
प्रतीकात्मक
कटनी. जिले में गुरुजी से संविदा शिक्षक में संविलियन के दौरान 556 से ज्यादा गुरुजियों को परीक्षा पास करने की दिनांक के बजाए गुरुजी पद पर नियुक्ति दिनांक से संविदा शिक्षक वेतनमान का लाभ दिए जाने का मामला सामने आया है। इससे सरकार को लगभग 13 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक की नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार जिले में 1998 में शिक्षा गारंटी शाला गुरुजियों की भर्ती हुई। गुरुजियों को संविदा शिक्षक बनाने के लिए 2008 में परीक्षा हुई। इसमें 186 गुरुजियों ने परीक्षा पास की। इसके बाद 2010 में शेष बचे गुरुजियों के लिए एकबार फिर परीक्षा हुई, 2011 में रिजल्ट आया। इसमें 169 व 19 गुरुजी परीक्षा उत्तीर्ण कर गुरुजी बने। इसके बाद 10 फरवरी 2014 में बगैर परीक्षा के ही 178 गुरुजियों को संविदा शिक्षक सरकार के आदेश पर मान लिया गया। इसके साथ ही अलग-अलग समय में 3 गुरुजी को और पदोन्नत कर कुल 556 गुरुजियों को संविदा शिक्षक बनाया गया।
ऐसे मिलना था वेतनमान
संविदा परीक्षा पास कर या सरकार के आदेश पर गुरुजी से बने संविदा शिक्षकों के लिए तीन साल बाद परवीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद वेतनमान के अंतर की राशि का भुगतान किया जाना था। अधिकांश गुरुजियों को वेतनमान का लाभ 2003 से व नियुक्ति दिनांक से ही दे दिया गया। इसमें दो से तीन लाख रुपये प्रति गुरुजी के मान से राशि का भुगतान बगैर किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के किया गया।
इन अधिकारियों की मिलीभगत
गुरुजियों को नियम विरुद्ध तरीके से वेतनमान का लाभ दिए जाने में संकुल के सभी तत्कालीन लेखापाल, संकुल प्राचार्य, आहरण संवितरण अधिकारी, डीपीसी, एपीसी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत के लेखापाल, जिला कोषालय के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। तत्कॉलीन एपीसी एनपी दुबे ने तत्कालीन कोषालय अधिकारी वायडी खेमरिया को गलत तरीके से भुगतान नहीं करने संबंधी पत्र भी लिखा था, लेकिन इस पत्र की अनदेखी की गई।
खास-खास:
- कई गुरुजियों को 1 अप्रैल 2007 से देना था वेतनमान का लाभ, 2003 से दिया गया।
- गोपाल चावला नामक व्यक्ति के केस को आधार मानकर भी हो गया गलत भुगतान।
- कई गुरुजियों को पात्रता नहीं होन पर भी बगैर सक्षम अधिकारी के हो गया भुगतान।
- वेतन तैयार करने वाले ड्राइंग ऑफिसर ने भी इस व्यापक गड़बड़ी पर नहीं दिया ध्यान।
इनका कहना है
बड़वारा, बसाड़ी और देवराकला संकुल की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। इस पूरे मामले की जांच गंभीरता से कराई जाएगी। सेवा पुस्तिका का फिर से सत्यापन कराया जाएगा। तत्कालीन डीइओ, डीपीसी, एपीसी, कोषालय अधिकारी, लेखापाल आदि को भी तलब किया जाएगा। जांच में दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जगदीशचंद्र गोमे, जिला पंचायत सीइओ।
Published on:
15 Dec 2019 01:44 pm

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