धान से भरी बोरियों के उपर तिरपाल से सुरक्षा का दावा और नीचे बहता रहा बारिश का पानी, मौसम की पूर्व चेतावनी के बाद भी खरीदी केंद्रों में बारिश की भेंट चढ़ी हजारों क्विंटल धान.
कटनी. किसानों की धान की सरकारी खरीदी के बाद उसे सुरक्षित रखने में एक बार फिर जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही सामने आई। जिलेभर में 102 धान खरीदी में बारिश की संभावना को लेकर तीन पहले से चेतावनी जारी कर धान को सुरक्षित की हिदायत के बाद भी हजारों क्विंटल धान बारिश की भेंट चढ़ गई। भीग गई। रविवार को कई केंद्रों में लापरवाही का आलम यह रहा कि धान की बोरियों को बारिश से बचाने के लिए उपर तिरपाल से ढंक तो दिया गया, लेकिन नीचे बारिश के बहते पानी से बोरियां भीग गईं।
जिला पंचायत सीइओ जगदीश चंद्र गोमे बताते हैं कि धान खरीदी केंद्रों में रखरखाव को लेकर सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए थे। केंद्र प्रभारियों को भी बारिश से धान को सुरक्षित रखने कहा गया था। निरीक्षण के लिए टीम भेज रहे हैं। धान खराब हुई है तो जवाबदेही तय की जाएगी। कार्रवाई होगी।
ऐसे समझें धान के सुरक्षित भंडारण में लापरवाही
- बारिश की संभावना के मद्देनजर 2 दिन 8 और 9 जनवरी को धान की खरीदी बंद है। इन दो दिनों में धान को सुरक्षित रखने में काम किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- 7 जनवरी तक जिलेभर में 73 हजार 169 मीट्रिक टन धान परिवहन के लिए शेष था। जानकार बताते हैं कि दो दिनों के दौरान परिवहन ज्यादा नहीं हुआ और खरीदी केंद्रों में खुले में पड़ी धान बारिश की भेंट चढ़ गई।
- धान खरीदी से लेकर सुरक्षित परिवहन और भंडारण के लिए पांच विभागों के सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी लगातार बेहतर सेवाएं देने का दावा करते हैं, इसके बाद भी नुकसान हो गया।
- 28 दिसंबर को बारिश के बाद अगले दिन कलेक्टर प्रियंक मिश्रा स्लीमनाबाद और अन्य केंद्रों के दौरे पर पहुंचे थे। परिवहन में तेजी लाने की बात कही थी, लेकिन 9 जनवरी की बारिश में कलेक्टर के निर्देश पर अमल नहीं होने की बात सामने आई।
- बड़वारा धान खरीदी केंद्र में वेयरहाउस मेंं खरीदी के बाद भी धान खराब हुआ। यहां वेयरहाउस मालिक द्वारा मीडिया को कवरेज भी रोका गया। कोशिश में लगे रहे धान खराब होने की तस्वीरें बाहर नहीं जाए।