
Indore-Manmad railway project do late
खरगोन.
निमाड़ के लिए उपयोगी मानी जा रही बहुप्रतिक्षित इंदौर मनमाड़ रेल लाइन को लेकर संशय की स्थिति बरकरार है। सबकुछ तय होने के बाद भी अभी तक रेलवे बोर्ड की उदासीनता से क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में खरगोन जिले की व्यापारिक उम्मीदों को भी धक्का लगा है। प्रोजेक्ट पर २०१८ में काम शुरू होने के दावे किए गए थे। उस प्रोजेक्ट के लिए अब जमीन अधिग्रहण के आदेश ही नहीं हुए हैं।ऐसे में अब रेलवे संघर्ष समिति ने रेलवे बोर्ड के खिलाफ फिर से कोर्ट जाने की बात कही है।जबकि महाराष्ट्र के धुलिया शहर के विधायक अब नागरिक उड्ड्ययन मंत्री नितिन गड़करी से मामले की शिकायत करने की तैयारी में हैं।
इंदौर मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट शुरूहोने से हालांकि खरगोन को सीधे तौर पर तो कोई फायदा नहीं होने वाला है, लेकिन यहां के व्यापार को बढ़ाने में इस रेलवे लाइन का बहुत फायदा मिलने की उम्मीद हैं। खरगोन का व्यापारी वर्ग भी इस प्रोजेक्ट पर जल्द से जल्द काम शुरू होने का इंतजार कर रहा है। इधर प्रोजेक्ट के लिए अभी तक जमीन अधिग्रहण नहीं होने से मामला अटका हुआ है।
मंजूरी के बाद अटक रहा है प्रोजेक्ट
रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनोज मराठे ने बताया कि इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के बाद बजट में मंजूरी मिली। इसके बाद मप्र और महाराष्ट्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिल गई।प्रोजेक्ट में खर्चहोने वाली राशि को लेकर भी मसला हल हो गया। लेकिन इसके बाद भी इस प्रोजेक्ट पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण काम शुरूनहीं हो पा रहा है। मराठे ने आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझ कर इस प्रोजेक्ट में देरी कर रहे हैं। यहीं कारण है कि रेलवे के खिलाफ 2011 में जनहित याचिका के जरिए कोर्ट जाना पड़ा था। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने 2256 96 .92 करोड की अंतरिम रिपोर्ट तैयार करके मंजूरी दी थी।मराठे ने कहा कि यदि दो माह में रेलवे बोर्ड भूमि अधिग्रहण संबंधित कार्रवाई शुरूनहीं की तो इंदौर हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील टीएन सिंह और हेमलता गुप्ता के जरिए बोर्ड को नोटिस जारी कराया जाएगा। मराठे ने बताया कि इस संबंध में धुलिया के विधायक अनिल गोटे भी जल्द ही नागरिक उड्डययन और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करेंगे।
प्रोजेक्ट से मिलेगी खरगोन के व्यापार को गति
खरगोन के कपास व्यापारी, चैंबर ऑफ कॉमर्स और मप्र लघुउद्योग संघ के प्रदेशाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल का कहना हैकि इस रेलवे लाइन को लेकर खरगोन के व्यापारियों में भी उत्साह हैं। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने पर यहां के व्यापार को गति मिलेगी।यहां ४० से ज्यादा जिनिंग पे्रसिंग हैं। जिनमें कॉटन बेल्स (कपास गठान) तैयार होती है। यह कॉटन बेल्स मुंबई और साउथ में भेजी जाती है। फिलहाल यह मॉल ट्रकों से जाता है। यह रेल प्रोजेक्ट शुरू होने से ठीकरी और जुलवानिया स्टेशन से ट्रेन के जरिए यह मॉल भेजा जा सकेगा।इसका खर्च ७५ प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इसका फायदा कपास के किसानों को भी होगा।अग्रवाल कहते हैं कि यहां से लाल मिर्च, मक्का, गेंहू आदि बाहर भेजा जाता है।यह मॉल भी ज्यादा तादाद में भेजा जा सकेगा। निमरानी, खलघाट आदि में मौजूद खाद के कारखाने, टैक्सटाइल्स, यार्न फैक्ट्रियां आदि को भी इसका सीधा फायदा होगा। उद्योग बढ़ेगा तो खेती भी बढ़ेगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इस रेलवे प्रोजेक्ट के बाद हम भी दूसरे राज्यों से प्रतियोगिता करने की स्थिति में आ जाएंगे।यहां की कपास भी पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, वियतनाम सहित अन्य देशों में जा सकेगी।
Published on:
30 Dec 2017 12:51 pm
बड़ी खबरें
View Allखरगोन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
