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किसानों को फूटा गुस्सा, कलेक्टोरेट में की नारेबाजी

फसल बीमा योजना में की संशोधन की मांग, भारतीय किसान संघ ने विसंगतियों के चलते रखी योजना एैच्छिक करनेे की मांग
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खरगोन

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Hemant Jat

•

Updated: 11 Apr 2018, 1:31 AM IST

Indian Farmers Union News

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खरगोन. केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाएं खुद किसानों को नागवार गुजर रही हैं। मंगलवार को भारतीय किसान संघ ने प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर राजेंद्रसिंह को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही उपज की खरीदी के लिए की गई ऑनलाइन व्यवस्था आदि में बिंदूवार विसंगतियां बताते हुए इनमें संशोधन की मांग की।

किसान संघ जिलाध्यक्ष श्याम पंवार ने बताया ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें किसानों को फसल उत्पादन में लागत के आधार पर मूल्य मिले। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को एैच्छिक किया जाना चाहिए। संघ के गोपाल पाटीदार ने बताया किसानों से उनकी लगाई गई फसल की जानकारी लेकर ही बीमा किया जाए। अभी बैंक में बैठे-बैठे सालों से चली आ रही खसरे में लिखी हुई फसल का ही बीमा किया जा रहा है जो गलत है। रेवाराम भायडिय़ा ने कहा फसल बीमा योजना में खेत को इकाई माना जाए। फसल बीमा के नाम पर ऋण बीमा किया जा रहा है, यह भी गलत है। फसल के उत्पादन का बीमा किया जाना चाहिए। इस दौरान कमलेश पाटीदार, सदाशिव पाटीदार, अकलीम खान सहित अन्य किसान मौजूद थे।

सीसीबी व्यवस्था पर उठाए सवाल
भाकिसं उपाध्यक्ष गजानंद बांके ने सीसीबी की ऋण वितरण व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा बैंक प्रबंधक के मनमाने रवैये से किसान डिफाल्टर हो रहे हैं। वर्तमान में किसान केसीसी ऋण जमा करने पहुंच रहे हैं तो उन्हें एक माह बाद दोबारा ऋण दिए जाने की बात कही जा रही है, जो नियम विरुद्ध है। किसान राजेंद्र जायसवाल, धीरज राठौड़, सोनू पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा केसीसी ऋण का तत्काल पलटा किया जाता है न कि एक माह बाद। ऐसे में किसान का डिफाल्टर होना लाजमी है। कई किसान कर्ज लेकर ऋण जमा करते हैं। ऐसे में उन्हें एक माह बाद राशि मिलती है तो आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा योजना अनुसार खाद के लिए ऋण लेने पर 10 प्रतिशत अनुदान मिलता है, उसमें भी बैंक प्रबंधक केसीसी ऋण राशि सहित लौटाने का तकादा लगा रहे हंैं, पूरी राशि जमा नहीं करने पर खाद अनुदान नहीं दिया जा रहा है।

चना खरीदी भी नहीं हुई शुरू
किसानों ने एसडीएम को बताया मुख्यमंत्री ने 10 अपै्रल से प्रदेश में चना खरीदी शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन जिले में एक भी किसान को उसकी उपज खरीदी केंद्र तक ले जाने के लिए मैसेज नहीं आया। इसके अलावा जिले में मात्र 6 खरीदी केेंद्र खोले गए है, जबकि 21 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, ऐसे में असुविधा होने पर व्यवस्था बिगड़ेगी और किसानों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

इन सुधारों पर कराया ध्यानाकर्षण
-फसल बीमा प्रीमियम जमा करने पर किसानों को अनुबंध पर्ची बनाकर दी जाए।
-फसल के नुकसान का आंकलन कर पंचनामा खेत पर बनाकर एक प्रति किसान को मिले।
-फसल बीमा नीति में 5 वर्षों की औसत उपज के बजाय प्रतिवर्ष उपज के आधार पर नुकसान का आंकलन हों।
-बीमा करने वाली कंपनी का कार्यालय जिला व विकासखंड स्तर पर अनिवार्य हो।
-वर्ष 2017 खरीफ का बीमा क्लेम शीघ्र दिया जाए।
-प्रीमियम राशि किसानों से चेक के माध्यम से बीमा कंपनी को दिलाई जाए।