
Work on master plan is not being done in Katni
बालमीक पांडेय @ कटनी. जिले में डेढ़ लाख छोटे-बड़े वाहन परिवाहन विभाग के अनुसार फर्राटे भर रहे हैं। इसमें आधे से ज्यादा वाहनों की धमाचौकड़ी शहर में रहती है। शहर पांच जिलों का हब भी है। इसमें कटनी सहित उमरिया, सतना, पन्ना, दमोह सहित अन्य क्षेत्र के लोगों का शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रेल-बस यातायात के चलते हजारों लोगों का शहर आना-जाना होता है। इससे जैसे-जैसे दिन चढ़ता है यातायात का दबाव दो-गुना से भी अधिक बढ़ता जाता है। नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा 2011 में शहर को 2021 तक के लिए व्यस्थित करने सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण पर कार्रवाई सहित अन्य सुविधाओं का खाका तैयार किया गया। लेकिन यह प्लान कागजों से बाहर नहीं निकला। जिसका दंश लाखों लोग हर दिन झेल रहे हैं। शहर में कदम-कदम पर जाम से यातायात रेंगता है, धूल, धुआं और ध्वनि के दबाव से लोग कराह उठते हैं, इसके बाद भी न तो जनप्रतिनिधि चेत रहे और ना ही नगर निगम सहित जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी।
सड़क चौड़ीकरण में नहीं रुचि
चांडक चौक से जुहला तक यातायात के दबाव को कम करने एक साल से सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसमें अबतक 30 फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ। फेज-1 में भ्रष्टाचार और मनमानी चल रही है वह अलग। बनने के पहले ही नाली बार-बार ढह रही है। एक करोड़ 60 लाख रुपये पानी में बहा दिए गए। चांडक चौक से गर्ग चौराहा तक हर 5 मिनट में जाम लग रहा है, इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हट रहा। इसके अलावा सुभाष चौक से आजाद चौक, सुभाष चौक से मिशन चौक तक बेहतर यातायात सहित शहर के अन्य हिस्से में सड़कों के बेहतर निर्माण और आवागमन के लिहाज से कोई काम नहीं हो पा रहा।
इन मार्गों में अस्थायी अतिक्रमण बाधक
शहर के जितने भी प्रमुख मार्ग हैं उनमें आस्थायी अतिक्रमण सबसे ज्यादा बाधक है। स्टेशन चौराहा से लेकर सुभाष चौक, सुभाष चौक से झंडा बाजार, गांधी द्वार से सुभाष चौक, झंडा बाजार से घंटाघर मार्ग, गोलबाजार एरिया, झंडा बाजार से शेर चौक मार्ग, जिला अस्पताल से अहिंसा तिराहा, कपड़ा बाजार, फल बाजार वाले क्षेत्र में व्यापारियों द्वारा दुकानें आधे सड़क तक लगाई जा रही है। मनमानी के चलते दिनभर शहर का यातायात बाधित होता है।
खास-खास:
- अस्थायी अतिक्रमण हटाने में भाजपाई और कांग्रेसियों के विरोध करने के बाद ठंडी पड़ी नगर निगम कार्रवाई, व्यापारियों की फिर जारी है मनमानी।
- शहर का वीआइपी सड़क ट्रेवल्स कारोबारियों की बन चुकी है पार्किंग, मोड़ व मुख्य मार्ग में कारें पार्क होने से हर समय रहती है जाम की समस्या।
- घंटाघर में लोडर वाहन, स्टेशन चौराहे में अस्तव्यस्त पार्किंग, मुख्य मार्ग में पार्किंग की कमी के कारण दिनभर लगता है जाम।
- शहर में ऑटो रिक्शा चालकों, इ-रिक्शा चालकों, हाथ ठेला, हाथ-रिक्शा के लिए पार्किंग न होने से बीच सड़क में होती है लोडिंग-अनलोडिंग।
- शहर के अधिकांश स्कूलों का मुख्य द्वार मुख्य मार्गों पर है, सीधे बच्चे रोड पर आते हैं, स्कूल वाहन सड़क पर खड़े होते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है।
ये मार्ग सबसे संकीण
- पुराने कमानिया गेट से हीरागंज मार्ग।
- कारगिल चौक से गोल बाजार मार्ग।
- कांच मंदिर से गोल बाजार मार्ग।
- कारगिल चौक से सब्जी मंडी मार्ग।
- हीरागंज पेट्रोल पंप के पीछे सब्जी मंडी।
- पोस्ट ऑफिस के सामने वाला मार्ग।
- गल्र्स कॉलेज के सामने वाला मार्ग।
- घंटाघर से झंडा बाजार मार्ग।
- सुक्खन अखाड़ा से शेर चौक मार्ग।
चौक-तिराहे भी नहीं व्यवस्थित
शहर के संकीर्ण मार्गों के चलते राहगीर परेशान तो हैं ही साथ ही चौराहों और तिराहों के अव्यवस्थित रहने से शहर पहुंचे लागों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हृदय स्थल सुभाष चौक में अस्थायी दुकानें, बेजा पार्किंग मुख्य समस्या है। इसके अलावा अहिंसा तिराहा, स्टेट बैंक तिराहा, दिलबहार चौराहा, कारगिल चौक, गोल बाजार चौक, घंटाघर चौराहा, गर्ग चौराहा, सुक्खन चौक, झंडा बाजार पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हैं।
यह है जिले में वाहनों की संख्या
मोटर साइकिल- सवा लाख
ट्रक- 2200
बस- 442
ऑटो रिक्शा- 4878
लोडर वाहान- 2229
ट्रैक्टरट्राली- 9728
कार- 8648
प्रतिसाल इजाफा
बाइक- 12000
बस- 12
ट्रक- 225
ऑटो-रिक्शा- 350
लोडर वाहन- 250
ट्रैक्टर-ट्राली- 450
कार- 1200
इनका कहना है
चांडक चौक से गर्ग चौराहा तक अतिक्रमण हटाने योजना बन गई है शीघ्र ही कार्रवाई शुरू होगी। शहर में भी अतिक्रमण पर कार्रवाई होगी। यातायात व पार्किंग को व्यस्थित करने भी शीघ्र पहल शुरू की जाएगी। अभी कार्रवाई की गई थी, लेकिन कुछ लोगों के विरोध के बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी। शहर के कुछ लोग खुद नहीं चाहते ही व्यवस्थाएं सुधरें।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।
2011 में बना सिटी डेवलपमेंट प्लान लागू नहीं हो पाया। शहर में जाम की समस्या गंभीर है। इसके लिए अतिक्रमण भी हटना आवश्यक है। इसमें भारी-भरकम बजट लगना है। बजट की व्यवस्था हो तो फिर इस दिशा में बढ़ा जा सकता है। ब्रिज का काम चलने के कारण शहर में काम नहीं हो पा रहा। अस्थाई दुकानों को हॉकर्स जोन में शिफ्ट कर व दुकानदारों को समझाइश देकर ही काम बन सकता है।
शशांक श्रीवास्तव, महापौर।
Published on:
27 Nov 2019 11:13 am
बड़ी खबरें
View Allकटनी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
