी. जिले के बड़वारा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीरज विश्वकर्मा ने पिछले आठ महीनों से वेतन न मिलने से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस घटना के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहरा गया है। डॉ. नीरज विश्वकर्मा के अनुसार उन्होंने कई बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में वेतन संबंधी समस्या को लेकर संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार फोन और व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में जाकर समस्या बताने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इससे निराश होकर उन्होंने शनिवार को अपना त्यागपत्र सौंप दिया।
बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र की लगभग एक लाख आबादी निर्भर है। नियमानुसार इस अस्पताल में चार एमबीबीएस डॉक्टर और तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अधिकांश पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। वर्तमान में यहां केवल दो बंध पत्र चिकित्सक कार्यरत थे। डॉ. विश्वकर्मा के इस्तीफे के बाद अब अस्पताल में केवल एक ही डॉक्टर रह गया है, जिससे पूरे अस्पताल का संचालन प्रभावित होने की आशंका है।

16 चिकित्सक लापता

जिले में अनुबंध वाले 16 चिकित्सक गायब हैं। जिले में 44 चिकित्सक सरकार से अनुबंध कर पहुंचे हैं, जिनमें से 28 ही नौकरी कर रहे हैं। बाकी नौकरी छोडकऱ चले गए हैं। अधिकांश चिकित्सकों के साथ वेतन की समस्या है, इसकी मुख्य वजह यह है कि चिकित्सक सार्थक एप में हाजरी नहीं लगा रहे हैं। सार्थक एप से बांड चिकित्सकों को सुबह 9 बजे इन करना है और पांच बजे आउट करना है। जो हाजरी लगा रहे हैं वे कहीं से भी लगा दे रहे हैं। बमुश्किल 4 से 5 दिन ही पूरी हाजरी लग रही है। अब इनकी निगरानी आइटी सेल द्वारा की जा रही है। संयुक्त कलेक्टर जितेंद्र पटेल भी इनकी निगरानी कर रहे हैं। पूरे समय की हाजरी होने पर ही एक दिन की उपस्थिति मानी जा रही है।

इस्तीफा नहीं है आसान

बांड वाले चिकित्सक आसानी से इस्तीफा नहीं दे सकते हैं। वे सरकार से 365 दिन के लिए अनुबंधित हैं। यदि वे इस्तीफा देकर जाते हैं तो फिर उन्हें 20 लाख रुपए सरकार के कोष में जमा करना पड़ेगा। चिकित्सक जैसे ही इस्तीफे के लिए पत्र लिखते हैं और फिर उन्हें पता चलता है कि 20 लाख रुपए जमा करना है तो इस्तीफा देने से मना कर देते हैं।

परेशान होते हैं मरीज व परिजन

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है, इससे गरीब और ग्रामीण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि बड़वारा में एक माह पूर्व ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और खराब व्यवस्थाओं को लेकर तीन दिन तक भूख हड़ताल और सत्याग्रह किया था। उस समय प्रशासन ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।

वर्जन

बड़वारा के चिकित्सक ने इस्तीफे के लिए पत्र लिखा है, इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। जब अनुबंध की जानकारी दी गई तो उन्होंने नौकरी छोडऩे से मना कर दिया। शीघ्र ही वेतन का भुगतान कराया जाएगा। जिले में 44 बांड वाले डॉक्टर हैं, जिनमें से 28 ही नौकरी में आ रहे हैं। कई डॉक्टरों द्वारा एप में सही उपस्थिति न दर्ज करने के कारण समय पर वेतन नहीं हो पाता।

डॉ. राज सिंह, सीएमएचओ।