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भोरमदेव शक्कर कारखाना में गन्ने के छिलके से रोजाना 3 से 4 मेगावॉट बिजली उत्पादन, हजारों घर हो रहे रोशन

कवर्धा जिले के शक्कर कारखाने में गन्ना पेराई के साथ रोजाना 3 से 4 लाख रुपए की बिजली तैयार की जा रही है। जिससे कवर्धा जिले के कई गांव रोशन हो रहे हैं।

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भोरमदेव शक्कर कारखाना में गन्ने के छिलके से रोजाना 3 से 4 मेगावॉट बिजली उत्पादन, हजारों घर हो रहे रोशन

भोरमदेव शक्कर कारखाना में गन्ने के छिलके से रोजाना 3 से 4 मेगावॉट बिजली उत्पादन, हजारों घर हो रहे रोशन

कवर्धा. जिले के शक्कर कारखाने में गन्ना पेराई के साथ रोजाना 3 से 4 लाख रुपए की बिजली तैयार की जा रही है। जिससे कवर्धा जिले के कई गांव रोशन हो रहे हैं। अब उन घरों में भी बिजली पहुंच रही है जहां कभी अंधेरा हुआ करता था। प्रदेश में यह पहली दफा है जब गन्ना पेराई के साथ गन्ने के छिलके से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। गन्ने के छिलके जिसे बगास कहा जाता है उससे भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में रोजाना 3 से 4 मेगावॉट बिजली उत्पादन कर विद्युत वितरण कंपनी को बेचा जा रहा है। यह बिजली कवर्धा शहर के अलावा आसपास के कई गांवों को भी रोशन कर रहा है। कबीरधाम जिले में गन्ने का अत्यधिक उत्पादन होता है। इसके चलते यहां पर दो सहकारी शक्कर कारखाना स्थापित किए गए हैं।

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के गन्ना प्रभारी केके यादव ने बताया कि शक्कर कारखाना में बगास के जरिए अतिरिक्त बिजली उत्पादन के लिए 6-6 मेगावाट के दो सब स्टेशन है। एक स्टेशन से शक्कर कारखाना संचालित होता है। कारखाना परिसर व कॉलोनी में बिजली सप्लाई की जाती है। जबकि दूसरे स्टेशन से जो बिजली उत्पादन होता है उसे विद्युत वितरण कंपनी को 5.20 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिक्री किया जाता है। रोजाना 3 से 4 लाख रुपए का बिजली बेचा जा रहा है। वहीं यहां से बिजली केवल पेराई सत्र मतलब छह माह तक ही सप्लाई किया जाता है। छह माह में ही कारखाना को करीब 4 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है।

बिजली उत्पादन की प्रक्रिया
पेराई सत्र में प्रतिदिन हजारों मीट्रिक टन गन्ना पेराई किया जाता है। इसमें से प्रति मीट्रिक टन गन्ना से 32 प्रतिशत बगास निकलता है जिसमें से 24 प्रतिशत बगास का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए बायरल में ईंधन के रूप में किया जाता है। प्रति घंटा 30 से 35 टन बगास जलाया जाता है जहां पर टरबाइन लगा हुआ है जिससे कि बिजली उत्पादन की प्रक्रिया होती है। फिर इसे सब स्टेशन तक पहुंचाया जाता है। वहां पर से विद्युत वितरण कंपनी के 33/11 केव्ही के ग्रीड में सप्लाई कर दिया जाता है।

गांव और शहर में सप्लाई
कवर्धा शहर में 17 हजार 124 विद्युत उपभोक्ता है। कारखाने से सप्लाई होने वाली बिजली शहर के अधिकतर घरों के लिए पर्याप्त है। साथ ही गांवों तक भी सप्लाई होती है। चूंकि कारखाना से उत्पादन होने वाली बिजली ग्रीड में डाल दिया जाता है तो कवर्धा और बोड़ला क्षेत्र के लिए सप्लाई हो जाती है। यह हजारों घरों को रोशन कर रहा है और किसानों के खेतों तक भी पहुंच रहा है। बीएस ठाकुर, प्रबंध संचालक, भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना राम्हेपुर ने बताया कि पूर्व में बिजली विभाग ही इसे संचालित करता था, लेकिन अब बिजली उत्पादन से उनका कर्ज चुकता कर दिया गया है। अब यह विद्युत स्टेशन कारखाने का हो गया। छह माह के दौरान करीब 4 करोड़ रुपए का बिजली उत्पादन कर विद्युत वितरण कंपनी को बेचा जा रहा है। इससे कारखाने को अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

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