
महाराष्ट्र पैदल गांव लौटे मजदूरों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर की शिकायत
खरगोन.
मोटी मजदूरी दिलाने का झांसा देकर जिले से महाराष्ट्र गए बंधक बनाने का मामला सामने आया है। बड़वाह थानाक्षेत्र के ग्राम डेहरी, बेडिय़ा आदि गांवों से अक्टूबर में करीब 20 मजदूर दलालों के मार्फत महाराष्ट्र गए थे। इनमें से 5 मजदूर ठेकेदार के चंगुल से भागकर पैदल अपने गांव पहुंचे। इसके बाद बंधक बनाए जाने के मामले का खुलासा हुआ। अब शेष बचे मजदूरों के परिजन पुलिस से अपनों को सकुशल वापस लाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जनवरी में भी बड़वाह ब्लाक के मजदूरों को बंधक बनाए जाने की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिला पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर से मजदूरों को वापस लाने में सफलता हासिल की थी।
गुरुवार को एसपी कार्यालय पहुंचे प्रेमसिंग, नानी बाई, सुनीता आदि ने एसपी शैलेंद्र सिंह से मुलाकात की। शिकायती आवेदन में बताया दीपावली के दो दिन बाद यानी अक्टूबर में धनराज तीड़ निवासी खंाडेवाडी माजलगांव बीड़ महाराष्ट्र आया और करीब डेढ़ माह के गन्ना कटाई काम के लिए 25-25 हजार रुपए प्रति मजदूरी दिलाने का बोलकर महाराष्ट्र चलने के लिए कहा। दलाल ने सभी को एडवांस रुपए भी दिए। मजदूरों के साथ डेहरी निवासी होकर प्रेमसिंग का भतीजा गणपत, नानीबाई का बेटा अंकित, सुनीता बाइक का देवर गणेश के अलावा प्रताप, सुनीता, शीला सहित 20 मजदूरों महाराष्ट्र गए थे। अब चार माह का समय बीत गया है, उनके परिवार के लोग लौटे नहीं है।
18 घंटे कराते थे काम
शिकायतकर्ताओं ने एसपी को बताया पिछले सप्ताह मजदूरों के साथ गए गांव के प्रताप और सुनीता वापस लौटे। उन्होंने बताया गांव से ले जाने के बाद उनके मोबाइल ठेकेदार ने रख लिए और दूसरे दलाल के पास उन्हें काम पर भेज दिया। सुबह 4 बजे गन्ना कटाई के साथ ही रात 12 बजे तक काम करवाया जाता है। पूरा काम करने के बाद भी सुकून से खाना खाने नहीं दिया जाता। जब वह लोग वहां से भागने की कोशिश करने लगे तो पथराव कर दिया, कुछ लोग पकड़े गए, वे लोग पैदल ही महाराष्ट्र से अपने घरों की और मुश्किल से आए।
पैदल पहुंचे घर
सुनीता बाई ने उनका पति प्रताप, ननद सुनीता, देवर गणपत मजदूरी पर गया है। जैसे. तैसे उनका पति प्रताप और ननद सुनीता लौट आए हंै। वापस आए मजदूरों ने बताया गन्ना खेत मालिक ने उन्हें बंधक बना लिया था। जबकि गणपत को सोलापुर में रखा गया है, वहां ठेकेदार बात नहीं करवा रहा है। मारता.पीटता और भूखे पेट काम कराता था। इसके बाद जब धनराज को फोन लगाया तो उसने कहा जो लोग घर लौटे है, उनके एवज में डेढ लाख रुपए दो तब तुम्हारे अपने वापस मिलेंगे, नहीं तो भूल जाओ। पुलिस को बताया तो अच्छा नहीं होगा। मारपीट का वीडियो भी वाट्सअप और फेसबुक के जरिये दिखाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने एसपी को कहा हमारे पास तो खाने के पैसे नहीं है, वापस रुपए कहां से देंगे।
कार्रवाई के दिए हैं निर्देश
-मामला संज्ञान में आया है। मजदूरों को वापस लाने की कार्रवाई शुुरू कर दी है। बड़वाह एसडीओपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हंै। एडमिनीस्टे्रशन से चर्चा कर महाराष्ट्र पुलिस की मदद से मजदूरों को वापस लाएंगे।
शैलेंद्र सिंह चौहान, एसपी खरगोन
Published on:
11 Feb 2021 10:23 pm
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