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हादसे के साए में नौनिहालों की शिक्षा, भवन की दीवारों पर दरारे

आंगनबाड़ी भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। समय-समय पर मरम्मत के अभाव में भवन क्षतिग्रस्त होकर जर्जर व बदहाल हो चुका है, जो कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। ऐसे में नौनिहाल बच्चे के सिर पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे स्थिति में नौनिहाल बच्चे पढऩे-लिखने के लिए मजबूर है।

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हादसे के साए में नौनिहालों की शिक्षा, भवन की दीवारों पर दरारे

हादसे के साए में नौनिहालों की शिक्षा, भवन की दीवारों पर दरारे

इंदौरी. महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों व महिलाओं में कुपोषण दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन अंचल के आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली का शिकार होते जा रहे हैं। ग्राम खपरी स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 3 की भवन देखकर तो यहीं लग रहा है।
आंगनबाड़ी भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। समय-समय पर मरम्मत के अभाव में भवन क्षतिग्रस्त होकर जर्जर व बदहाल हो चुका है, जो कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। ऐसे में नौनिहाल बच्चे के सिर पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे स्थिति में नौनिहाल बच्चे पढऩे-लिखने के लिए मजबूर है। इसे लेकर पालक चिंतित है। भवन की दीवारों में मोटी-मोटी दरारे स्पष्ट नजर आ रही है, लेकिन जिम्मेदार को यह नजर ही नहीं आ रहा है। बरसात के दिनों में इन्ही दरारों से होकर कई प्रकार के जहरीले कीड़े मकोड़े और सांप-बिच्छू केन्द्र के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। जिसकी शिकायत कई बार शासन प्रशासन व ग्राम पंचायत को भी किया जा चुका है। इसके बाद भी इसकी सुध लेने की फुर्सत किसी के पास नहीं है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों के साथ किसी भी समय अनहोनी घटना की आशंका बनी रहती है। इसके बाद भी जर्जर और बदहाल स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। भवन की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल नया आंगनबाड़ी केंद्र की मांग कर रहे हैं। ताकि नौनिहालों को खतरा से बचाया जा सके। शासन प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि को एयर कंडीशनरयुक्त ऑफिस से बाहर निकले तो ही कमिया नजर आएगा। बेफजुल लाखों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन ग्रामीण बच्चों की सुविधा के लिए हजार रुपए खर्च कर नहीं कर रहे हैं।
शिकायत के बाद भी सुधार नहीं
्रग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत खपरी में तो वैसे एक नहीं, तीन आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है, लेकिन केन्द्र क्रमांक ०३ की भवन जर्जर हो चुका है। केन्द्र में २० बच्चों की दर्ज संख्या हैं। प्रत्येक शिविर, बैठक में भवन की स्थिति की सूचना दी जाती है। बावजूद इसके कुछ भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पालकों ने पूरी तरह जर्जर हो चुके आंगनबाड़ी भवन का नव निर्माण की मांग कर रहे हैं। ताकि बच्चों को राहत मिल सके।
शो-पीस बनकर रह गए पानी टंकी
कोरोना संक्रमण काल के दौरान जिले से लेकर ग्रामीण अंचल के आंगनबाड़ी, प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में बच्चों व छात्र-छात्राओं के हाथ धोने के लिए पानी टंकी स्थापित कर नल कनेक्शन दिया गया। ठेकेदार द्वारा जोर-शोर से निर्माण तो कराया गया, लेकिन गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण पानी टंकी निर्माण के कुछ माह बाद जर्जर होता गया, जो अब शो-पीस बनकर रह गया है। इसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। यह नजारा ग्राम पंचायत बंजारी के आंगनबाड़ी, मिडिल व प्राथमिक स्कूल और बरबसपुर के आंगनबाड़ी, नाऊडीह के प्राथमिक स्कूल में देखा जा सकता है। इस ओर जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरुरत है। ताकि छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सके।

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