
एक गांव ऐसा जहां वर्षों से रामायण सीरियल देखकर दिन की शुरुआत करते हैं श्रद्धालु
खरगोन. अयोध्या में बन रहे भव्य मंदिर में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर निमाड़ अंचल में भी माहौल राममय हो गया है। शहर के पास एक गांव ऐसा भी है जहां पिछले 30 साल से ग्रामीण नियमित रूप से रामानंद सागर कृत रामायण सीरियल देख रहे हैं। वर्ष 2007 से रामायण का अखंड प्रसारण शुरू किया गया है। जहां प्रतिदिन श्रद्धालु रामायण देखकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं। समीपस्थ ग्राम बेड़ियाव की इंद्र टेकड़ी पर संतश्री पूर्णानंद बाबा ने तपस्या की थी। वर्ष 1992 में उज्जैन में लगे कुंभ में एक माह तक अखाड़ा लगाकर रामायण सीरियल देखी थी। कुंभ से आने के बाद बेड़ियाव के श्रीराम मंदिर में सीरियल की शुरुआती की गई। 22 जुलाई 2002 में संतश्री के ब्रह्मलीन होने के बाद रामायण का नियमित प्रसारण जारी है। संतश्री की तपोभूमि इंद्रटेकड़ी पर अाश्रम व मंदिर का निर्माण किया गया है। आश्रम में 2007 से नियमित रूप से दिनभर रामायण का प्रसारण किया जा रहा है। श्रद्धालु मंदिर में भगवान श्रीराम व संतश्री के दर्शन के साथ रामायण सीरियल देखकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं।
वीसीआर की 26 कैसेट में आते थे 78 एपिसोड
मंदिर के पुजारी पं. सुधीर भट्ट बताते हैं कि वर्ष 1992 में संतश्री उज्जैन के महाकुंभ में आखाड़ा लगाया था। यहां रामायण सीरियल एक माह तक प्रसारित की गई थी। वहां से आने के बाद बेड़ियाव में सीरियल देखी गई। उस वक्त टेलीविजन कम घरों में ही होती थी। वीसीआर का जमाना था। किराए से टीवी और वीसीआर लाते थे। लाइट जाने पर जनरेटर की व्यवस्था की गई थी। रामायण सीरियल के 78 एपिसोड है। वीसीआर की 26 कैसेट में पूरी सीरियल आती थी। एक कैसेट का 10 रुपए व टीवी का 100 रुपए प्रतिदिन किराया था। वर्ष 2007 से इंद्र टेकड़ी के आश्रम में सुबह आॅडियो और शाम को वीडियो रामायण सीरियल देखी जा रही है। सीडी के साथ ही पेन ड्राइव में रामायण के सभी एपिसोड है। संतश्री पूर्णानंद बाबा सेवा संस्थान के सचिव दिलीपसिंह चौहान ने बताया कि संतश्री ने असनगांव में रामलीला की शुरूआती की थी। वे युवाओं को मंचन का प्रशिक्षण देते थे। श्रद्धालु दौलतसिंह पटेल व धनसिंह सोलंकी ने कहा कि वे नियमित रामायण का प्रसारण देखते हैं। उन्हें सीरियल देखकर आध्यात्मिक अनुभूति होती है।
Published on:
21 Jan 2024 02:06 pm
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