
Atikraman
कटनी. माधवनगर थाना क्षेत्र में जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत शासकीय भूमि पर बने एक अवैध मकान को तोडऩे की गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। यह कार्रवाई माधवनगर के हॉस्पिटल लाइन क्षेत्र में की गई, जहां लगभग 1800 वर्गफीट क्षेत्रफल में निर्मित मकान को शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाया गया था। जानकारी के अनुसार हॉस्पिटल लाइन निवासी किशोर जियानी द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को लेकर खेमचंद्र मोटवानी के विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया गया था। यह मामला करीब 10 वर्षों से न्यायालय में लंबित था। विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने के स्पष्ट आदेश जारी किए, जिसके अनुपालन में जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
हाईकोर्ट के आदेश के पालन में सुबह करीब 10 बजे राजस्व विभाग, नगर निगम एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और शासकीय भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बने 1800 वर्गफीट के मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। मौके पर एसडीएम, दो तहसीलदार, नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर, अतिक्रमण दस्ता तथा भारी पुलिस बल मौजूद रहा। इस संबंध में तहसीलदार टेकराम हर्षवर्धन ने बताया कि माधवनगर के हॉस्पिटल लाइन क्षेत्र में खेमचंद्र मोटवानी द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान का निर्माण किया गया था। हाईकोर्ट से स्पष्ट आदेश मिलने के बाद प्रशासन द्वारा आज उक्त मकान को हटाने की कार्रवाई की गई है।
खेमचंद मोटवानी का कहना है कि सीट नंबर 8 में प्लांट नंबर 69 जो कि 1800 वर्गफीट नि:शुल्क प्लाट दिया गया था। 40 साल से मकान बना हुआ है, मकान टैक्स की रसीदें भी हैं। यह मकान वंदना मोटवानी के नाम पर था। तहसीलदार का नोटिस खेमचंद मोटवानी के नाम से आ रहा था। मकान वंदना मोटवानी का तोड़ा गया है। 35 फीट की रोड है, लेकिन 37 फीट खाली है, फिर भी अतिक्रमण बताकर दीपक जियानी, किशोर जियानी के खिलाफ न्यायालय में रोड में कब्जा कर अवैध निर्माण की 2017 में शिकायत की थी। न्यायालय ने आदेश दिया था कि जो गलत है उसे अलग किया जाए। तत्कालीन अधिकारियों ने गलत सीमांकन कर मेरा अतिक्रमण बता दिया गया, न्यायालय में गए तो सही सुनवाई नहीं हुई। आयुक्त न्यायालय में अधिवक्ता ने भी गुमराह किया। तोडऩे का नोटिस मिलने के बाद हाइकोर्ट गए तो वहां से डायरेक्शन कमिश्नर कोर्ट जाने कहा गया है, यहां पर दो साल केस चला। रिपिटीशन में उच्च न्यायालय को गलत जानकारी देकर लगाई, जिसमें सही निर्णन न होने से उनके खिलाफ गलत कार्रवाई हो गई। 25 दिसंबर 25 को नोटिस तहसीलदार से आया तो उस नोटिस को लेकर आयुक्त न्यायालय गए, इस पर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2026 की पेशी दी गई, मामला न्यायालय में चल रहा है, इसके बाद भी गलत कार्रवाई कर दी गई है। फिर 27 फरवरी को नोटिस देकर कार्रवाई कर दी गई।
Updated on:
30 Jan 2026 09:33 pm
Published on:
30 Jan 2026 09:32 pm

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