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बिजली उपभोक्ताओं के घर-घर मीटरों पर लग रहे क्यूआर कोड

सही रीडिंग और हर घर तक रीडर पहुंचाने के लिए हर घर के मीटर पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं।

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बिजली उपभोक्ताओं के घर-घर मीटरों पर लग रहे क्यूआर कोड

बिजली उपभोक्ताओं के घर-घर मीटरों पर लग रहे क्यूआर कोड

कटनी. विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सही रीडिंग और हर घर तक रीडर पहुंचाने के लिए हर घर के मीटर पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। कंपनी ने स्मार्ट बिलिंग के तहत एप में मीटर रीडिंग की क्यूआर कोड तकनीक को शामिल किया है। इसके चलते अब रीडर को पहले से कम समय लगेगा और रीडिंग को लेकर रीडर के नहीं आने व कम ज्यादा रीडिंग की शिकायतें भी दूर हो रही हैं। बिजली कंपनी उपभोक्ता सेवाओं और काम में तेजी को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ा रही है। इसी कड़ी में कंपनी के द्वारा क्यूआर कोड लगाने का उपाय निकाला है। शहर में 84 हजार घरेलू गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के यहां पर यह पहल की जा रही है। साथ में कृषि फीडर के उपभोक्ताओं के मीटर व पंपाें में क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। क्यूआर कोड लगाने का काम तेजी से चल रहा है। अधिकांश कार्य यहां पर हो भी गया है। बता दें कि अभी तक शहर में 71 हजार क्यूआर कोड लग चुके हैं। 4 हजार 142 कृषि कनेक्शन हैं, जिनमें से एक हजार से अधिक कनेक्शनाें में क्यूआर कोड लगाए जाने की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

रीडिंग लेने में रीडर का बचेगा समय- अभी रीडर मीटर रीडिंग उपभोक्ताओं के घर पर जाकर लेते हैं। एक मीटर की रीडिंग लेने में 50 सेकंड से ज्यादा समय लग रहा है। क्यूआर कोड लगने पर रीडिंग 20 सेकंड में ही हो जा रही है। क्यूआर कोड मीटर पर चिपकाने के बाद रीडर को मोबाइल में आईवीआरएस नंबर नहीं डालना पड़ रहा। क्यूआर कोड स्कैन होने के बाद मीटर व उपभोक्ता की जानकारी अपने आप मोबाइल एप पर डिस्प्ले हो जा रही है। रीडिंग के नए अंक दर्ज करने एवं फोटो लेने का काम हो रहा है। रीडिंग में पारदर्शिता लाने कंपनी बार-बार बदलाव कर रही है। पूर्व में रीडिंग डायरी में लिखी जाती थी। बदलाव कर कुछ साल फोटो मीटर रीडिंग से रीडिंग लेना शुरू हुआ। गलत फोटो रीडिंग, कम-ज्यादा रीडिंग और रीडर के उपभोक्ता के घर नहीं जाने की शिकायतें आ रही थीं।

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घरेलू और गैर घरेलू उपभोक्ताओं के यहां क्यूआर कोड लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। 71 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के यहां प्रक्रिया हो गई है। कृषि फीडरों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। इससे सही रीडिंग के साथ शिकायतें कम आएंगी।

- सुभाष नागेश्वर, शहर डीई

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