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आज खुलेंगी माता की बाड़ी, रथ लेकर पहुंचेंगे भक्त

गणगौर पर्व: जवारों की होगी पूजा, झालरिए गाए जाएंगे  

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आज खुलेंगी माता की बाड़ी, रथ लेकर पहुंचेंगे भक्त

दिनभर माता के भक्त बाड़ी में माता के जयकारा लगाते हुए अपनी मन्नत पूरी करेंगे।

ओंकारेश्वर. निमाड़ की प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय गणगौर माता की धूम इन दिनों धार्मिक नगरी ओकारेश्वर में चल रही है। प्रतिदिन बाड़ी स्थानों पर महिलाएं झालारिया नृत्य करने पहुंच रही है।
ब्रह्मपुरी, विष्णुपुरी, और शिवपुरी क्षेत्र में शुक्रवार को भक्तों के दर्शन, जवारों के पूजन के लिए ब्रह्म मुहूर्त में माता जी की बाड़ी खोली जाएगी। दिनभर माता के भक्त बाड़ी में माता के जयकारा लगाते हुए अपनी मन्नत पूरी करेंगे। पूजा-अर्चना पं. ललित दुबे ,रामचंद्र परसाई और गजानंद गिरी के निवास पर बोई गई बाड़ी में जाकर करेंगे। दोपहर 2 बजे जेपी चौक स्थित बाड़ी में धनिया राजा रनु बाई को अपने माथे पर श्रंगार कर बाड़ी स्थान पर जवारे लेने पहुंचेंगे। माता का मायका ओकारेश्वर में होने के कारण 1 दिन पहले बोई एवं विसर्जन की जाती है किंतु तिथि घटबढ़ होने के कारण सभी स्थानों पर लगभग निमाड़ अंचल में माता की वाड़ी शुक्रवार को ही खुलेंगी।
माता के भक्तों के घर जोड़े जिमाने का सिलसिला प्रारंभ होगा। शनिवार को माता के रथ परंपरागत अनुसार विष्णुपुरी क्षेत्र में शाम 7 बजे श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी पहुंचेंगे। यह अखाड़े के सचिव एवं महंत कैलाश भारती द्वारा मां की पूजा अर्चना के बाद गोमुख घाट पर रथ पहुंचेंगे। वहां से स्व. मनोहर जायसवाल के परिवार द्वारा जजमान बनाकर माता को 1 दिन के लिए घर लाएंगे। 26 मार्च को माता घाट पर पहुंचेगी। वहां से माता के रथों को नाविक संघ बौढ़ाकर बालवाड़ी क्षेत्र ले जाएंगे। 27 मार्च को भंडारा पूजा अर्चना के बाद माताजी को नम आंखों से विदाई सोमवार को दी जाएगी।
गणगौर माता को मेहमान के रूप में आज घर लाएंगे
मथेला. गणगौर भगवान भोलेनाथ माता पार्वती की कृपा मानकर बड़ी ही धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। यह पर्व चैत्र कृष्ण ग्यारस को माता की मुठ के साथ पुजारियों द्वारा सेवा कार्य आरम्भ होकर चैत्र शुक्ल तीज तक बाड़ीयो में माता के Óवारों को सींचा जाता है। तीज के दिन माता को मेहमान के रूप में घर लेकर आते हैं। सभी महिला-पुरुष ब'चे आज के दिन नए वस्त्र पहनकर इस महोत्सव शामिल होते हैं। गुरुवार सुबह बाडिय़ां खुलते ही श्रद्धालु दर्शन के पहुंचेंगे। ऐसे परिवार जिनके यहां माता के रथ लाए जाते हैं। वह विशेष पूजा अर्चना के बाद माता के Óवारों को रथ में स्थापित कर जयकारों के साथ घर लाकर पूजा अर्चना कर महाप्रसादी का भोग लगाकर जोड़ें और मेहमानों को भोजन कराते हैं। शाम को महिलाएं रनूबाई और धनिया राजा को रख झालरिया गीत गाए जाएंगे।
तिलक की परंपरा
आज शाम पांच बजे गणगौर माता को पूरे गांव के माता बहने एवं पुरुष एकत्रित होकर पानी पिलाने के लिए ले जाते हैं। जहां महिला सामूहिक रुप से गणगौर गीतों का नाच गाना करती हैं। रात्रि में महिलाओं द्वारा जिन घरों में गणगौर माता को मेहमान के रूप में लाए हैं। उन घरों में तिलक लगाने के लिए जाती है।
फूल-पाती का दौर
महिलाओं एवं नन्ही बालिकाओं द्वारा फूल-पाती का दौर आठ दिन तक चलता है ! इसमें दूल्हा दुल्हन के रूप में महिलाएं शृंगार करके फूल-पाती खेलती है। और बाने के रूप में गांव में घूमती है।

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