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यूक्रेन में फंसे खंडवा के दोनों विद्यार्थियों की देश वापसी

खंडवा का छात्र सुबह तो जावर की छात्रा शाम को पहुंचीं दिल्ली, आज आएंगे दोनों खंडवा, परिजन को इंतजार

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Return of both the students of Khandwa trapped in Ukraine

Return of both the students of Khandwa trapped in Ukraine

खंडवा. यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते यूक्रेन में फंसे भारत के हजारों विद्यार्थियों के साथ खंडवा के भी पांच विद्यार्थी शामिल थे। इसमें से तीन विद्यार्थियों की वापसी पहले ही हो चुकी थी। जबकि एक छात्र और एक छात्रा गुरुवार को सुरक्षित दिल्ली पहुंच गए। दोनों विद्यार्थी पिछले तीन दिन से रोमानिया बार्डर पर शेल्टर हाउस में फंसे हुए थे। छात्र सुबह सेना के प्लेन से सैनिक हवाई अड्डे पर उतरा। वहीं, छात्रा शाम की फ्लाईट से दिल्ली एअरपोर्ट पहुंचीं। दोनों संभवत: शुक्रवार को खंडवा पहुंच जाएंगे।


यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए खंडवा के पांच विद्यार्थियों में अब तक दर्शिका श्रीवास्तव निवासी किशोर नगर, आकाश राठौर निवासी मूंदी, सैफ रब्बानी निवासी खेड़ीघाट अपने घर पहुंच चुके है। खंडवा जिले के दो अन्य विद्यार्थी जिसमें दरक्षा पिता अनवर खान निवासी सैलानी जावर और ताहेर पिता मुर्तुजा लोखंडवाला रामकृष्णगंज वार्ड भी गुरुवार को अपने देश पहुंचे। ताहेर बुधवार रात फ्लाइट में सवार हुए और गुरुवार सुबह दिल्ली पहुंचे। यहां से वे शाम 6 बजे इंदौर एअरपोर्ट पहुंचे। शुक्रवार सुबह वो खंडवा आएंगे। जबकि दरक्षा खान गुरुवार सुबह फ्लाइट में सवार हुईं और शाम 6 बजे दिल्ली पहुंचीं। दरक्षा भी शुक्रवार को खंडवा पहुंचेंगी।


गिरती बर्फ के बीच 10 किमी पैदल चले विद्यार्थी
चार साल से यूक्रेन के ओडेसा में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे ताहेर युद्ध शुरू होने के बाद वही फंस गए थे। 26 फरवरी को ताहेर अपने 10 दोस्तों के साथ, जिसमें चार छात्राएं भी शामिल थीं, ने ग्रुप बनाकर बस कर रोमानिया के लिए निकले। रोमानिया बार्डर तक पहुंचने में 24 घंटे लग गए। बार्डर से 10 किमी पहले उन्हें बस ने छोड़ दिया। इस दौरान यहां बर्फबारी हो रही थी। बर्फबारी के बीच 10 किमी का सफर कर ताहेर का ग्रुप रोमानिया स्थित शेल्टर हाउस पहुंचा। यहां तीन दिन तक उन्हें और ग्रुप के अन्य सदस्यों को फ्लाइट का इंतजार करना पड़ा। ताहेर के पिता मुर्तुजा ने बताया कि यूक्रेन-रूस का युद्ध शुरू होने के बाद से ताहेर की सलामती को लेकर पूरा परिवार चिंतित था। चार यूक्रेन से बाहर निकलने के बाद से उसकी दादी जुमाना और मां फातेमा के गले से खाने का निवाला भी नहीं उतर रहा था। रिश्तेदारों और मित्रों के इतने फोन आ रहे थे कि हर तीन घंटे में मोबाइल की बैटरी डाउन हो रही थी। गुरुवार सुबह ताहेर ने दिल्ली आने की सूचना दी तो पूरे परिवार ने राहत की सांस ली। शुक्रवार को उसके घर पहुंचने पर ईद मनाई जाएगी।