
आयुर्वेद में को लेकर आचार्य कुलरत्न भूषण महाराज ने कही बड़ी बात...
कटनी. चातुर्मास पर बारडोली की धरा में ठहरे आचार्यश्री कुलरत्न भूषण महाराज का सानिध्य शहरवासियों को प्राप्त हो रहा है। हर दिन जहां मंगल प्रवचनों से लोगों अभिभूत कर रहे हैं तो वहीं जेल में कैदियों को अपराध की दुनिया छोड़कर मुख्यधारा से जोडऩे का संदेश दिया। मंगलवार को पत्रिका से खास बातचीत में महाराजश्री ने आयुर्वेद पर चर्चा की। आचार्यश्री ने कहा कि जिस तरह से महाव्याधियां बढ़ रही हैं तो लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझते हुए इसे अपनाकर रोगों से मुक्ति पानी होगी।
आचार्यश्री ने कहा कि भारत में जो वैद्यकी पद्धति है अनादिकाल से है। महान महर्षि ने 3 हजार 700 साल पुराने आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति में जड़ी-बूटी के माध्यम से जड़-मूल के साथ रोगमुक्त करने का संदेश दिया है। जैनाचार्यों ने भी आयुर्वेद के बारे में अच्छी बात बताई है। जो रोग उत्पन्न होते हैं वे कलुसित अहार, अशुद्ध पानी के सेवन से स्वास्थ्य बिगड़ता है। स्वास्थ्य अच्छा है तो सबकुछ अच्छा है। इस दौरान समाजसेवी व कांग्रेस नेता राकेश जैन कक्का भी मौजूद रहे।
आयुर्वेद के नहीं कोई दुष्प्रभाव
आचार्य कुंदकुंद भगवान ने कहा है कि शरीर माध्यम अच्छा है तो हम माता-पिता, परिवार, देश की सेवा कर सकते हैं। स्वयं का हित कर सकते हैं। रोग को जड़मूल से खत्म करने के लिए आयुर्वेद ही सर्वेश्रेष्ठ उपचार है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं है। इससे मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। बारिश का पानी भी प्रमुख दवा है। इसका प्रयोग भी अनेक रोक कर चुके हैं। बेहतर रिजल्ट भी मिला है। भद्रगिरी में गैंगरीन के मरीज को भी ठीक किया जा चुका है। एक व्यक्ति रोग से परेशान था, 5 लाख रुपये से अधिक कर चुका था, पैर कटने की बात आ गई थी। बहुरानी ने दुखड़ा बताया। 9 रविवार तक बद्रीगिरी क्षेत्र में बुलाकर दवा दी गई और आज वह पूरी तरह से स्वस्थ है। डॉक्टर भी आश्चर्यचकित हुए। फिर चिकित्सक भी पहुंचे और उस पद्धति को समझा। भगवान पर सच्ची श्रद्धा, जाप का प्रभाव बहुत काम करते हैं।
चैलेंज के साथ रोग होते हैं ठीक
महाराजश्री ने कहा कि आयुर्वेद को लेकर लोग कहते हैं कि बहुत धीमा आराम लगता है, जबकि ऐसा नहीं है। बाबासिर का रोग चैलेंज के साथ 9 दिन में ठीक किया जाता है। आयुर्वेद में असाध्य रोग जल्दी ठीक होते हैं। सभी लोग आयुर्वेद अपनाएं। यह मूल संस्कृति है और यह अहिंसात्मक है। सूखी-जड़ी बूटियों का उपयोग करें, यदि हरे पेड़ से लेना है तो प्रार्थना कर लें। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। पेड़ लगाकर इसका प्रायश्चित करें। निरगुंडी के पत्ते का रस लगाने से 100 साल पुराना भी दर्द ठीक हो जाता है। धतूरे के तीन फल को तिली, मेथी डालकर तीन कटोरा पानी में उबालकर एक तिहाई बचने पर लगाएं, जोड़ों का दर्द खत्म होता है।
महाव्याधि भी नहीं छूती
आचार्य कुलरत्न भूषण महाराज ने पत्रिका से चर्चा में कहा कि कोरोना जैसी महाव्याधि का समन करने का सामथ्र्य आयुर्वेद में हैं। पॉजिटिव मरीज भी तीन दिन में दवा सेवन से निगेटिव होने का प्रभाव होता है। सुल्तानगंज और कटनी में कोरोना रोकने के लिए एडवांस कोरोना शरीर में न आ जाए, इसके लिए आयुर्वेद की दवा दी गई, जिसका परिणाम लोगों को मिला। दवाएं निर्माण कर दी गई। जैसे गाड़ी सर्विसिंग के बाद अच्छी हो जाती है वैसे भी शरीर अच्छा हो जाता है। इसके खाली पेट सेवन से वात, पित्त, कफ से मुक्ति मिलती है। पाचनशक्ति बढ़ती है, कैलोस्ट्राल कम हो जाता है। जैसे हवा, पानी, सूर्य सबके लिए है वैसे ही आयुर्वेद सबके लिए है।
Published on:
03 Nov 2021 10:14 pm

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