
सिविल अस्पताल में भर्ती महिलाएं
सनावद/खरगोन.
सनावद के शासकीय अस्पताल में एक फरवरी से मरीजों को भोजन, चाय-नाश्ता और फल- दूध नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध पता लगाने पर मालूम हुआ कि विगत 7 महीने से अस्पताल के बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदार द्वारा भोजन वितरण नहीं किया जा रहा है। जबकि बीएमओ ऑफिस से इन्हें भोजन वितरण किए जाने के आदेश दिए गए हैं।
सीमांक सिविल अस्पताल में प्रतिदिन करीब 250 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। जहां गंभीर मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को भी एडमिट किया जाता है। अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र से कुपोषित बच्चों को प्रतिदिन सुबह पौष्टिक नाश्ता, दूध, फल और दोपहर में भोजन देने का प्रावधान है। लेकिन सनावद के शासकीय चिकित्सालय में विगत 10 सालों से बिना हिसाब के यह कार्य संचालित हो रहा है। वहीं एक फरवरी से शासकीय अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला एवं अन्य उपचाररत मरीजों को भोजन वितरण नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में अस्पताल से जुड़े हुए स्वसहायता समूह अध्यक्ष प्रेमलता राठौड़ ने बताया की 7 माह से बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण एक फरवरी से भोजन देने का कार्य बंद कर दिया गया है। एनआरसी में तो भोजन वितरण किया जा रहा है।
नागरिकों की शिकायत
नागरिकों ने आरोप लगाया कि जब पहले से ही भोजन वितरण में अनियमितताएं हैं। ऐसी स्थिति में बिलों का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है । एक मरीज के ऊपर किए जाने वाले खर्च की बात करें तो यह आंकड़ा महीने में हजारों रुपए पहुंच जाता है। ठेकेदार की लापरवाही कहें या विभाग के स्थानीय अधिकारियों की उदासीनताए इस संबंध में कोई विभागीय सूचना ऊपरी स्तर पर नहीं भेजी गई। ना ही इसको लेकर कभी कोई सकारात्मक पहल हुई। जिससे विभाग द्वारा ठेकेदार की शिकायत का निराकरण हो सके। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि विगत 10 सालों में अधिक बिल बनाकर भुगतान ले लिया गया है। वहीं जब से बीएमओ आफिस के अधिकारी के पद पर नए अधिकारी की नियुक्ति हुई है। तब से यहां पर दिए जाने वाले भोजन और उसको लेकर आए बिलों के सत्यापन के कारणों का भुगतान नहीं हो पाया।
हजारों में बनते हैं बिल
अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की बात करें। तो 5 रुपए की चाय, 10 रुपए का दूध, 10 रुपए के फल विगत 10 साल में कभी भी मरीजों को वितरित नहीं किए गए। नागरिकों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा यहां पर कभी भी मीनू के अनुसार भोजन या फल, दूध का वितरण नहीं किया गया। इस की निगरानी भी कभी स्थानीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा नहीं की गई। अस्पताल में उपचारत आरती राहुल सेन दामखेड़ा, मधु गुडिया सेमलकर, ज्योति राजू जगताप खिराल, कृष्णाबाई पवन पुनसिया मलगांव, रवीना बलराम धनपाड़ा और शीतल संदीप बोधगांव ने बताया कि हम प्रसूति के बाद से अस्पताल में उपचाररत है लेकिन हमें ना ही भोजन मिला और ना ही दूध मिला और ना ही कभी फल वितरण किया गया। हमारे घर से ही खाद्य सामग्री बुलवाई गई ।
बजट नहीं होने से खाना देना बंद किया
प्रेमलता राठौड़ मां अन्नपूर्णा स्वसहायता समूह अध्यक्ष ने बताया की बजट नही आने के कारण विगत सात माह से हमारे बिल पास नहीं हुए। इसलिए एक फरवरी से मरीजों को खाना नहीं वितरण कर पा रहे है। वैसे एनआरसी में बच्चों को खाना दिया जा रहा है।
नियमित भोजन
हमारी जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में उपचाररत मरीजों को नियमित भोजन वितरित हो रहा है।
डॉ. राजेन्द्र मिमरोट, बीएमओ बड़वाह
Published on:
25 Feb 2023 11:15 am
बड़ी खबरें
View Allखरगोन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
