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लाड़ली बहनें नहीं छोड़ना चाहती लाभ, पोर्टल पर बताया लाभ छोड़ा

locationखरगोनPublished: Dec 28, 2023 04:00:54 pm

Submitted by:

Amit Bhatore

पोर्टल में तकनीकी खामी से 55 से अधिक लाड़ली बहनों के लाभ छोड़ना बताया

लाड़ली बहना योजना
लाड़ली बहनें नहीं छोड़ना चाहती लाभ, पोर्टल पर बताया लाभ छोड़ा
लाड़ली बहनें नहीं छोड़ना चाहती लाभ, पोर्टल पर बताया लाभ छोड़ा

-पोर्टल में तकनीकी खामी से 55 से अधिक लाड़ली बहनों के लाभ छोड़ना बताया

-जिले में तीन लाख 24 हजार महिलाओं को मिल रहा योजना का लाभ

खरगोन. लाड़ली बहना योजना में एक विसंगति सामने आई है। जिले में कई पात्र लाड़ली बहनों ने योजना का परित्याग नहीं किया है। परंतु पोर्टल पर उनके द्वारा योजना का परित्याग करना बताया जा रहा है। इसके कारण लाड़ली बहनों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लाड़ली बहनें योजना का परित्याग नहीं करना चाहती है। जिले में करीब 55 महिलाओं ने इस संबंध में सूचना दी है। यह संख्या बढ़कर 150 तक हो सकती है। हालांकि इस पूरे मामले में पोर्टल में तकनीकी कारण सामने आए हैं। जिसके कारण पात्र लाड़ली बहनों का योजना से परित्याग करना दर्शाया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में लाड़ली बहना योजना अंतर्गत करीब तीन लाख 24 हजार महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ मिल रहा है। इस योजना का बाद में दायरा बढ़ाया गया था। इससे संख्या भी बढ़ी है।
1250 रुपए प्रतिमाह मिल रहे योजना में

महिलाओं के आर्थिक स्वालंबन, उन पर आश्रित बच्‍चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार और परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनाई गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जनवरी को प्रदेश में यह योजना शुरू की गई थी। जिसके अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपए का लाभ दिया जा रहा था। बाद में यह राशि बढ़ाकर 1250 रुपए का प्रतिमाह कर दी गई थी। चौहान ने आने वाले समय में तीन हजार रुपए तक राशि बढ़ाने की घोषणा भी की थी। प्रतिमाह की 10 तारीख को यह राशि भेजी जाती है। यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण तथा आर्थिक स्वावलंबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

वर्शन

पोर्टल पर कुछ महिलाओं का योजना का परित्याग करना दर्शाया जा रहा है। महिलाओं ने इस संबंध में सूचना दी है। इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय में जानकारी भेजी गई है। -रत्ना शर्मा, जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, खरगोन

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