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6 फरवरी से महेश्वर की सहस्त्रधारा में मचेगी कैनो स्लैलम की धूम

खेलो इंडिया के तहत मध्यप्रदेश के महेश्वर की सहस्त्रधारा में कैनो स्लैलम की धूम मचेगी, 6 और 7 फरवरी को देशभर से आनेवाले खिलाड़ी यहां प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान आप भी यहां ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन करने के साथ ही पर्यटन के रूप में कैनो स्लैलम का लुत्फ उठा सकेंगे।

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महेश्वर. खेलो इंडिया के तहत मध्यप्रदेश के महेश्वर की सहस्त्रधारा में कैनो स्लैलम की धूम मचेगी, 6 और 7 फरवरी को देशभर से आनेवाले खिलाड़ी यहां प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान आप भी यहां ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन करने के साथ ही पर्यटन के रूप में कैनो स्लैलम का लुत्फ उठा सकेंगे।

दे श का पहला केनो स्लैलम कोर्स मध्यप्रदेश के महेश्वर की सहस्रधारा में है। कोर्स के बनने से अब प्रदेश से इस खेल में बड़े खिलाड़ी निकलने शुरू हो जाएंगे। महेश्वर में नर्मदा के सहस्रधारा क्षेत्र में 6 और 7 फरवरी को खेलो इंडिया के तहत कैनो स्लैलम प्रतियोगिता होगी। नर्मदा नदी के फ्लैट वाटर और सहस्रधारा की तेज धार में मध्यप्रदेश और अन्य प्रदेशों से आए खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह और शाम को बोट चलाकर अभ्यास कर रहे हैं।

इस कोर्स को तैयार करने में खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 30 लाख रुपए खर्च किए हैं। जर्मनी व अन्य देशों में स्लैलम कोर्स कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। हमारी ताकत यह है कि सहस्रधारा में पहली ही नजर में कोर्स को चिह्नित कर लिया गया था।

दरअसल, सहस्रधारा में नर्मदा नदी चट्टानों के बीच कई धाराओं में बहती है। जहां पानी दूध की धारा की तरह सफेद दिखाई देता है। सैलानी यहां नाव में बैठकर घूमने आते थे। जब से कायकिंग शुरू हुई, तब से यह स्थल लोकप्रिय हो गया है।

संक्षिप्त में समझें...क्या है केनो स्लैलम

केनो स्लालम काफी तेज बहाव वाले पानी में संतुलन बनाने का खेल है। इसमें रेस 250 मीटर लंबी होती है। बहाव काफी तेज होता है। इसमें ऐसे 25 गेट बने होते हैं। प्रतिभागी को उन्हीं दरवाजों से गुजरना होता है। ऐसा दो बार करना होता है। महेश्वर में नर्मदा नदी में इतना ही तेज बहाव है।

गेट को बिना स्पर्श किए ही निकलना

तेज जलधारा रोमांच से भरी होती है। कैनो स्लैलम में किसी विशेष बोट को ऐसे पाइप गेट से निकालना होता है, जो हवा में लटकी होती है। बिना स्पर्श किए कम समय में गुजरने पर नंबर मिलते हैं। तेजधार के विपरीत भी उस नाव-बोट को निकालना होता है। जलधारा में 10 से 20 गेट बनाए जाते हैं।

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