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गायत्री महायज्ञ-घेगांव में बह रही धर्म की बयार, 500 ग्रामीणों ने ली गुरु दीक्षा

हरिद्वार से पहुंचे डॉ. चिन्मय पंड्या ने युवा शक्ति का कराया बोध, बोले- शिवाजी, राणा, भगतसिंह और रानी लक्ष्मीबाई से सीखे देशभक्ति

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खरगोन

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Hemant Jat

Mar 04, 2023

खरगोन.
जिले के सेगांव क्षेत्र स्थित घेगांव में चल रहे 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ और संस्कार महोत्सव में धर्म की बयार बह रही है। आयोजन के तीसरे दिन शांतिकुंज हरिद्वार से पहुंचे प्रतिनिधियों द्वारा यज्ञ का कार्य संपन्न हुआ। यज्ञोपवीत, पुंसवन एवं गुरु दीक्षा संस्कार करवाया गया। लगभग 500 भाई-बहनों ने गुरु दीक्षा ग्रहण की। पं. परमानंद द्विवेदी ने गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा गुरु ही नर पशु को नर नारायण बनाते है। ईश्वर तत्व का बोध कराता है। समर्थ सद्गुरु की प्राप्ति होती है और जीवन धन्य हो जाता है। हम सब धन्य हैं, जो आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा से जुड़ रहे हैं।

रक्तदान शिविर में ग्रामीणों ने की सहभागिता

आयोजन स्थल पर श्ुाक्रवार दोपहर में ब्लड डोनेशन कैंप लगाया गया। जिसमें घेगांव सहित 108 गांव के परिजनों ने सहभागिता करते हुए रक्तदान किया। मनावर के मोहन लाल पाटीदार भवरिया वाले जिन्होंने हजारों लोगों को ब्लड डोनेशन के लिए प्रेरित किया और गिनीज बुक में रिकॉर्ड बनाया वह भी उपस्थित रहे। शाम को सिंगाजी के निमाड़ी भजनों की प्रस्तुति दी गई। मीडिया प्रभारी महेश दसौंधी व लखन विश्कर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में 108 गांवों के गायत्री परिजन तन, मन, धन से सहयोग किया।

शिवाजी, भगतसिंह और रानी लक्ष्मीबाई से सीखें देशभक्ति

शांतिकुंज हरिद्वार देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या बतौर अतिथि पहुंचे। उन्होंने मंच से युवाओं से आव्हान किया और समाज हित में काम करने की बात कही। युवावस्था मानव जीवन का वसंत काल होता जब विधाता की दी हुई सारी शक्तियां सहस्त्रधारा बनकर फूट पड़ती है जब हर मन, उमंग एवं उत्साह से परिपूर्ण होता है । आज भी राष्ट्रीय युवा चेतना के उन स्वरों को खोज रहा है जिनसे समग्र क्रांति एवं नए इतिहास की रचना का गान प्रस्फुटित होगा। अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो। पंड्या ने शिवाजी, भगतसिंह, रानी लक्ष्मीबाई की राष्ट्रभक्ति का उदाहरण देते हुए युवाओं से उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। गायत्री परिवार मानवता का परिवार है। मनुष्य का जीवन नर के रूप में मिला है, उसे नारायण के रूप में देखें। रावण से ज्यादा बल बाली में था। रावण अंगद का पैर भी नहीं उठा पाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कोर्ट में 72 प्रतिशत मुकदमे भाइयों के बीच चल रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर समाज को विचार करना चाहिए।