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चार साल की मासूम से दरिंदगी के आरोपी को सजा ए मौत
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चार साल की मासूम से दरिंदगी के आरोपी को सजा ए मौत

अपहरण, बलात्कार के बाद गला घोंटकर हत्या करने का किया था प्रयास, आरोपी को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक उसका प्राणांत न हो- न्यायालय
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खंडवा

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Dheerendra Kumar Gupta

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Updated: 21 Apr 2023, 11:24 PM IST

खंडवा. चार साल की मासूम बालिका का अपहरण के बाद बलात्कार और फिर उसकी हत्या का प्रयास करने के मामले में शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्राची पटेल ने आरोपी राजकुमार उर्फ राजाराम पिता गंगाराम (20) निवासी खालवा को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी चंद्र शेखर हुक्मलवार ने की है।
इन धाराओं में यह सजा
आरोपी को धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत मृत्यु दंड से दंडित किया गया। आइपीसी की धारा 363, 450, 201 में 7- 7 वर्ष के कठोर कारावास व धारा 307 में आजीवन कारावास के साथ दो- दो हजार रुपए अर्थदंड कुल 8 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। यह संगीन वारदात 30 व 31 अक्टूबर 2022 की है।

पांच दिन पहले आई थी बच्ची
घटना के पांच दिन पहले 25 अक्टूबर को ममेरी बहन के साथ बच्ची रिश्तेदारी में आई थी। आरोपी अंधेरे में उसे खेत में बने टप्पर के अंदर से उठाकर ले गया और वारदात को अंजाम दिया। गला दबाने के बाद उसे मरा समझकर आरोपी आम के बगीचे में फेंक आया था। जब पुलिस की पकड़ में आरोपी आया तो उसी के बताने पर बच्ची को जीवित अवस्था में बरामद किया गया था।
पुलिस ने जुटाए थे अहम साक्ष्य
आरोपी की चप्पल, पर्स घटना स्थल पर पाए गए थे। पर्स जिसके अंदर उसका आधार कार्ड, 130 रुपए नकद मिले थे। आरोपी ने पीडि़ता और स्वयं के कपड़े ग्राम टिटिया जोशी में पेट्रोल पंप के आगे झाडि़यों में फेंक दिए थे, उसे भी पुलिस ने आरोपी के बताने पर जब्त किया था।
पीडि़ता को पहुंची शारीरिक विकृति
पीडि़ता का उपचार करने वाले चिकित्सक का यह मत था कि पीडि़ता घटना के बाद से सहमी और डरी हुई है। वह किसी से बात नहीं करती है। चिकित्सक ने यह भी बताया था कि पीडि़ता को चलने व बैठने में दिक्कत थी। उसके एमआरआइ स्केन में ब्रेन के लेंटीफार न्युकेलस में सूजन थी, जो ऑक्सीजन की कमी के कारण आई प्रतीत होती थी।कूल्हे की हड्डी में भी सूजन भी पाई गई थी। चिकित्सक का यह मत था कि पीडि़ता को पहुंची यह चोट गिरने या फेंकने से हो सकती है और यह चोट स्थायी या अस्थायी विकृति हो सकती है।
डीएनए साक्ष्य से साबित माना अपराध
आरोपी राजकुमार को पुलिस ने शंका के आधार पर अभिरक्षा में लिया था। स्वयं पीडि़ता घटना के बाद डरी-सहमी हुई थी, जो समान आयु के बच्चों की तरह व्यवहार, आचरण और बातचीत नहीं कर रही थी। घटना मध्य रात्री की थी और उस वक्त पीड़िता गहरी नींद में थी, ऐसे में आरोपी की पहचान पीडि़ता द्वारा किया जाना लगभग असंभव था। आरोपी के बताए अनुसार पीडि़ता का मिलना एवं बलात्कार वाले स्थान गन्ने के खेत व फेंकने वाले स्थान आम के बगीचे से भौतिक साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने तत्परता से आरोपी का रक्त नमूना लेकर डीएनए जांच को भेजा। न्यायालय में चालान प्रस्तुत होने के पूर्व डीएनए रिपोर्ट से मामले की पुष्टि हो गई थी। आरोपी को दोषी साबित करने के लिए यह महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित रहा।
4 महीना 23 दिन में आया फैसला
न्यायालय ने अपने निर्णय में उल्लेखित किया कि इस प्रकरण के तथ्यों पर विचार किया जाए तो चिकित्सकीय साक्ष्य व अन्य साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि अपराधी द्वारा अनुसूचित जनजाति की सदस्य 4 वर्षीय अल्प आयु व असहाय बालिका के साथ जबरदस्ती मैथुन भी बर्बरतापूर्वक किया गया था। पीडि़ता के शरीर के विभिन्न भागों पर चोटें भी उक्त कृत्य करते समय कारित की थी और गला घोंटकर उसकी हत्या का प्रयास भी किया था। आरोपी ने उक्त कार्य योजनाबद्ध रूप से निष्पादित किया। वह सर्वप्रथम अपने पूर्व परिचित बालिका के परिजन के घर गया, खाट मांगी और इसके बाद सबके सोने का इंतजार किया और फिर बालिका को उठाकर आम के बगीचे में ले गया और बलात्संग कर हत्या का प्रयास किया और साक्ष्य की विषय वस्तु अर्थात चार वर्षीय अबोध बालिका को मारकर कहीं ओर फेंक दिया। यह बालिका की उत्कृष्ट इच्छा शक्ति एवं अदम्य जीवटता थी कि वह जीवित रही। अन्यथा आरोपी द्वारा बालिका के हत्या के प्रयासों में कोई कमी नहीं थी। अतः उक्त विवेचनानुसार मात्र आजीवन कारावास का दंडादेश पर्याप्त नहीं हो सकता है और मृत्यु दंड ही आवश्यक है।
इनकी रही अहम भूमिका
अपराधी को तत्काल पकड़ने, बालिका को दस्तयाब करने, साक्ष्य जुटाने और कम समय में विवेचना कर पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया था। जिसमें सीएसपी पूनम चंद यादव के दिशा निर्देशन में तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक बीएल अटोदे, वर्तमान थाना प्रभारी कोतवाली बलराम सिंह राठौर, चौकी प्रभारी रामनगर उप निरीक्षक सुभाष नावड़े, महिला थाना प्रभारी सुलोचना गेहलोद, प्रधान आरक्षक दिनेश रावत एवं आरक्षक विनोद पुरे की अहम भूमिका रही।