
sendhwa kanbai festival news
सेंधवा. नगर में रविवार से शुरू हुआ कानबाई पर्व का सोमवार को समापन हो गया। इस दौरान नगर के सैकड़ों महराष्ट्रीयन परिवारों में दो दिनों तक उत्साह का माहौल रहा। शनिवार को माता की आगवानी की गई। वहीं रविवार को माता की स्थापना के बाद रविवार को दिनभर पूजन का दौर चला। शाम को महाआरती की गई। सभी स्थानों पर माता की स्थापना के लिए आकर्षक साज सज्जा की गई थी। सोमवार को कानबाई माता को विदाई दी गई। लोग ढोल ताशों के साथ माता को विसर्जित करने पहुंचे। इस दौरान नपाध्यक्ष बसंतीबाई यादव और उपाध्यक्ष छोटू चौधरी ने श्रद्धालुओं को बधाई दी।
कानबाई उत्सव महाराष्ट्र समाज का बड़ा त्योहार है। लोगों में खूब उत्साह रहता है। शनिवार को माता को घर लाने के बाद रविवार को माता को विधि-विधान से स्थापना की गई। रात्रि जागरण के बाद सोमवार को माता को धूमधाम से विर्सजन किया गया। कई स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। कई लोगों ने श्रद्धालओं के लिए चाय, पानी सहित स्वल्पाहार की व्यवस्था की। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहे।
वरला-बलवाड़ी. कानबाई माता का विसर्जन महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा माता की शोभायात्रा निकालकर बलवाड़ी गांव की अरुणावती नदी में श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता का विसर्जन किया। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान माता को अपने शिरोधार्य कर महात्मा गांधी चौक, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर होते हुए गांव के मुख्य मार्ग से गाजे-बाजे के साथ समाज के लोगों ने विसर्जन समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम में सालिगराम पाटील, संजू पाटील, गणेश पाटील, महेश पाटील, नरेंद्र पाटील, विजय पाटील, डॉ. सुधाकर पाटील, नवनीत पाटील, नरेंद्र पाटील सहित समाज के लोग मौजूद थे।
पानसेमल. नगर में रविवार को कई स्थानों पर कानबाई माता व कनेर राजा की विधि विधान के साथ स्थापना की गई। इसके बाद परंपरागत रोट से बने हुए व्यंजन का भोग लगाकर परिवार ने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। रात्रि जागरण कर परिजनों ने पूरी रात माता की आराधना की। कोरोना प्रभाव के कम होने के बाद पहली बार महाराष्ट्रीयन त्योहार कानबाई माता का उत्सव बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। तीन दिवसीय उत्सव का सोमवार को समापन हो गया। विसर्जन चल समारोह नगर के सभी मोहल्ले से अपने-अपने समूह के साथ उत्तर गली, भोई प्लाट, धानक मोहल्ला, खेतिया रोड, जलगोन रोड, नया प्लॉट आदि क्षेत्रों से मेन रोड होते हुए निकाला गया। इस दौरान कानबाई माता के भक्त बैंड की धून पर महाराष्ट्रीयन लोकगीतों पर जमकर झूमे। महिलाओं ने गरबा रास और फुगड़ी खेलने का आनंद लिया। महाराष्ट्रीयन वाद्य ढफड़ों पर युवक-युवतियां खूब थिरके। चल समारोह में परिजनों ने कानबाई माता को सिर पर धारण किया हुआ था। कानबाई माता के साथ कनेर राजा भी सिर पर विराजमान थे। सुबह करीब 8 बजे से कानबाई माता विसर्जन चल समारोह शुरू हुआ जो दोपहर 1 बजे गोमती नदी तट पर पहुंचा। जहां कानबाई माता की सभी परिजनों ने आरती की। उसके बाद नप द्वारा की गई पानी की टैंकर की व्यवस्था से माता का भावभीनी विसर्जन किया गया।
Published on:
02 Aug 2022 05:07 pm
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