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अब बिचौलिए कमाएंगे जमकर पैसा, किसानों ने जताई नाराजगी

सरकारी मूंग खरीदी में लेटलतीफी से प्रत्येक क्विं. पर किसानों को होगा दो हजार का घाटा

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खरगोन

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Amit Onker

Jul 16, 2022

moong crop

समर्थन मूल्य पर होगी मूंग की खरीदी।

खरगोन. राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी करने के लिए देर सवेर निर्णय लिया है। 18 जुलाई से पंजीयन प्रक्रिया आरंभ होगी। यह फैसला दो महीने देरी से लिया गया। जिसका प्रत्यक्ष फायदा किसानों को न मिलते हुए बिचौलिए उठाएंगे। क्योंकि जून-जुलाई में कई छोटे किसानों ने अपनी उपज औने-पौने दामों पर बाजार में बेच दी। सरकार की इस मंशा पर किसानों ने सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई है।
भाकिसं से संभागीय अध्यक्ष श्याम पंवार ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल मई के अंत में बाजार में आ जाती है। पिछले साल जून में सरकारी खरीदी शुरू हुई थी और 15 सितंबर तक चली। इसी उम्मीद में जिले में किसानों ने जमकर मूंग बोया। पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव के कारण खरीदी शुरू नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में किसानों ने घाटा उठाकर बाजार में उपज बेच दी। अब केवल दस प्रतिशत बड़े किसानों के पास ही उपज बची है। जबकि 90 प्रतिशत किसानों ने अपना माल व्यापारियों ने बेचा हैं।


कृषक महेंद्र बिरला, दिनेश यादव, सतीश चौहान आदि ने बताया कि पिछले साल समर्थन मूल्य पर खरीदी को देखते हुए गर्मी में मंूग बोया था, लेकिन दो महीने तक जब सरकारी खरीदी नहीं हुई, तो मजबूर होकर 5000 से 5500 रुपए क्विंटल में उपज बेच दी। छोटे किसान जिन्होंने 5 से 10 क्विंटल के बीच उत्पादन लिया है, उन सभी ने घाटा उठाकर फसल बेच दी। इस प्रकार प्रति क्विंटल लगभग दो से ढाई हजार रुपए का नुकसान हुआ है। मालूम हो कि सरकार ने इस साल मूंग का समर्थन मूल्य 7275 रुपए घोषित किया है।


छह हजार हेक्टेयर बढ़ा रकबा
पिछले साल की तुलना में इस बार जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा बढ़ा है। इस हिसाब से उत्पादन भी अधिक हुआ। कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार गतवर्ष जिले में 10235 हेक्टेयर में फसल बोई गई थी। वहीं इस वर्ष रकबा 16331 हेक्टेयर तक पहुंच गया। सनावद, बड़वाह, महेश्वर, कसरावद तहसील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसानों ने गर्मी के सीजन में मूंग बोया था।


33.78 करोड़ की हुई गतवर्ष खरीदी
विभागीय जानकारी के अनुसार गतवर्ष जिले में मूंग उपज बेचने के लिए 5451 किसानों ने पंजीयन कराया था। सत्यापन के पश्चात 5320 वास्तविक किसान सामने आए थे। इनमें से 4186 ने उपज बेची। जिन्हें 6000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 33.78 करोड़ का भुगतान हुआ था। शासन स्तर से खरीदी के लिए घोषणा तो करी दी है, किंतु शनिवार तक लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। इससे भी भ्रम की स्थिति बन रही है।


आदेश का इंतजार
& सरकार द्वारा 18 जुलाई से प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। अभी लिखित आदेश नहीं मिला है। जैसे ही आदेश आता है, प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। पिछले साल भी 56 हजार क्विंटल की खरीदी हुई थी।
एमएल चौहान, उपसंचालक कृषि विभाग खरगोन


सरकार की नीयत नहीं
& सरकार की नीयत नहीं है कि किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम मिले। मूंग खरीदी में देरी से यह बात साफ हो गई। कई लघु और मझले किसानों ने अपनी उपज घाटा उठाकर बाजार में कम भाव में बेच दी है। जब समय था, तब खरीदी क्यों नहीं की गई।
श्याम पंवार, संभागीय अध्यक्ष भाकिसं खरगोन