19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अपराजेय सेनापति बाजीराव ने 38 लड़ाई लड़ी, सभी में रहे विजयी

279 वर्ष पूर्व दिल्ली जाते हुए वे एक लाख सैनिकों के साथ नर्मदा किनारे रावेर खेड़ी में डेरा था।

2 min read
Google source verification

खरगोन

image

Rajiv Jain

Apr 28, 2019

Peshwa Bajirao Death anniversary on 28th April

Peshwa Bajirao Death anniversary on 28th April

बड़वाह. बाजीराव पेशवा प्रथम की 279 वीं पुण्यतिथि 28 अप्रैल को उनके समाधि स्थल रावेर खेड़ी में मनाई । 2006 से प्रारंभ हुए पुण्यतिथि समारोह का यह 13 वर्ष है। इस कार्यक्रम में बाजीराव पेशवा से जुड़े महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के लोग भी शामिल होते हैं। ग्राम रावेर खेड़ी में नर्मदा किनारे स्थित समाधि स्थल के पास इस आयोजन में सभी समाजजनों को बाजीराव भोज कराया जाता है। 13 वर्षों से आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में पिछले 5 वर्षों सेे बाजीराव भोज की परंपरा लागू की गई है। बाजीराव भोज में रोटी और बेसन खिलाया जाता है। रोटियां कार्यक्रम स्थल के आसपास के रहवासियों के घर से एकत्रित की जाती है। कार्यक्रम से जुड़े मनोज बिरला, नगेंद्र मुछाला, राजेंद्र साद, वारिस जैन व परमजीत राज्यपाल ने बताया कि इस भोज के माध्यम से बाजीराव के जीवन को बेहतर ढंग से लोग जान पाते हैं। सभी परिवारों से एकत्रित रोटी सामूहिक भोज में परोसी जाती है। तो हर परिवार से बाजीराव के प्रति श्रद्धा का संदेश भी प्राप्त होता है।

अपराजेय सेनापति थे बाजीराव
समिति के प्रचार प्रमुख परसराम चौहान एवं रितेश पाटीदार ने बताया कि विश्व के एकमात्र और अपराजेय सेनापति थे बाजीराव । जिन्होंने 38 से अधिक लड़ाइयां लड़ी तथा सभी लड़ाइया जीती। मालवा गुजरात दक्षिण के सूबेदारों एवं निजाम तथा दिल्ली के बादशाह और पुर्तगालियों को भी उन्होंने अपनी सेना के साथ मिलकर हराया था । गुजरात के गायकवाड, ग्वालियर के सिंधिया, नागपुर के भोंसल, धार के पवार, इंदौर के होलकर सरदारों को लेकर उन्होंने मराठा संघ बनाया था । 279 वर्ष पूर्व दिल्ली जाते हुए वे एक लाख सैनिकों के साथ नर्मदा किनारे रावेर खेड़ी में डेरा डाले हुए थे। भीषण गर्मी में लू लग जाने के कारण पेशवा बाजीराव की मृत्यु हो गई थी। ग्वालियर के सिंधिया सरदार ने बाजीराव की समाधि एवं परकोटे का निर्माण कराया था।