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शंकरपुर में रेल रोको आंदोलन, तीन घंटे से अधिक बाधित रहा रेल यातायात, मचा हड़कंप

स्टापेज और नियमित स्टेशन मास्टर की मांग को लेकर ट्रैक पर बैठे ग्रामीण, 11 नामजद सहित अन्य के खिलाफ रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 29, 2026

Train

Railway

कटनी। पश्चिम मध्य रेल जबलपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले शंकरपुर भदौरा रेलवे स्टेशन पर बुधवार को ग्रामीणों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा, जब लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर रेलवे प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। शंकरपुर भदौरा स्टेशन स्थित लेवल क्रॉसिंग गेट क्रमांक 67/सी पर ग्रामीणों ने रेल रोको आंदोलन कर करीब तीन घंटे से अधिक समय तक रेल यातायात बाधित कर दिया। इस दौरान अप और डाउन दोनों लाइनों पर कई ट्रेनें प्रभावित रहीं।
यह आंदोलन शंकरपुर भदौरा निवासी आनंद सिंह उर्फ ददुआ के नेतृत्व में किया गया। आंदोलन में बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण शामिल हुए। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें गाड़ी संख्या 11651/11652 का शंकरपुर भदौरा स्टेशन पर एक मिनट का स्टापेज दिए जाने और स्टेशन पर नियमित स्टेशन मास्टर की नियुक्ति से जुड़ी थीं। ग्रामीणों का कहना था कि स्टेशन होने के बावजूद यहां कई आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

पहले अपनाया गांधीवादी तरीका

जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह करीब 9.30 बजे आंदोलनकारी लेवल क्रॉसिंग गेट के पास शांतिपूर्ण गांधीवादी तरीके से धरने पर बैठ गए। इससे पूर्व ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कुशमी (जिला सीधी) को ज्ञापन सौंप चुके थे, लेकिन जब समय रहते मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। धरने की सूचना मिलते ही थाना मड़वास और कुशमी का पुलिस बल, जीआरपी जबलपुर, कटनी व सिंगरौली के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग थी कि जबलपुर से कोई वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर आए, ज्ञापन ले और लिखित आश्वासन दे। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने मौखिक समझाइश दी, लेकिन आंदोलनकारी लिखित आश्वासन पर अड़े रहे।

रेलवे अधिकारी के नहीं पहुंचने पर ट्रैक पर बैठे ग्रामीण

रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी के समय पर मौके पर नहीं पहुंचने से आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया। करीब 10.10 बजे लगभग 250 से 300 ग्रामीण रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इसके चलते अप लाइन पर आ रही मालगाड़ी संख्या पीजेपीबी 10.37 बजे शंकरपुर भदौरा के पास आकर खड़ी हो गई। ट्रैक पर लोगों के बैठने से रेल संचालन पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान तहसीलदार कुशमी और एसडीएम सीधी विकास आनंद भी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को समझाकर ट्रैक खाली कराने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक हटने को तैयार नहीं हुए।

एडीई एनकेजे के आश्वासन पर समाप्त हुआ आंदोलन

काफी प्रयासों के बाद एडीईएन कटनी जे.पी. पाठक मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों का ज्ञापन लिया और सीनियर डीईएन तथा सीनियर डीसीएम से मोबाइल पर चर्चा की। इसके बाद रेलवे अधिकारियों की ओर से व्हाट्सऐप के माध्यम से लिखित आश्वासन दिया गया कि ग्रामीणों की मांगों को रेलवे बोर्ड के समक्ष भेजा जाएगा। इस आश्वासन पर आंदोलनकारी सहमत हुए और रेलवे को 30 दिन का समय दिया। करीब 13.25 बजे धरना समाप्त हुआ और 13.30 बजे रेलवे ट्रैक खाली कराया गया। इसके बाद धीरे-धीरे रेल यातायात बहाल किया गया।

कई ट्रेनें रहीं प्रभावि

आंदोलन के कारण रेल यातायात को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मालगाड़ी पीजेपीबी करीब 3 घंटे 8 मिनट तक विलंबित रही और 13.45 बजे रवाना हो सकी। गाड़ी संख्या 11448 शक्तिपुंज शक्तिपुंज-निवास रोड स्टेशन पर 10.11 बजे से 13.40 बजे तक खड़ी रही। इसी तरह गाड़ी संख्या 22168 बरगवां स्टेशन पर 12.31 बजे से 13.41 बजे तक रुकी रही। डाउन लाइन में गाड़ी संख्या 61603 मेमो मड़वास स्टेशन पर 11.00 बजे से 13.35 बजे तक खड़ी रही, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज

रेलवे प्रशासन के अनुसार आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की रेल संपत्ति को नुकसान या जनहानि नहीं हुई। हालांकि रेलवे लाइन में अवैध प्रवेश कर रेल आवागमन बाधित करने के मामले में आनंद सिंह उर्फ ददुआ सहित कुल 11 नामजद तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 79/2026 धारा 174(2) एवं 147 रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के आधार पर अन्य आंदोलनकारियों की पहचान कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी, भारी पुलिस बल तैनात

मामले की जांच आउट पोस्ट बरगवां के सेक्टर इंचार्ज उप निरीक्षक संतोष कुमार मिश्रा द्वारा की जा रही है। आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर आरपीएफ, जीआरपी और सिटी पुलिस का भारी बल तैनात रहा। रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि तय समय-सीमा में उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो वे भविष्य में और भी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं रेलवे प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और रेल संचालन को सुचारु रखने के लिए सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।

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