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लोकसभा चुनाव में इस बार आयोग का फोकस सीआरसी पर

जानिए क्या है सीआरसी और कर्मचारियों को इसके बारे में जानना क्यों जरुरी

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कटनी. लोकसभा चुनाव में इस बार आयोग का विशेष फोकस क्लीयर रिजल्ट क्लोज (सीआरसी) पर है। यह वह प्रक्रिया है जब मतदान केंद्र में मशीन परीक्षण के लिए मॉकपोल में प्रयोग के लिए लाई जाती है। वोटिंग के बाद मशीन में डाटा क्लीयर कर इवीएम को मतदान के लिए तैयार किया जाता है। कई बार मॉकपोल के बाद सीआरसी प्रक्रिया सही ढंग से नहीं होने पर प्रयोग के लिए डाले गए वोटों के कुल वोट में जुड़ जाने की आशंका बनी रहती है।
अगर प्रत्येक बूथ में ऐसे मतों की संख्या 20 से 30 भी रही को किसी उम्मींदवार के हार जीत के लिए पर्याप्त है। यही कारण है कि इस बार चुनाव आयोग सीआरसी को लेकर गंभीर है। चुनाव आयोग ने इस बार स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी मतदान केंद्र सीआरसी प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई तो संबंधित मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी पर कार्रवाई होगी। निलंबित भी किया जा सकता है।
बतादें कि लोकसभा चुनाव के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरु हो गया है। प्रशिक्षण में सीआरसी के बारे में कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। सोमवार को पॉलीटेक्निक कॉलेज, मॉडल स्कूल, नालंदा महाविद्यालय, वार्डस्ले कन्या विद्यालय, सेक्रेट हार्ट स्कूल में प्रशिक्षण हुआ। प्रशिक्षण स्थल पर कलेक्टर डॉ. पंकज जैन पहुंचे और कर्मचारियों को गंभीरता से प्रशिक्षण लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि आदर्श आचरण संहिता का पूरी निर्वाचन अवधि में सख्ती से पालन करें। मतदान प्रक्रिया में पूरी तरह निष्पक्ष रहें और दिखें भी।