
Vayondandai Namah Mantra
कवर्धा . खेड़ापति हनुमान मंदिर में मनोकामना सिद्धि एवं कष्ट निवारण हेतु 20 दिसंबर को विशेष हनुमत आराधना के साथ ग्रंथि पूजा व अर्चना की गई, जिसमें भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने हजारों की संख्या में भाग लेकर कष्टनिवारण पूजन किया। इस अवसर पर पीले रंग के धागे में हनुमत मंत्र के साथ तेरह गांठे लगाते भक्तगण देखे गए।
पं. चंद्रकिरण तिवारी ने बताया कि मार्गशीर्ष अगहन शुक्ल त्रयोदशी के दिन श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में ग्रंथि पूजन विधी विधान से किया गया। सुबह से देर रात्रि तक चलने वाले इस आध्यात्मिक आयोजन में महिला-पुरूषों के साथ बच्चों का भी तांता लगा रहा। विधि अनुसार इस पूजन में पीले रंग का धागा लिया गया, जिसमें तेेरह गांठें लगाई गई। गांठ लगाते समय हर बार ओम नमो भगवते वायुनंदनाय नम: का मंत्रोच्चारण भक्तगण करते रहे, जिससे मंदिर परिसर में पूरा समय हनुमंत मंत्र गूंजता रहा और पूरा वातावरण हनुमतमय हो गया। अधिकांश लोगों ने व्रत भी रखा और अपनी आस्था व्यक्त की।
पीले धागे की मांग बढ़ी
हर वर्ष होने वाले इस ग्रंथि पूजन में केवल नगर के ही लोग नहीं, बल्कि दूर दूर से आकर लोग सम्मिलित होते हैं। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने और भाग लेने के कारण पूजन सामग्रियों की मांग भी बढ़ जाती है। मंदिर के सामने ही नारियल, अगरबत्ती, जनेऊ, मगज के लड्डू, कपूर, आदि पूजन सामग्रियों की दुकानें सजी हुई है।
मालपुआ का लगा भोग
हनुमान जी को सर्वाधिक प्रिय रोंठ-नारियल और माल-पुआ का भोग भक्तों ने चढ़ाया और उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया। मंदिर परिवार की ओर से भी मालपुआ बनाकर प्रसाद वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त मंदिर के सामने भी पूजन सामग्रियों की दुकानों में मगज के लड्डू आज खूब बिके। एक अनुमान के अनुसार लगभग एक क्विंटल लड्डू भक्तों ने हनुमान जी को समर्पित किया। राम और युधिष्ठिर ने सबसे पहले गं्रथी पूजा किया था। आध्यात्मिक पूजा अर्चना और भावनाओं और विश्वास पर टिका हुआ है। पुराणों के अनुसार इस पूजा से ही भगवान राम और महाभारत काल में राजा युधिष्ठिर की भी दु:खों का अंत हुआ था। आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है।
Published on:
22 Dec 2018 11:42 am
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