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ओंकार पर्वत पर निवास और व्यवसाय चाहिए: आंदोलनकारी

धरना आंदोलन का दूसरा दिन

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ओंकार पर्वत पर निवास और व्यवसाय चाहिए: आंदोलनकारी

ओंकार पर्वत पर निवास और व्यवसाय चाहिए: आंदोलनकारी

ओमकारेश्वर. ओंकार पर्वत परिक्रमा मार्ग और कैलाश खो क्षेत्र के निवासियों को प्रशासन द्वारा उनका मकान एवं दुकान का अतिक्रमण हटाकर वार्ड 15 डूकिया में बसाने की योजना है। आंदोलन के दूसरे दिन बुधवार को दोपहर पुनासा तहसीलदार राजेश पाटीदार नगर परिषद, सीएमओ मोनिका पारदी, राजस्व निरीक्षक नीरज रावत और टीआई बलराम सिंह राठौर आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे। पुनासा तहसीलदार ने उन्हें समझाया कि आप लोगों को दुखिया में प्लाट दिए जाएंगे और साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के ढाई लाख रुपए भी तुरंत ही स्वीकृत किए जाएंगे आप अपना धरना आंदोलन समाप्त करें किंतु आंदोलनकारियों सुनील सोनोने, पार्षद जुगनू वर्मा और और अरुणा केवट ने साफ इनकार किया कि हमें पर्वत पर ही निवास के लिए स्थान और व्यवसाय के लिए दुकान चाहिए जब तक यह हमारी मांग पूरी नहीं होगी हमारा धरना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

ग्रामीणों की मांग विस्थापन नीति के तहत हमें विस्थापित किया जाए

ओमकारेश्वर. सोमवार को नगर परिषद द्वारा हटाए गए अतिक्रमण को लेकर स्थानीय निवासी ने एकत्रित होकर मंगलवार को शंकराचार्य मूर्ति स्थापना वाले स्थान पर धराना प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। मंगलवार शाम करीब 5:00 बजे से ग्रामीण अनिश्चित काल के लिए धरना आंदोलन के लिए बैठ गए । वहीं ग्रामीणों ने सुबह मुख्यमंत्री के नाम ओमकारेश्वर नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की अनुपस्थिति में तहसील के बाबू को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि ओंकारेश्वर पर्वत परिक्रमा मार्ग एवं कैलाश खो में कई वर्षों से निवास करने वाले लोगों को अतिक्रमण के नाम पर बेदखल किया जा रहा है उच्च न्यायालय सर्वोपरि पर हम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं परंतु कहां पर निवास करने वाले गरीब परिवार अपनी जीवन भर विस्थापन नीति के तहत में स्थापित कर हमारे की पूंजी अपने मकान दुकान में लगाकर छोटा-मोटा व्यवसाय कर अपना व अपने परिवार का गुजारा करते हैं हमारा मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि हमें संवैधानिक तरीके से विस्थापन नीति से स्थापित कर हमें मुआवजा देकर हमारे व्यवसाय को भी सुरक्षित किया जाए। जिससे हमारे जीवन यापन हो सके हमे शंकराचार्य मूर्ति स्थापना वाले क्षेत्र से हटकर दूसरी जगह दुकानें बनाकर दी जाएं।