
कटनी. वेलस्पन कंपनी द्वारा जमीन लेने के बावजूद ग्रामीणों को रोजगार नहीं दिया गया, कुछ ग्रामीणों का नाम सिर्फ कागजों में दर्ज किया गया है, लेकिन वास्तविकता में वे बेरोजगार घूम रहे हैं, या फिर यहां वहां काम करके गुजारा करने को मजबूर हैं, ऐसे में ग्रामीण सरपंच के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्या से अवगत कराया।
बरही क्षेत्र के बुजबुजा डोकरिया में वेलस्पन कंपनी का मामला ठंडा नहीं पड़ा और अब गैरतलाई से गंभीर समस्या सामने आई है। दो गांवों गैरतलाई व जारारोड़ा के किसान मंगलवार को ग्राम पंचायत सरपंच राजकुमार कोल के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्टर को समस्या बताई। किसानाें ने कहा कि गैरतलाई, कुटेश्वर माइंस में ग्राम के किसान परिवार के सदस्यों को रोजगार के लिए चर्चा एवं आवेदन देकर रोजगार की मांग कर रहे हैं। किसानों की भूमि पटवारी हलका नंबर 36/71 कि भूमि कुटेश्वर मांइस के अंदर लीज में चली गई हैं एवं बिना किसी रोजगार एवं मुआवजा के अपने नाम मे राजस्व रिकार्ड में दर्ज करवा ली गई है। इस सबंध में जब भी माइंस के महाप्रबंधन से बात की जाती हैं तो इनके द्वारा लगातार किसान परिवार के अश्रित सदस्य को रोजगार दिए जाने को कहा जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि महाप्रबंधक से ग्राम पंचायत सरपंच की मौजूदगी में ग्रामीणाें की 3 माह पूर्व एक बैठक की गई थी। प्रबंधन के द्वारा यह निर्णय लिया गया कि हम प्राथमिकता अनुसार किसानों के आश्रितों को रोजगार देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अब कंपनी के लोग कह रहे हैं कि हमारे ऊपर राजनीतिक दबाब बनाया जा रहा है। अगर हम किसानों के आश्रितो को रोजगार देते हैं। तो हमारे ऊपर फिर से झूठे मुकदमे दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है। पिछले वर्ष सेल के पर्सनल अधिकारी प्रदीप मिश्रा के ऊपर झूठा मुकदमा करवा दिया गया था।
केस 01. सोमदत्त विश्वकर्मा गैरतलाई का नाम कंपनी में चढ़ा है कि गैरिज में काम कर रहे हैं, लेकिन वे आजतक नौकरी में नहीं गए और ना ही कंपनी ने काम पर रखा।
केस 02. अनिल विश्वकर्मा का नाम कुटेश्वर कंपनी में सीएलसी विभाग में दर्ज होना बताया जा रहा है जबकि कभी भी कंपनी में काम नहीं किया गया।
केस 03. चुन्नीलाल प्रजापति का नाम कुटेश्वर कंपनी में मैकेनिकल डिपार्टमेंट में दर्ज होना बताया गया है, लेकिन आजतक वे कंपनी में काम में नहीं गए।
केस 04. शंकलाल विश्वकर्मा का भी नाम कुटेश्वर कंपनी में सीएलसी विभाग में कार्यरत होना बताया जा रहा है, जबकि इन्होंने कभी नौकरी नहीं की।
जमीन लेने के बाद भी नहीं रोजगार
ग्रामीण किसान जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी, शिवकुमार बर्मन, गुलाबदास कोरी, जमुना प्रसाद बर्मन, संतोष चौधरी, शंकर विश्वकर्मा, देवानंद प्रजापति, अमित विश्वकर्मा, विकास सिंह, संतोष बर्मन, रामभगत दुबे, सुदामा चौधरी, वीरू साकेत, अजय चौबे, संतोष बर्मन, सियाशरण चौधरी, रवि बर्मन, रामभगत बर्मन, अनिल विश्कर्मा, अजीत यादव, राममित्र सेन, संतू यादव, धनपत सेन, पूरणलाल यादव आदि ने बताया कि 1973 में कुटेश्वर माइंस के लिए उनकी जमीनें ली गई हैं। उस समय परिवार के हर एक सदस्य को नौकरी देने कहा गया था, लेकिन आजतक अधिकांश किसानाें व उनके आश्रितों को काम नहीं मिला, सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ रहे हैं।
Published on:
22 Feb 2023 02:20 pm

बड़ी खबरें
View Allकटनी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
