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पिपरी तालाब से बदली बंजर जमीनों की सूरत, जहां फैला था पतझड़ वहां खेत फसलों से लदे

-जिस क्षेत्र ने वर्षो किया पानी इंतजार, वहां अब बह रहे हैं सूखे नाले-खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना के बने पिपरी तालाब से क्षेत्र में हो रही सिंचाई -आने वाली गर्मी में शहर का कंठ नर्मदा के जल से तर करेगा यह तालाब

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खरगोन

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Gopal Joshi

Feb 11, 2020

Kharagon Lift Irrigation Scheme.

खरगोन. वर्तमान में पिपरी तालाब में यह है पानी की स्थिति।

खरगोन.
धरती को जो हिस्सा कभी पतझड़ सा लगता था वहां आज हरियाली लदी है। जो नाले बरसों पानी को तरसे वह अब कल-कल बहने लगे हैं। जिन खेतों की मिट्टी मृत प्राय हो गई थी वह अब सोना उगलने को तैयार है। अधिकांश सूखाग्रस्त रहने वाला खरगोन जिले का वह भाग अब पानी से लबालब हो गया है। सूखी जमीन पर नर्मदा का यह जल कई भागीरथी प्रयासों के बाद पहुुंचा है। हम बात कर रहे हैं खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना के तहत पीपरी में बने तालाब की। इस तालाब ने कई हजारों हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ कर दिया है। इसके बूते किसान अब तनकर चलने लगे हैं। पिपरी तालाब से फिलहाल ऐसे नालों व तालाबों में पानी छोड़ा गया है जहां पानी की यह धार अमृत का काम कर रही है। फिलहाल सूखे का दंश झेल रहे इन क्षेत्रों की सूरत ही बदल गई है।
पिपरी तालाब से अभी लाभान्वित गांवण्ण्ण् पीपरी, ईच्छापुर, नंदगांव, बगुद, उबदी, टेमला, आसनगांव गोपालपुरा, रमणगांव, रणगांव, बिरोठी, खरगोन, सुरपाला, निमगुल, बेडियाव, अघावन, बरसलाय, गुजारी आदि गांव के खेतों की सिचांई की जा रही है। ख्ेातों के अलावा तालाब का यह पानी इन गांवों में से अधिकांश जगह लोगों की प्यास भी बझा रहा है। तालाब के पानी को उन नालों में छोड़ा गया है जो बरसों पहले बारहों माह बहते थे। बारिश का दायरा घटा, जमीनी स्तर पाताल में उतरा तो यह नाले सूख गए। अब इन नालों में तालाब का पानी छोड़ा गया है जो क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

बरसों बाद नालों में पानी
ग्राम निमगुल के किसान सुभाष यादव, जितेंद्र यादव, बरसलाय के नारायण पटेल, संतोष यादव ने बताया उनके खेतों के पास बहने वाले नाले में बारिश सीजन में ही पानी रहता है। नवंबर-दिसंबर में यह नाला सूख जाता है, लेकिन अभी इस नाले में तालाब का पानी छोड़ा गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि यह नाला बह निकला है।

दिसंबर में दम तोड़ते थे जलस्रोत, अभी पर्याप्त पानी
किसान राकेश यादव, कुंदन यादव, शिवराम पटेल ने बताया उनके खेतों की ट्यूबवेल नवंबर-दिसंबर में ही बंद हो जाती थी, लेकिन जब से नालों में पानी छोड़ा है असर यह हुआ है कि फरवरी आधा बीतने के बाद भी ट्यूबवेल पानी उगल रहे हैं। यहां पांच व दस हॉर्सपॉवर की मोटरपंप चल रही है।

वर्षा आधारित गांवों में भी पहुंचा पानी
पिपरी के महेश पाटीदार ने बताया क्षेत्र के रजूर, ईच्छापुर, टेमला यह ऐसे गांव है जो वर्षा आधारित है। इन गांवों में जल संसाधन विभाग के तालाबों में भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। फिलहाल इन गांवों में पानी का सप्लाय तालाबों के जरिए हो रहा है। किसान सिंचाई कर रहे हैं।

दो फसलें लेने लगे किसान
क्षेत्र के किसान तोताराम सेन, गणेश पाटीदार, अमृत यादव, शोभाराम चौहान ने बताया अभी तक बारिश सीजन की फसल लेते थे। कपास की उपज लेने के बाद खेत गर्मी के दिनों में खाली रहते थे। लेकिन अब पानी उपलब्ध होने लगा है। अब गर्मी की फसल भी लेंगे। कई किसान ऐसे थे जो गेहंू फसल की बोवनी नहीं कर पाते थे, लेकिन नालों व तालाबों में पानी छोडऩे के बाद यहां किसानों ने नवंबर-दिसंबर में गेहंू की बोवनी की है।

550 करोड़ की है खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना
नर्मदा घाटी विकास प्रधिकरण के अफसरों ने बताया 550 करोड़ की इस खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना को तीन चरणों में बांटा गया है। पिपरी तालाब तीसरे चरण का हिस्सा है। योजना से 4 तहसीलों के 152 गांवों को लाभ दिया जाएगा। योजना के तीनों चरणों में जिले के 152 गांव में बसने वाली 18536 किसान परिवारों की 33 हजार 140 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। साथ ही नागरिकों को पेयजल भी मिल सकेगा।

तीन चरणों में ऐसे हुआ काम, यह होगा फायदा
उल्लेखनीय है कि खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना के प्रथम चरण में छिर्वा व दूसरे चरण में वेदा-कुंदा नदी का क्षेत्र लिया गया है। तीसरे चरण में पानी पिपरी तालाब तक पहुंचा है। पहले चरण में वेदा नदी की मदद से 9.५० हजार एकड़, दूसरे चरण में 11 हजार 200 एकड़ व तीसरे चरण में 12 हजार 500 एकड़ कृषि सिंचित होगी।

अप्रैल में दूर होगी शहर की पेयजल व्यवस्था
पिपरी तालाब से ही शहर को भी जोड़ा जाएगा। कलेक्टर गोपालचंद डाड ने कहा- पिपरी तालाब से शहर तक पानी लाने की तैयारी हो चुकी है। कोशिश की जा रही है कि अप्रैल तक यह पानी यहां पहुंच जाए। यदि यह पानी समय रहते यहां आता है तो आने वाली गर्मी में शहर को पेयजल संकट से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। पिपरी तालाब का पानी बैराज में छोड़ा जाएगा, यहां मोटरपपों से यह पानी शहर में बनी पानी की टंकियों तक पहुंचाया जाकर शहर में सप्लाय करेंगे।