
दुर्घटना में घायल बच्ची को गोद में उठाकर एंबुलेंस तक ले जाता युवक।
बड़वाह/बलवाड़ा.
इंदौर-इच्छापुर हाइवे पर ग्वालू घाट क्षेत्र में हादसों के कारण मौतों को सिलसिला थम नहीं पा रहा है। लॉक डाउन के बाद जैसे ही वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, रोड पर ट्रैफिक बढ़ गया है। गुरुवार को बाइक पर सवार होकर महू से बड़वाह लौट रहे परिवार को रास्ते में तेज रफ्तार आयशर ने पीछे से टक्कर मार दी। जिसमें बाइक चालक सहित चार महीने की बेटी की मौत हो गई। वहीं पत्नी और एक चार साल की बेटी गंभीर रूप से घायल हैं। जिन्हें इंदौर रेफर किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़वाह जेमलपुरा निवासी विजय पिता छोटेलाल वर्मा (38) महू सुसराल से पत्नी निकिता वर्मा (34), चार साल की बेटी नायरा व चेरी (4 माह) के साथ एक्टिवा एमपी 09 एसडब्ल्यू 6056 पर सवार होकर बड़वाह की ओर अपने घर लौट रहे थे। ग्वालू घाट में बाइक को पीछे से आ रहे आयशर एमपी 09 जीई 6152 ने जोरदार टक्कर मारी दी। टक्कर इतनी जोर की थी कि बाइक पर बैठी मां निकिता कुछ समझ नहीं पाई। उसकी गोद में बैठी चार माह की उछलकर रोड पर जा गिरी। जिसने गिरते ही दमतोड़ दिया। वहीं विजय सहित पत्नी और बेटी गंभीर रूप घायल हो गए। तीनों सड़क पर तड़प रहे थे। राहगीरों की मदद से पुलिस को सूचना मिली। इसके बाद 108 की मदद से तीनों को बड़वाह लाया गया। जहां हालत गंभीर होने पर तीनों को इंदौर रेफर किया। जहां रास्ते में विजय ने भी दमतोड़ दिया। हादसे के चलते घाट सेक्शन में कुछ देर के लिए वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। दोनों मृतकों के शवों को पीएम के लिए बड़वाह लाया गया।
परिवार में इकलौता कमाने वाला था
मामा विष्णु वर्मा, अंकित वर्मा ने बताया कि मृतक विजय वर्मा अपने परिवार इकलौता कमाने वाला था। उसकी मौत की खबर सुनकर मां बदहवास हो गई। विजय के पिता छोटेलाल की पूर्व मेंं मौत हो चुकी है।
विजय गुरुवार सुबह ही पत्नी और दोनों बेटियों को लेने गया था। शुक्रवार को उसके परिवार के साथ एक निजी आयोजन में पिपल्या जाना था। इसके पूर्व परिवार के साथ यह अनहोनी घटना हो गई।
गड्ढों के कारण हो रहे हादसे, नहीं बना फोरलेन
समाजसेवी नीलेश रोकडिय़ा, संजय गुप्ता, हेमराज गुप्ता, आशाराम ठाकुर, शशिकांत पटेल ने कहा कि इस मार्ग को न तो फोरलेन बनाया जा रहा है। ना ही गड्ढे भरे जा रहे हैं। इसलिए अक्सर हादसे होते रहते हैं और लोगों की जानें जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गड्ढे बचाने के चक्कर में ही विजय और उसका परिवार हादसे का शिकार हुए। जहां पीछे से आए आयशर ने बाइक को टक्कर मार दी। एमपीआरडीसी और ठेकेदार हाइवे को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। बारिश में हाइवे पर सफर करना जानलेवा साबित होता है। क्योंकि हर साल हाइवे पर बारिश के दौरान सैकड़ों की संख्या में जानलेवा गड्ढे होते हैं। जिनकी मरम्मत के नाम पर महज खानापूर्ति होती है। एक माह पूर्व ही सिमरोल से बलवाडा तथा घाट सेक्सन में गड्ढों को भरा था। लॉक डाऊन में यातायात नहीं के बराबर रहा। वही अभी इतनी बरसात भी नहीं हुई है कि रोड खुद सके। फिर भी रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है। ग्रामीणों ने पैंचवर्क की मांग की है।
Published on:
19 Jun 2020 03:53 pm
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