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भाई ने बहन से कहा तुम फेल हो गई, सुनकर छात्रा ने लगा ली फांसी

सुसाइड...आदिवासी अंचल के ग्राम कोटबेड़ा की घटना, खरगोन के मोतीपुरा में सरकारी स्कूल में पढ़ती थी छात्रा

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खरगोन

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Hemant Jat

May 16, 2019

MP Board Exam failure student Suicide

MP Board Exam failure student Suicide

खरगोन.
प्रदेशभर में बुधवार को माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। वहीं खरगोन जिले के आदिवासी अंचल चिरिया क्षेत्र के ग्राम कोटबेड़ा से एक बुरी खबर सामने आई है। इसी गांव में सविता पिता अनारसिंह (१८) ने १२ वीं में फेल होने के गम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सविता, दो भाई व एक बहन के साथ खरगोन में किराए से रहकर मोतीपुरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई करती थी। उसने कला संकाय से १२ वीं की परीक्षा दी थी। बुधवार को बोर्ड का रिजल्ट जारी हुआ। इस समय सविता कोटबेड़ा में ही अपने घर पर थी। खरगोन में भाई ने रिजल्ट देखकर सविता को फोन पर बताया कि वह फेल हो चुकी हैं। इस गम को छात्रा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने घर पर ही फांसी का फंदा लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। उक्त घटना बुधवार शाम करीब ४ बजे की हैं। परिजनों ने गुरुवार को पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लाश को झिरन्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

खेत पर गए थे परिजन
परीक्षा परिणाम को लेकर अन्य विद्यार्थियों की तरह सविता को भी बड़ा इंतजार था। लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि वह परीक्षा में पास नहीं हुई, तो उसे सदमा लगा। शाम को जब परिजन खेत पर थे। उसी दौरान सविता ने घर पर रस्सी के सहारे फंदा लगा ली। शाम को परिजन घर लौटे, तो शव फंदे पर लटका देख उनकी आंखे फटी रह गई।

पिता की आंखों से निकले आंसू
परिजनों के मुताबिक सविता सहित परिवार में नौ भाई-बहन हैं। उसकी सगी मां की मौत पूर्व में हो चुकी हैं। बेटी द्वारा उठाए गए इस कदम से पिता को बड़ा धक्का लगा। जिसकी आंखों से आंसू बह निकले।

पत्रिका व्यू...
बच्चों का हौसला बढ़ाए अभिभावक
विद्यार्थियों का मन और मस्तिष्क कोमला होता हैं। इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी भी है कि वह बच्चों का हौसला बढ़ाए। बोर्ड परीक्षा में जो बच्चे सफल नहीं हुए है, वह अनावश्यक तनाव न रखें। परीक्षा पास करने के ओर भी मौके मिल सकते हैं। सचिन तेंदुलकर, सलमान खान जो पढऩे में कमजोर रहे, लेकिन वह आज बड़े मुकाम तक पहुंचे हैं। हमें इससे सीख लेना चाहिए।