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video: मार्बल कंपनी स्विल माइंस मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने नियुक्त किया लिक्विडेटर

मध्यप्रदेश सरकार का कंपनी पर 129 करोड़ का टैक्स बकाया, एसजीएसटी विभाग ने दिल्ली हाईकोर्ट को दी जानकारी. वाणिज्य कर विभाग को टैक्स और खनिज विभाग को रायल्टी में बकाया राशि की भरपाई के लिए करनी थी संपत्ति की नीलामी. कटनी शहर स्थित मकान और लोडर वाहन सहित अन्य संपत्ति की नीलामी से 90 लाख रुपये प्राप्त चुके हैं दोनो विभाग.

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कटनी. स्लीमनाबाद क्षेत्र में मार्बल यूनिट स्थापित करने के बाद कुछ ही दिन में बंद कर भाग जाने वाली कंपनी स्विल माइंस के मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने लिक्विडेटर नियुक्त किया है। स्विल माइंस के संचालकों पर आरोप है कि कटनी जिले के स्लीमनाबाद में मार्बल यूनिट स्थापित किए जाने के दौरान सरकार को टैक्स में करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। इसमें वाणिज्य कर विभाग को टैक्स और खनिज विभाग को रायल्टी में बकाया राशि शामिल है।
दोनों ही विभागों द्वारा टैक्स की बकाया राशि वसूली के लिए लोडर वाहन, बस के साथ भवन और दूसरी अस्थाई व स्थाई संपत्ति की नीलामी की गई है। इसमें करीब 90 लाख रुपये से ज्यादा की राशि सरकार के खाते में जमा कराई जा चुकी है। अब इस मामले में दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा लिक्विडेटर नियुक्त किए जाने के बाद स्विल माइंस की संपत्ति पर वाणिज्य कर विभाग का आधिपत्य नहीं रहेगा। प्रदेश सरकार का वाणिज्य कर विभाग (एसजीएसटी) के अधिकारियों ने दिल्ली हाइकोर्ट को 129 करोड़ बकाया राशि की जानकारी दी है।

 

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एसजीएसटी विभाग के सहायक आयुक्त मनीष महराणवर बताते हैं कि स्विल माइंस से बकाया टैक्स वसूली के लिए तीन बार अंतिम नीलामी कर 29 लाख से ज्यादा राशि वसूल की जा चुकी है। दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा लिक्विडेटर नियुक्त करने के बाद अब कंपनी की संपत्ति पर वाणिज्यकर विभाग का नियंत्रण नहीं है। हमने 129 करोड़ रुपये के क्लेम के बारे में दिल्ली हाइकोर्ट को जानकारी प्रस्तुत किया है।

 

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मार्बल कंपनी स्विल माइंस IMAGE CREDIT: Raghavendra

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने किया था उद्घाटन
बतादें कि स्लीमनाबाद क्षेत्र के तेवरी के ग्राम गुदरी में साल 2005 में मार्बल कंपनी स्विल माइंस की स्थापना हुई थी। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने माइंस का उद्घाटन किया था। खुलने के आठ साल तक माइंस में मार्बल उत्पादन होता रहा, इस बीच कंपनी पर कर्ज भी बढ़ता गया। साल 2013 में माइंस के ऊपर सेलटैक्स, इनकम टैक्स, खनिज विभाग, बिजली विभाग सहित अन्य विभागों के करोड़ों रुपए के कर्ज का खुलासा हुआ। इसके बाद कंपनी बंद हो गई और स्विल माइंस की सम्पत्ति को कुर्क कर वाणिज्य कर विभाग के अधीन किया गया है।

 

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कुर्की के बाद भी करोड़ों की संपत्ति का जिम्मा कंपनी प्रबंधन को ही सौंपा गया। आरोप है इस बीच कंपनी ने कीमती समानों की बिक्री करवा ली। बाद में कंपनी ने वाणिज्य कर विभाग को पत्र जारी कर संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर पाने की बात कही। तब वाणिज्यकर विभाग ने सरकार को सुरक्षा के लिए पत्र लिखा। प्रदेश सरकार ने 17 नवंबर 2014 को सुरक्षा के लिए निविदा आमंत्रित किए जाने के निर्देश दिए। इस बीच अरबों की संपत्ति की सुरक्षा को लेकर वाणिज्य कर विभाग पत्राचार करता रहा, इधर धीरे-धीरे स्विल माइंस की संपत्ति खुर्द-बुर्द होती रही।

 

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स्विल माइंस IMAGE CREDIT: Raghavendra

संपत्ति की सुरक्षा में लगातार बरती गई लापरवाही
मार्बल कंपनी स्विल माइंस की संपत्ति वाणिज्य कर विभाग के अधीन होने के बाद जनवरी 2015 में सुरक्षा के लिए चौकीदार नियुक्त किया गया। कुछ दिन तक तो चौकीदार रहा, बाद में उसे हटा दिया गया। इस बीच माइंस से कीमती समान निकलने का सिलसिला धीरे-धीरे चलता रहा। इस बीच इस पूरे मामले में वाणिज्य कर विभाग के स्थानीय अधिकारियों पर लापरवाही बरतने के आरोप भी लगते रहे।

 

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